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तानाशाह बशिर के निष्कासन के बाद सुदान प्रमुख देशों के संघर्ष की रणभूमी होगा – विश्‍लेषकों का दावा

खार्तुम/रियाध – करीबन तीन दशकों से सुदान पर निरंकुश हुकूमत करनेवाले ‘ओमर अल बशिर’ का निष्कासन होने के बाद राजधानी खार्तुम में अभी भी तीव्र प्रदर्शन शुरू है। फिलहाल सुदान का नियंत्रण लष्करी कौन्सिल के हाथ में है और यह कौन्सिल बरखास्त करने की मांग प्रदर्शनकारी कर रहे है। लेकिन, अभी इस विषय पर प्रदर्शनकारी और कौन्सिल के बीच हो रही बातचीत कामयाब नही हो सकी है। इस स्थिति का लाभ अन्य देश उठा सकते है, यह दावा विश्‍लेषक कर रहे है।

बशिर, निष्कासन, ओमर अल बशिर, तानाशाह, तीव्र प्रदर्शन, सौदी अरब, अफ्रीकावर्तमान में खाडी क्षेत्र में सौदी अरब, यूएई और इजिप्ट एवं ईरान-कतार-तुर्की ऐसे दो गुट सक्रिय है। इन गुटों के सत्ता संघर्ष में सुदान बलि हो सकता है, यह संकेत विश्‍लेषक एवं विदेशी प्रसार माध्यम दे रहे है। सौदी अरब ने येमन में शुरू किए संघर्ष की सहायता करनेवाले ओमर बशिर पिछले वर्ष से कतार और तुर्की के पक्ष में जाने के संकेत प्राप्त हो रहे थे।

बशिर के नीति में हुए इस बदलाव की वजह से ही सौदी अरब और सहयोगी देशों ने सुदान की उनकी हुकूमत पलट दी है, यह दावे कुछ महीनें पहले प्रसिद्ध हुए थे। सुदान अब ‘अरब स्प्रिंग-२’ का हिस्सा होगा, यह भी कहा जा रहा था। बशिर के बाद सत्ता का नियंत्रण हाथ में लेनेवाली सेना को सौदी अरब, यूएई एवं इजिप्ट के गुट का समर्थन है।

अफ्रीका के महासंघ की बैठक में इजिप्ट ने ‘सुदान’ का उपस्थित किया मुद्दा और उसके पहले सौदी अरब एवं यूएई ने करीबन तीन अरब डॉलर्स की सहायता करने का किया ऐलान इसी समर्थन का हिस्सा था। इन देशों के साथ ही कुवैत ने भी सुदान को आर्थिक नीधि देने का ऐलान किया था। सुदान की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए यह सहायता की जा रही है, यह दावे संबंधित देशों ने किए थे।

लेकिन, इस आर्थिक सहायता से पहले भूतपूर्व बशिर इन्होंने ही कतार और तुर्की से आर्थिक सहायता प्राप्त करने की कोशिश की थी। बशिर के विरोध में शुरू प्रदर्शन खतम करने के लिए और उनकी हुकूमत स्थिर रखने के लिए ईरान की हुकूमत ने भी सहायता की थी। बशिर की हुकूमत पटलने के बाद भी प्रदर्शन शुरू रखने के पिछे ईरान के साथ कतार और तुर्की का हाथ होगा, यह आशंका विदेशी विश्‍लेषक और प्रसार माध्यम व्यक्त कर रहे है। बशिर की हुकूमत पलटने के बाद जारी रहे प्रदर्शनों में इजिप्ट के दूतावास के बाहर जोरों से नारेबाजी हुई थी, इस ओर विश्‍लेषकों ने ध्यान आकर्षित किया है।

वर्तमान में सीरिया, येमन एवं लीबिया में सौदी एवं सहयोग देश और ईरान-तुर्की एवं मित्रदेशों को खुलेआम संघर्ष शुरू है। सुदान की घटनाए भी इसी दिशा में जाने के संकेत प्राप्त हो रहे है और अफ्रीका में नए दिर्घकालिन सत्तासंघर्ष की शुरूआत होने का डर व्यक्त किया जा रहा है।

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