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अफगानिस्तान में चुनाव के दौरान हमलें करेंगे – तालिबान ने धमकाया

काबुल – अफगानिस्तान की सुरक्षा और स्थिरता के लिए कतार में अमरिका तालिबान के साथ बातचीत कर रही है| इसी के बीच आतंकी तालिबान संगठन ने अफगान सरकार और जनता को धमकाया है| ‘अगले महीने में अफगानिस्तान में होनेवालें चुनावों में हिस्सा ना लेने के लिए तालिबान ने जनता को धमकाया है| साथ ही चुनावी प्रचार से दूर रहने को भी जनता को कहा गया है| अन्यथा हमलों में बेवजह मारे जाएंगे’, यह धमकी तालिबान ने दी है|

‘अफगानिस्तान में हो रहे चुनाव यानी आम नागरिकों को फंसाने के लिए किया गया षडयंत्र है| अफगानिस्तान के कुछ चालाक सियासी नेता अपने अहंकार के लिए इस चुनाव का आयोजन कर रहे है’, यह आलोचना तालिबान ने एक पत्रक में की है| तालिबान ने इस दौरान किसी भी नेता का नाम लिया नही है, लेकिन, राष्ट्राध्यक्ष अश्रफ गनी को लक्ष्य करने हेतू यह आलोचना की गई है, यह दावा हो रहा है|

साथ ही अफगानिस्तान में होनेवाले इन चुनावों को हमारी मंजूरी नही है और अफगान जनता भी इस चुनाव में शामिल ना हो, यह धमकी तालिबान ने दी है| ‘अपने ही देश बांधवों से होनेवाले हमलों से अपनी जान बचानी है तो चुनाव की प्रचार मुहीम और वोटिंग से दूर रहे| यह कहकर इन जगहों पर हमलें करने की चेतावनी भी तालिबान ने दी है|

वोटिंग केंद्र एवं प्रचार मुहीम पर हमलें करने की धमकी देने के बाद तालिबान ने अफगान सरकार का समर्थन कर रही अमरिका पर भी आलोचना की है| ‘चुनाव का समर्थन करने के बजाय फिलहाल शुरू बातचीत में नियमों पर अमल करने के लिए अमरिका गतिविधियां बढाए| अफगानिस्तान में शांति किस तरह से स्थापित करना मुमकिन होगा, इसके लिए अमरिका प्रामाणिकता के साथ कोशिश करें’, यह फटकार तालिबान ने लगाई है|

कतार की राजधानी दोहा में अमरिका और तालिबान के बातचीत का आंठवा दौर सोमवार से शुरू हुआ है| इससे पहले हुई बातचीत के दौरान तालिबान ने अपना प्रस्ताव स्वीकारा है, यह ऐलान अमरिका ने किया था| इस वजह से सोमवार से शुरू हुई बातचीत कामयाब होगी, यह दावा अमरिका के विशेषदूत झाल्मे खलिलझाद ने किया है| ‘नाटो’ के प्रमुख जेन्स स्टोल्टनबर्ग ने भी शांतिचर्चा जल्द ही कामयाब होगी, ऐसा कहा है|

अफगानिस्तान से अमरिका अपनी सेना पूरी तरह से हटाती है तो ही हमलें रुकेंगे, यह ऐलान तालिबान ने पहले ही किया था| साथ ही अफगानिस्तान में गनी सरकार के साथ मेल मिलाप करके जनतंत्र पर अमल करने संबंधी अमरिका ने रखी मांग भी तालिबान ने स्वीकारी थी| लेकिन, अब तालिबान ने जारी की हुई धमकी से सप्ताह पहले अमरिका ने रखी मांगे तालिबान ठुकराती दिख रही है|

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