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चीन की ‘मरिन कोअर’ युद्ध के लिए तैयार रहे – राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग के आदेश

बीजिंग/तैपेई – चीन के रक्षाबलों की ‘एलाईट फोर्स’ के तौर पर जानी जा रही ‘मरिन कोअर’ को युद्ध के लिए तैयार रहने के आदेश राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग ने दिए हैं। चीन के ग्वांगडोंग प्रांत के लष्करी अड्डे का दौरा करके जिनपिंग ने यह आदेश दिए। चीन की ‘पिपल्स लिब्रेशन आर्मी’ ने कुछ दिन पहले इसी प्रांत में तैवान पर हमला करने की रिहर्सल करनेवाले युद्धाभ्यास का आयोजन किया था। इस पृष्ठभूमि पर जिनपिंग का यह दौरा और युद्ध के लिए तैयार रहने के आदेश देना तैवान पर हमला करने की पूर्वतैयारी का हिस्सा होगा, यह समझा जा रहा है। बीते पांच महीनों के दौराना जिनपिंग ने अपने रक्षाबलों को युद्ध के लिए तैयार रहने के आदेश देने का यह दूसरा अवसर है।

राष्ट्राध्यक्ष जिनपिंग ने मंगलवार के दिन ग्वांगडोंग प्रांत में स्थित ‘मरिन कोअर’ के अड्डे का दौरा किया। ‘मरिन्स’ पर अलग अलग तरह की मुहिमों की ज़िम्मेदारी होती है और आप से बड़ी उम्मीद होती हैं। वर्तमान समय में प्रशिक्षण का दर्जा सुधारकर संघर्ष के लिए आवश्‍यक क्षमता प्राप्त करना जरूरी है। आपका प्रशिक्षण युद्ध पर जाने के लिए आवश्‍यक तैयारी का होना चाहिये। मरिन्स ने अपना पूरा ध्यान और पूरी ऊर्जा युद्ध पर जाने की तैयारी पर केंद्रीत करना होगा और अलर्ट रहना होगा, यह आदेश राष्ट्राध्यक्ष जिनपिंग ने जारी किए। चीन की संप्रभुता, क्षेत्रीय एकता और समुद्री क्षेत्र एवं विदेशों में मौजूद हितसंबंधों की रक्षा करना ही ‘मरिन कोअर’ का कर्तव्य है, यह अहसास भी जिनपिंग ने इस दौरान कराया। युद्ध की तैयारी करने से संबंधित दिए गए आदेश और संप्रभुता एवं समुद्री क्षेत्र के मुद्दे पर उन्होंने किया हुआ बयान तैवान पर होनेवाले संभावित हमले के संकेत का दावा चीनी विश्‍लेषक कर रहे हैं।

बीते कुछ महीनों में कोरोना की महामारी के मुद्दे पर पूरे विश्‍व में चीन के विरोध में तीव्र असंतोष है। उसी समय चीन की अर्थव्यवस्था को भी बड़े मात्रा में झटके लग रहे हैं और जिनपिंग के नेतृत्व के खिलाफ़ देश में नाराज़गी बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में युद्ध शुरू करके अपना स्थान मज़बूत करने की जिनपिंग की योजना है। इसी कारण बीते कुछ महीनों से चीन ने भारतीय सीमा के साथ ही साउथ और ईस्ट चायना सी में आक्रामक लष्करी गतिविधियां शुरू की हैं। भारत को असावधान रखकर हमला करने की चीन की कोशिश भारतीय सेना ने नाकाम करने पर चीन ने अब तैवान पर अपना ध्यान केंद्रीत किया है, यही बात जिनपिंग के बयान से दिखाई दे रही है।

चीनी राष्ट्राध्यक्ष ने जारी किए आदेशों के पीछे अमरीका ने तैवान के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए प्रदान की हुई गति भी एक कारण होने की बात समझी जा रही है। बीते वर्ष से अमरीका ने तैवान को बड़ी मात्रा में रक्षा सहायता प्रदान की है। इसमें लड़ाकू विमानों के साथ-साथ प्रगत मिसाइल यंत्रणा तक के प्रगत हथियारों का भी समावेश है। इसी बीच तैवान में अमरिकी लष्करी अड्डों का निर्माण करने से संबंधित प्रस्ताव भी सामने आ रहे हैं। साथ ही अमरिकी विमान वाहक युद्धपोत एवं विध्वंसक लगातार साउथ चायना सी में तैनात किए जा रहे हैं।

इसी वजह से चीन की हुकूमत काफी बौखलाई हुई है और तैवान पर हमला करके यह मुद्दा ख़त्म करने की योजना बनाई जा रही है। इससे पहले हाँगकाँग के मुद्दे पर चीन की हुकूमत ने आक्रामक कदम उठाकर उस पर कब्ज़ा करने में सफलता हासिल की थी। तैवान के मुद्दे पर भी यही चाल दोहराने की तैयारी शुरू होने के संकेत राष्ट्राध्यक्ष जिनपिंग के बयान से प्राप्त हो रहे हैं।

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