ईरान पर होनेवालीं छोटी कार्रवाइयों की अहमियत अगले दिनों के युद्ध के जितनी ही होगी – इस्रायली गुप्तचर यंत्रणा मोसाद के प्रमुख

तेल अवीव – ईरान के विरोध में इस्रायल अधिक कार्रवाइयाँ करें, यह आवाहन इस्रायल की गुप्तचर संगठन मोसाद के प्रमुख योसी कोहेन ने किया है। ‘देश की सुरक्षा के लिए तैयार होनेवाली छोटी-छोटी मुहिमें अगले दिनों के युद्ध जैसी ही अहम साबित होंगी। यदि ईरान मर्यादा पार करता है, तो भयंकर नुकसान उठाना पड़ेगा, इस बात का अहसास इससे ईरान को होगा’, ऐसा कोहेन ने कहा है।

मोसाद के प्रमुख

विश्‍व के सबसे प्रभावी गुप्तचर संगठन के तौर पर मोसाद की पहचान है। इस संगठन के प्रमुख कोहेन का कार्यकाल अगले कुछ ही घंटों में पूरा हो रहा है। बीते हफ्ते में ही इस्रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने, कोहेन के स्थान पर डेव्हिड बार्नी का चयन किया था। बीते दशक से इस्रायल की सुरक्षा यंत्रणा में काम कर रहें और वर्ष २०१६ से मोसाद के प्रमुख रहें कोहेन को रविवार के दिन मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में बोलते समय मोसाद के प्रमुख ने, ईरान विरोधी कार्रवाईयाँ बढ़ाने के अलावा विकल्प ना होने की चेतावनी दी।

‘ईरानी हुकूमत के विरोध में कार्रवाइयाँ तीव्र करना आवश्‍यक है। अगर ईरान ने मर्यादा पार की, तो इसके लिए बड़ी मात्रा में नुकसान भुगतना होगा, यह अहसास इससे ईरान को होगा’, ऐसा कोहेन ने कहा। इस्रायल को सार्थक जीवन के लिए देश की सुरक्षा को मज़बूत करने की आवश्‍यकता होगी, यह बात मोसाद के प्रमुख ने ड़टकर बयान की। साथ ही, देश की सुरक्षा के लिए तैयार होनेवाली छोटी-छोटी मुहिमें अगले दिनों के युद्ध की तरह ही अहम होंगी, यह कहकर कोहेन ने ईरान विरोधी कार्रवाईयों की अहमियत रेखांकित की हुई दिखती है।

बीते पांच वर्षों के दौरान कोहेन के नेतृत्व में मोसाद ने बड़ी कार्रवाईयों के साथ सियासी गतिविधियों को भी अंज़ाम दिया था। मोसाद के प्रमुख रहते हुए कोहेन ने, वर्ष २०१८ में स्वयं ईरान में प्रवेश करके परमाणु कार्यक्रम से संबंधित हज़ारों दस्तावेज, सीडीज्‌, फाईल्स दो ट्रकों में भरकर इस्रायल लाये थे। इसके बाद इस्रायल के प्रधानमंत्री नेतान्याहू ने अन्तर्राष्ट्रीय माध्यमों के सामने ये सभी सबूत पेश किए थे। मोसाद प्रमुख ने स्वयं की इस कार्रवाई से विश्‍वभर की सभी गुप्तचर यंत्रणाएँ हैरान हुईं थीं।

मोसाद के प्रमुख

इसके बाद, बीते दो वर्षों में ईरान के परमाणु प्रकल्प, लष्करी ठिकाने एवं ईरानी सेना से संबंधित छुपे ठिकानों पर हुए संदिग्ध विस्फोटों के पीछे इस्रायल का हाथ होने का आरोप ईरानी माध्यमों ने किया था। अप्रैल महीने में नातांज़ परमाणु प्रकल्प में हुआ बड़ा विस्फोट मोसाद ने ही किया होने का आरोप ईरान ने लगाया था। इसके अलावा यूएई, बहरिन इन अरब देशों के साथ ‘अब्राहम समझौता’ करने के लिए कोहेन ने कोशिश करने का दावा किया जा रहा है।

ऐसें में बीते वर्ष सौदी अरब के नियोम शहर में क्राउन प्रिन्स मोहम्मद बिन सलमान और प्रधानमंत्री नेतान्याहू की हुई गुप्त भेट के स्थान पर भी कोहेन उपस्थित थे। सौदी ने इस मुलाकात से संबंधित खबरों से इन्कार किया था। वर्तमान महीने की शुरुआत में कोहेन ने, अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष ज्यो बायडेन से भेंट करके ईरान के परमाणु समझौते के विरोध में स्पष्ट भूमिका रखी थी।

इसी बीच अगले दो दिनों में इस्रायल में सत्ता परिवर्तन के आसार हैं। बीते बारह वर्षों से इस्रायल की सत्ता संभाल रहें नेतान्याहू के स्थान पर नफ्ताली बेनेट और येर लैपिड की पार्टी की गठबंधन की सरकार बनेगी, यह चर्चा हो रही हैं। इस पृष्ठभूमि पर ईरान विरोधी कार्रवाई के मुद्दे पर कोहेन ने दीं चेतावनियों की अहमियत बढ़ती है।

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