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‘बजट’ के मुद्दे पर यूरोपिय महासंघ में दरार – ‘ब्रेक्जिट’ के बाद अतिरिक्त आर्थिक भार उठाने के लिए कुछ देशों ने किया इन्कार

ब्रुसेल्स – ब्रिटेन ने यूरोपिय महासंघ से बाहर निकलने पर मुहर लगाने के बाद यूरोपिय देशों में बनी दरार नए से सामने आयी है| ब्रुसेल्स में महासंघ का बजट तय करने के लिए आयोजित की गई बैठक में महासंघ के सदस्य देशों में बडे मतभेद बने| इस कारण ‘ब्रेक्जिट’ के बाद यूरोपिय महासंघ के सदस्य देश एकता से काम करेंगे, यूरोपिय महासंघ ने किए इस दावे का झुठ स्पष्ट होता दिख रहा है| साथ ही नजदिकी समय में महासंघ और सदस्य देशों को कई मुद्दों पर ब्रिटेन की कमी लगातार महसूस होती रहेगी, यह संकेत भी प्राप्त हुए है|

यूरोपिय महासंघ ने इससे पहले पारित किए हुए बजट का अवधि वर्ष २०१४ से २०२० तक था| इस कारण वर्ष २०२१ से शुरू होनेवाले समय के लिए नया बजट पारित होना जरूरी है| वर्ष २०२१ से २०२७ के लिए यूरोपिय महासंघ ने १.०९ ट्रिलियन यूरो का प्रावधान होनेवाला बजट पेश किया है| इसमें ब्रिटेन का हिस्सा ७५ अरब यूरो है और महासंघ से बाहर निकलने से ब्रिटेन यह रकम महासंघ को प्रदान नही करेगा|

‘ब्रेक्जिट’ के कारण हुआ यह आर्थिक नुकसान की कमी दूर करने के लिए सभी सदस्य देशों को अपना हिस्सा बढाना जरूरी है| इस वजह से नया बजट का आखार कुछ मात्रा में कम करें और सुरक्षा, मौसम और डिजिटायझेशन जैसे बातों पर अधिक खर्च हो, यह मांग कुछ सदस्य देश कर रहे है| इसमें ऑस्ट्रिया, स्वीडन, डेन्मार्क और नेदरलैंड इन चार देशों का समावेश है| इन देशों ने अपनी मांग पीछे लेने से इन्कार किया है|

दुसरी ओर महासंघ के बजट से अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त करनेवाले देशों ने यह राशी बढाने की मांग उठाई है| इनमें स्पेन, पोर्तुगाल, हंगेरी, पोलैंड समेत १० से भी अधिक देशों ने बजट का सबसे अधिक हिस्सा सदस्य देशों में सहयोग बढाने के लिए, किसान और गरीब देशों के लिए रखने की मांग बडी आग्रहता से रखी है| महासंघ का बजट पारित होने के लिए सभी देशों की सहमित आवश्यक होने से शुक्रवार की बैठक में बजट का प्रस्ताव पारित नही हो सका|

बजट के मुद्दे पर आयोजित बैठक किसी भी निर्णय के बिना खतम होने से जर्मनी और फ्रान्स ने नाराजगी व्यक्त की है| जर्मन चान्सलर एंजेला मर्केल ने मतभेद काफी तीव्र होने की बात कहकर इस मुद्दे पर नई बैठक करनी होगी, इसका एहसास रखें, यह इशारा सदस्य देशों को दिया है| तभी, यूरोपिय देशों में बने मतभेद दिखाने के लिए इसके आगे ब्रिटेन की जरूरत नही है, यह बात इस बैठक से साबित हुई है, ऐसी फटकार फ्रेंच राष्ट्राध्यक्ष इमैन्युएल मैक्रॉन ने लगाई है|

३१ जनवरी के दिन ब्रिटेन अधिकृत स्तर पर यूरोपिय महासंघ से बाहर निकला था| इससे पहले और बाद के कुछ दिनों में महासंघ के प्रमुख नेताओं ने अब इसके आगे यूरोपिय महासंघ अधिक मजबूत और एक रखने के लिए कदम उठाने का वादा किया था| असल में महासंघ के मतभेद अधिक तीव्रता से सामने आने की बात बजट की बैठक में बनी कठिन स्थिति से स्पष्ट हुई है|

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