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अमरिकी विमान वाहक युद्धपोत ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ की अरब सागर में हुई तैनाती पाकिस्तान को लक्ष्य करने हेतू – पाकिस्तानी विश्‍लेषकों का डर

इस्लामाबाद – अमरिकी विमान वाहक युद्धपोत ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ अरब सागर में दाखिल हुई है। अमरिकी हितसंबंधों को ईरान से बने खतरे को सामने रखकर इस युद्धपोत की तैनाती करने की घोषणा अमरिका ने की थी। लेकिन, ‘यूएसएस लिंकन’ का अरब सागर में हुए प्रवेश के कारण पाकिस्तान में डर का माहौल बना है। यह तैनाती ईरान के विरोध में नही है, बल्कि इस तैनाती का लक्ष्य पाकिस्तान हो सकता है, ऐसी आशंका पाकिस्तान के विश्‍लेषक व्यक्त कर रहे है। चीन विकसित कर रहे पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह अमरिका के निषाणे पर है और इसके जरिए पाकिस्तान के साथ ही चीन को भी झटका देने के लिए अमरिका की गतिविधियां शुरू होने का डर इन विश्‍लेषकों ने व्यक्त किया है।

फिलहाल अफगानिस्तान में बडी गतिविधियां शुरू है और तालिबान ने अफगानिस्तान में आतंकी हमलों का भयंकर सत्र शुरू किया है। इस वजह से अफगानिस्तान से सेना की वापसी करने की तैयारी कर रहे अमरिका के सामने बनी मुश्किलों में बढोतरी हो रही है। तालिबान के इस आक्रामकता के पीछे पाकिस्तान होने का आरोप अमरिकी लष्करी अधिकारी और विश्‍लेषक लगातार कर रहे है। ट्रम्प प्रशासन इन आरोपों की ओर काफी गंभीरता से देख रहा है। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए अमरिका तालिबान ने पाकिस्तान में बनाए ठिकानों पर हमलें करें, यह मांग अमरिकी विश्‍लेषक मिशेल रुबिन ने रखी है। अफगानिस्तान में शुरू आतंकविरोधी युद्ध में जीत हासिल करनी है तो अमरिका को पाकिस्तान में हमलें करने ही होंगे, यह बात रुबिन ने डटकर रखी है।

इस पृष्ठभूमि पर यूएसएस अब्राहम लिंकन अरब सागर में दाखिल हुई है। इस युद्धपोत पर करीबन ९० लडाकू विमान और ३,२०० नौसैनिक तैनात है। यह युद्धपोत दुश्मन पर बडी तीव्रता के साथ जोरदार हमला करने की क्षमता रखती है और इस युद्धपोत के बेडे में पांच विध्वंसक और एक पनडुब्बी शामिल है। इस युद्धपोत की तैनाती ईरान से बने खतरें को सामने रखकर करने के दावे अमरिका कर रही है। साथ ही ईरान के विरोध में युद्ध होने की उम्मीद नही है, यह बात भी अमरिकी राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट की थी। पाकिस्तान के विश्‍लेषक भी अमरिका ईरान पर हमलें नही करेगी, यह बडे विश्‍वास के साथ दावा कर रहे है। साथ ही इस्रायल भी ईरान पर हमला करने का विचार नही कर रहा, ऐसा इन विश्‍लेषकों का कहना है।

ऐसी स्थिति में ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ की हुई तैनाती पाकिस्तान के निकट होनेवाले समुद्री क्षेत्र में हो रही है। इसका कारण बिल्कुल स्पष्ट है और पाकिस्तान को लक्ष्य करने के उद्देश्य से ही इस युद्धपोत की तैनाती होने की चिंता इन विश्‍लेषकों ने व्यक्त की है। चीन विकसित कर रहे ‘ग्वादर’ बंदरगाह को अमरिका लक्ष्य कर सकती है। इस वजह से एक ही समय पर पाकिस्तान और चीन को झटका लगना संभव है। साथ ही दोनों देशों में विकसित हो रहे ‘इकॉनॉमिक कॉरिडोर’ का विकल्प अमरिका को मंजूर नही और ग्वादर बंदरगाह इस विकल्प में काफी अहमियत रखता है, यह बात भी पाकिस्तानी विश्‍लेषक सामने रख रहे है।

इतना ही नही, बल्कि पाकिस्तान को रोकने के लिए अमरिका आगे भारत का इस्तेमाल करेगी, इस चिंता से पाकिस्तान के विश्‍लेषकों में घबराहट है। भारत और अमरिका के बीच बने सामरिक सहयोग का प्रमुख उद्देश्य पाकिस्तान और चीन को रोकना ही है, यह कहकर आगे चलकर यह दोनों देश जल्द ही पाकिस्तान और चीन के सामने चुनौती खडी करेंगे, यह चेतावनी पाकिस्तान के पत्रकार दे रहे है। इस पृष्ठभूमि पर यूएसएस अब्राहम लिंकन जैसी विशाल युद्धपोत की अरब सागर में तैनाती होने से पाकिस्तान में काफी बडे डर के साए में होने की बात दिख रही है।

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