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तुर्की के आर्थिक संकट के चंगुल में निवेश को झटका रौथचाइल्ड, जे.पी. मॉर्गन जैसे अग्रगण्य निवेशकों का समावेश

लंडन – तुर्की को सबक सिखाने के लिए अमरिका ने इस देश के उत्पादन पर आयात कर बढ़ा दिया है। फिर भी इसका झटका तुर्की में अधिक निवेश करने वाले धनवान निवेशकों को लगने की बात स्पष्ट हो रही है। इनमें ‘बेरिंग्ज’, ‘जे.पी. मॉर्गन’ ‘ऐसेट मैनेजमेंट’ और ‘ऐडमं डी रौथचाइल्ड’ इन कंपनियों का समावेश है। इसी वजह से तुर्की पर यह कारवाई करके अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प को चेतावनी देनेवालों में निवेशकों का समावेश होने की बात दिखाई दे रही है।

आर्थिक संकट, निवेश, जे.पी. मॉर्गन, रौथचाइल्ड, निवेशक, राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प, अर्थ व्यवस्था, प्रतिबंध, ९/११ हमलातुर्की में बडी आर्थिक उत्तल पुथल मची हुई है और अगस्त महीने तक तुर्की लीरा में २८ प्रतिशत गिरावत आई है। तुर्की का शेयर बाजार गिरावट के मार्ग पर है इसका बहुत बड़ा झटका तुर्की में निवेश करने वाले अंतराष्ट्रीय निवेशकों को लगा है। इनमें अमरिका के केंद्रबिंदू होनेवाले अग्रगण्य निवेशकों का प्रमुखरूप से समावेश है। ‘बेरिंग्ज’, ‘जे.पी. मॉर्गन’ ‘ऐसेट मैनेजमेंट’ और ‘ऐडमं डी रौथचाइल्ड’ इन कंपनियों का तुर्की में किया गया निवेश खतरे में आ गया है और इसमें गिरावट दर्ज हो रही है।

अमरिका के माध्यमों ने तथा कई अर्थविशेषज्ञों ने तुर्की पर लगाये गए प्रतिबंध के विरोध में राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प को चेतावनी देनी शुरू कर दी है। तुर्की के साथ अन्य देशों पर भी लगायी गई प्रतिबंधता अन्य देशों की एकजुटता बढ़ाने एवं अमरिका को अकेला कर देने वाली साबीत हो रही हैं, ऐसा माध्यमों तथा वित्ततज्ञों का कहना है। कुछ दिन पहले निवेशकों के अर्धवार्षिक बैठक में प्रख्यात निवेशक जेकब रौथचाइल्ड ने ट्रम्प की धारणाओं को लक्ष्य किया है।

दूसरे महायुद्ध के पश्चात के, सुस्थापित हो चुकी जागतिक अर्थ व्यवस्था आज की समय में खतरे में आ गयी है। दुनिया भर में प्रसिद्ध एवं बचावात्मक आर्थिक निति का स्वीकार करनेवाले राष्ट्राध्यक्ष जैसे नेताओं को प्रतिक्रिया मिल रही है। आज के आर्थिक अनिश्चितता के वातावरण में यह बात घातक साबित हो सकती है, ऐसी नीति के कारण आंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली चुनौतियों का एकजुट से होकर संभव नहीं है, ऐसा जैकब रौथचाइल्ड ने सूचित किया है।

अमरिका पर ९/११ का हमला एवं २००८ के जागतिक मंदी के संकटों का सामना प्रमुख देशों मे एकजुट होकर किया। ऐसा सहयोग प्रस्थापित करना आज के दौर में काफी मुश्किल हुआ है। एसी वजह से दूसरे महायुद्ध के पश्चात के समय में जागतीक अर्थ व्यवस्था एवं सुरक्षा प्रति खतरा निर्माण हो गया है, ऐसा रौथचाइल्ड ने स्पष्ट किया है। यूरोप पर कर्ज का संकट और व्यापार युद्ध यह जागतिक अर्थ व्यवस्था के सामने एक बड़ी समस्या बन गयी है। नए सिरे से उदय हो रहे देशों की अर्थ व्यवस्था को भी इससे बहुत बड़ा झटका लग सकता है, ऐसा कहकर रौथचाइल्ड ने इस ओर ध्यान केंद्रित किया है।

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