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सन २०१८ के छह महीनें में अमरिका द्वारा करीब ४७ अरब डॉलर्स के हथियारों की बिक्री

वॉशिंग्टन – रशिया के साथ हथियारों का मुकाबला हुआ तो अमरिका ही जितेगी, ऐसा दावा राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प कई महीनों पहले किया था। ट्रम्प के इस दावे के पृष्ठभूमी पर अमरिका ने इस साल पहले छह महीने में करीब ४७ अरब डॉलर्स मूल्य के हथियारों की बिक्री करने की जानकारी सामने आयी है। हथियारों की यह बिक्री पिछले पूरे साल में हुए हथियारों की बिक्री से ज्यादा है। इस बिक्री के माध्यम से अमरिका दुनिया अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है, ऐसा इल्जाम ईरान ने लगाया है।

अमरिका के ‘डिफेन्स सिक्युरिटी कोऑपरेशन एजन्सी’ के संचालक लेफ्टनंट जनरल चार्ल्स हूपर ने रक्षाविषयक संकेतस्थल को दिए मुलाकात में यह जानकारी दी। ‘सन २०१७ में पूरे साल में ४१.९ अरब डॉलर्स के हथियारों के बिक्री के सौदे हुए थे। इस साल पहले छह महीने में ही अमरिका ने ४६.९ अरब डॉलर्स के हथियारों के बिक्री के सौदों को मंजुरी दी है। अमरीकी प्रशासन ने भागीदार तथा सहयोगी देशों को हथियारों की बिक्री करने के लिए किए कोशिशों की वजह से रक्षा निर्यात बढी है।’ ऐसे शब्दों में लेफ्टनंट जनरल हूपर ने ट्रम्प प्रशासन के नीति की प्रशंसा की।

अमरिका के राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने अप्रैल महीने में अध्यादेश जारी करते हुए नये ‘कन्व्हेंशनल आर्म्स ट्रान्सफर पॉलिसी’ को मंजुरी दे दी थी। ट्रम्प द्वारा ऐलान किये हुए राष्ट्रीय रक्षा नीति के प्रावधानों के अनुसार यह नीति तैय्यार की गयी थी। उस में अमरीकी कंपनियों द्वारा विदेश में निर्यात किये जानेवाले हथियारों के बारे में ढांचा निश्‍चित किया गया था। नये नीति के अनुसार अमरिकी कंपनियों द्वारा तैय्यार प्रगत और संवेदनशील रक्षा प्रणालियां मित्रदेशों को आसानी से उपलब्ध होगी, ऐसा दावा किया जा रहा है।

‘डिफेन्स सिक्युरिटी कोऑपरेशन एजन्सी’ के संचालक ने दी जानकारी से इसे साफ रुप से पुष्टी मिलती है। अपने प्रचार के दौरा ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ का ऐलान करनेवाले डोनाल्ड ट्रम्प ने ‘बाय अमेरिकन’ नीति पर जोर देने के साफ संकेत दिये थे। रक्षा क्षेत्र में इस नीति का आक्रामक पुरस्कार किया जा रहा है। इस साल में अभी तक हथियारों की बिक्री के करीब ३७ सौदों को मंजुरी दे दी गयी है। उस में खाडी देश, यूरोप, एशियाई देश और ऑस्ट्रेलिया शामिल है।

खाडी देशों में सौदी अरेबिया के साथ किये हथियारों की बिक्री के सौदे ध्यान खींचनेवाले साबित हो रहे है। इस देश को प्रक्षेपास्त्र, ध्वंसक पोत और टैंक्स की बडी मात्रा में निर्यात होनेवाली है। पिछले दो साल से सौदी अरेबिया के अगुआई में येमेन में शुरु संघर्ष और ईरान के साथ तनाव के पृष्ठभूमी पर सौदी अरेबिया को की जा रही हथियारों की बिक्री महत्त्वपूर्ण मानी जाती है।

चीन द्वारा एशिया-पॅसिफिक क्षेत्र में शुरु आक्रामक गतिविधियां ध्यान में रखते हुए अमरिका ने जापान, दक्षिण कोरिआ, ऑस्ट्रेलिया और भारत को प्रगत तथा नयी रक्षा प्रणाली देने पर जोर दिया है। साथ ही यूरोपीय देशों को रशिया द्वारा धोका ध्यान में रखकर इस क्षेत्र में भी बडी मात्रा में हथियारों की आपूर्ति की जा रही है। इस में ब्रिटन, जर्मनी, पोलंड, फिनलंड, नेदरलॅण्ड, नॉर्वे और स्वीडन जैसे देश शामिल है।

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