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फ्रान्स के राष्ट्राध्यक्ष मॅक्रॉन को उग्र प्रदर्शन का झटका – इंधन टैक्स पर स्थगन लाने का फैसला

पॅरिस – उदारमतवाद और पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के पक्के समर्थक रहे फ्रेंच राष्ट्राध्यक्ष इमॅन्युअल मॅक्रॉन के एकतरफी सत्ता को देश में हो रहें हिंसक प्रदर्शनों ने जबरा आघात दिया है| राष्ट्राध्यक्षपद के सूत्र स्वीकारने के बाद पहली बार मॅक्रॉन के इस्तीफे की मॉंग देश के कोने कोने से विविध स्तर और पद्धतीनुसार तीव्र होती जा रही है| इस पृष्ठभूमी पर फ्रान्स सरकार प्रदर्शनकारियों के आगे झुकने पर मजबूर हो गयी है और इंधन पर लगाया गया टैक्स स्थगित किया गया है|

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पिछले तीन हफ्तों से फ्रान्स की राजधानी पैरिस के साथ देश के कोनों में राष्ट्राध्यक्ष मॅक्रॉन के इंधन के दाम बढाने के फैसले के खिलाफ तीव्र प्रदर्शन शुरु है| फ्रेंच सरकार ने शुरुआत को इन प्रदर्शनों को अनदेखा करने की वजह से पिछले हफ्ते में प्रदर्शन और भी आक्रामक हो गये है| राजधानी पॅरिस के साथ ही देश के विविध हिस्सों में रास्ता रोको करते हुए यातायात बंद कर दी गयी| साथ ही पॅरिस में हजारो प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ ऐलान करते हुए प्रदर्शन शुरु किये|

‘यलो वेस्ट’ नाम से पहचाने जानेवाले इस प्रदर्शन ने पिछले हफ्ते हिंसक रुप धारण किया| राजधानी के साथ अनेक हिस्सों में गाडियां, इमारतें, दुकान तोडे गये तथा उनको आग भी लगायी गयी| फ्रान्स स्थित ऐतिहासिक महत्व रखनेवाली वास्तू भी इस से बची नही| इस हिंसा के वक्त फ्रेंच सुरक्षा यंत्रणा द्वारा की गयी कार्रवाई विवाद का कारण बनी| प्रदर्शनकारियों ने पुलिसों पर हमले करते हुए पिछे ना हटने की खुली धमकी दी| उसके खिलाफ राष्ट्राध्यक्ष मॅक्रॉन ने आपातकाल लागू करने की तैयारी शुरु की और यह बात आग को और भडकानेवाली साबित हुई|

सोमवार को फ्रान्स में अनेक स्कूल्स बंद किये गये और छात्रों द्वारा भी प्रदर्शन शुरु हुए| सरकार द्वारा आयोजित बैठक को उपस्थित रहने को प्रदर्शनकारियों ने ना कह दी और इस से सरकार तथा प्रदर्शन के बीच का विवाद और भी तीव्र हुआ| इस पृष्ठभूमी पर सरकार पर पिछे हटने की नौबत आ चुकी है| इंधन के बढाए हुए दाम को स्थगन करने का फैसला लिया गया है|

‘यलो वेस्ट’ नाम से शुरु हुआ यह प्रदर्शन राष्ट्राध्यक्ष मॅक्रॉन के देढ साल के समय में सबसे बडी चुनौती साबित हुआ है, ऐसा दावा विश्‍लेषकों द्वारा किया जा रहा है| फ्रेंच मीडिया ने इस प्रदर्शन की तुलना १९६८ में फ्रान्स मे हुए व्यापक छात्र प्रदर्शन के साथ की है| इस प्रदर्शन की वजह से तत्कालिन राष्ट्राध्यक्ष ‘चार्ल्स द गॉल’ को इस्तीफा देना पडा था|

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