अटलांटिक महासागर में सैन्य अड्डा स्थापित करने के लिए चीन की पहल

- अमरिकी गुप्तचर यंत्रणा का दावा

वॉशिंग्टन/बीजिंग – अटलांटिक महासागर क्षेत्र में चीन अपने सैन्य अड्डे के निर्माण की गतिविधियॉं कर रहा हैं, यह दावा अमरिकी गुप्तचर यंत्रणा ने किया है| अफ्रीकी महाद्विप के ‘इक्वेटोरिअल गिनी’ नामक देश में इस अड्डे का निर्माण करने की कोशिश हो रही है| चीन की इस कोशिश को रोकने के लिए अमरीका के वरिष्ठ अफसरों ने अक्तुबर में इस देश की यात्रा भी की थी| ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ नामक अखबार ने इससे संबंधित खबर जारी की है| चीन के सरकारी मुखपत्र ‘ग्लोबल टाईम्स’ ने अमरिकी माध्यमों का यह दावा नकारा है और चीन के खतरे का भ्रम निर्माण करने के लिए यह खबर फैलाई जा रही है, यह आरोप भी लगाया|

लष्करी तळ, अटलांटिक महासागर

बीते कुछ वर्षों से चीन विश्‍वभर में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए जोरदार गतिविधियॉं कर रहा है| आर्थिक एवं व्यापारी स्तर पर वर्चस्व हासिल करके इसका सैन्य महत्वाकांक्षा पूर्ण करने के लिए इस्तेमाल करने की दिशा में कम्युनिस्ट हुकूमत कदम बढ़ा रही है| राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग की ‘बेल्ट ऐण्ड रोड इनिशिएटिव’ योजना भी इसी का हिस्सा माना जाता है| अहम स्थान के देशों को आर्थिक सहायता प्रदान करके, प्रकल्प शुरू करके चीन इसके भुगतान के बदले में जगह पर कब्ज़ा करने जैसी शिकारी आर्थिक नीति का इस्तेमाल कर रहा है| अफ्रीका, एशिया एवं इंडो-पैसिफिक के देशों में ऐसी गतिविधियॉं की बात सामने आयी है|

पाकिस्तान, कंबोडिया, श्रीलंका, यूएई समेत अफ्रीका के अहम बंदरगाहों में चीन बड़े प्रकल्प चला रहा है| इसके पीछे व्यापारी उद्देश्यों के साथ सैन्य उद्देश्य भी होने की बात समझी जा रही है| चीन की इन गतिविधियों की गूंज अमरीका के दायरे में सुनाई पड़ी है| इससे अमरिकी प्रशासन ने चीन के सैन्य अड्डों का निर्माण रोकने के लिए जोरदार कोशिश शुरू की है| अफ्रीका के ‘इक्वेटोरिअल गिनी’ में स्थित ‘बाटा’ बंदरगाह का मुद्दा इन दिनों काफी चर्चा में है|

‘बाटा’ बंदरगाह अटलांटिक समुद्री क्षेत्र में काफी अहम ‘डीप वॉटर पोर्ट’ के तौर पर जाना जाता है| बीते दशक में चीन की ‘चायना रोड ऐण्ड ब्रिज कंपनी’ ने इसका विकास किया था| इस बंदरगाह में चीन ने कुछ सुविधाओं का निर्माण करने की बात कही जा रही है| इस वजह से अगले दिनों में इस बंदरगाह का इस्तेमाल सैन्य अड्डे के तौर पर करने की योजना होगी, ऐसी आशंका अमरिकी गुप्तचर यंत्रणाओं ने व्यक्त की है| इस आशंका पर संज्ञान लेकर अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा उप-सलाहकार जो फायनर ने अक्तुबर में ‘इक्वेटोरिअल गिनी’ की यात्रा भी की थी| यहा पर चीन का सैन्य अड्डा निर्माण हुआ तो वह राष्ट्रीय सुरक्षा के नज़रिये से काफी गंभीर बात होगी, यह विचार अमरिकी अधिकारी ने इस देश के नेतृत्व के सामने रखने की बात कही जा रही है| सहायता की ज़रूरत पड़ने पर अमरीका सहायता प्रदान करेगी, यह वादा भी किया गया है|

चीन ने बीते दशक में अफ्रीका के जिबौती में अपना पहला ‘ओवरसीज मिलिटरी बेस’ निर्माण किया था| इससे पहले चीन ने जिबौती की सरकार को काफी बड़ी आर्थिक सहायता देने की बात सामने आयी थी| ‘इक्वेटोरिअल गिनी’ में भी इसी तरह की गतिविधियॉं जारी होने की आशंका अमरिकी यंत्रणाओं ने व्यक्त की है| अमरिकी माध्यमों में जारी किया गया यह वृत्त चीन के सरकारी मुखपत्र ‘ग्लोबल टाईम्स’ ने नकारा है| चीन के विशेषज्ञों का दाखिला देकर सैन्य अड्डे से संबंधित इन दावों में सच्चाई ना होने की बात कही गई है| चीन के तथाकथित खतरे का भ्रम निर्माण करने के लिए ही अमरीका से इस तरह के वृत्त जारी हो रहे हैं, यह आरोप भी चीनी मुखपत्र ने लगाया है|

English    मराठी

इस समाचार के प्रति अपने विचार एवं अभिप्राय व्यक्त करने के लिए नीचे क्लिक करें:

https://twitter.com/WW3Info
https://www.facebook.com/WW3Info