ईंधन की आयात पर लगाई पाबंदी रशियन अर्थव्यवस्था को झटका देनेवाली साबित होगी

- अमरीका का दावा

रशियन अर्थव्यवस्था

वॉशिंग्टन/लंडन/मॉस्को – रशिया से आनेवाले ईंधन की आयात पर पाबंदी लगाने के कारण, अमरीका में ईंधन के दाम बढ़ेंगे। उसका बोझ अमरिकी जनता को सहना पड़ेगा। लेकिन उसके लिए हम मजबूर हैं। लोकतंत्र के लिए हमें यह क़ीमत चुकानी ही होगी, ऐसा बताकर अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष ज्यो बायडेन ने रशियन ईंधन की आयात पर पाबंदी लगाने की घोषणा की। इससे रशियन अर्थव्यवस्था की कमर टूट जाएगी, ऐसा दावा बायडेन ने किया। वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉन्सन ने कहा है कि ईंधन पर लगाई पाबंदी यह पहले लगाए गए कड़े प्रतिबंधों से सुसंगत है।

अमरिका और ब्रिटेन ने लगाए प्रतिबंधों की गूंजें अन्तर्राष्ट्रीय मार्केट में सुनाई दीं होकर, कच्चे तेल के दाम 132 डॉलर्स प्रति बैरल तक पहुँच चुके हैं। वहीं, युरोप में नैसर्गिक इंधन वायु की दरें प्रति मेगावॅट/अवर 200 युरो के पार जा चुकीं हैं। आनेवाले समय में कच्चा तेल और नैसर्गिक ईंधन वायु की दरें रिकॉर्ड स्तर पर जा सकती हैं, ऐसी चेतावनी ईंधन क्षेत्र के विशेषज्ञ तथा विश्लेषकों ने दी है।

रशियन अर्थव्यवस्था

रशिया-युक्रेन युद्ध के 14 दिन बीत चुके होकर, रशिया पीछे हटें इसके लिए पश्चिमी देश जानतोड़ कोशिशें कर रहे हैं। युद्ध शुरू होने के दिन से अमरीका और नाटो समेत मित्र देशों द्वारा रशिया पर लगातार प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। रशिया के वित्त, बैंकिंग, रक्षा, निवेश, अंतरिक्ष, तंत्रज्ञान के साथ अधिकांश क्षेत्रों को लक्ष्य किया गया था। लेकिन इसमें ईंधन क्षेत्र का समावेश नहीं किया गया था। मंगलवार को अमरीका और ब्रिटेन ने की हुई घोषणा यह दिखा रही है कि अब रशिया का ईंधन क्षेत्र भी प्रतिबंधों की चपेट में आया है।

रशिया यह ईंधन क्षेत्र का अग्रसर उत्पादक देश है। अमरीका द्वारा की जानेवाली कच्चे तेल और रिफाइनरी प्रोडक्ट्स की आयात में से आठ प्रतिशत आयात रशिया से की जाती है। वहीं, ब्रिटेन से की जानेवाली ईंधन आयात में से छह प्रतिशत इंधन रशिया से आयात किया जाता है । इस पृष्ठभूमि पर दोनों देशों ने किया फैसला अहम साबित होता है।

रशियन अर्थव्यवस्था

‘अमरीका ने तेल, वायु और उर्जा क्षेत्र में रशियन आयात पर पूरी पाबंदी लगाने का फ़ैसला किया है। अमरीका के किसी भी बंदरगाह पर इसके बाद रशियन ईंधन का स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह अमरिकी जनता ने रशिया के राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमिर पुतिन को दिया जबरदस्त झटका है’, इन शब्दों में राष्ट्राध्यक्ष बायडेन ने आयात पर पाबंदी घोषित की। बायडेन की इस घोषणा का अमरीका के राजनीतिक दायरे में हालाँकि स्वागत हुआ है, फिर भी नागरिकों से संमिश्र प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। अमरीका में ईंधन की दरों ने प्रति गैलन 4.17 डॉलर्स तक उछाल ली है। अमरीका के इतिहास में ये सर्वाधिक दरें साबित हुई हैं।

अमरीका के साथ ही ब्रिटेन ने भी रशियन ईंधन की आयात पर पाबंदी घोषित की है। इस साल के अंत तक ब्रिटेन रशिया की ईंधन आयात को पूरी तरह रोक देगा, ऐसा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉन्सन ने कहा। ब्रिटेन ने किए इस फ़ैसले के कुछ ही घंटों में रशियन इंधन के सात टैंकर्स ब्रिटेन के बंदरगाहों से वापस भेजे गए होने की खबर ब्रिटिश माध्यमों ने दी है। इसी बीच, जर्मनी की विदेश मंत्री अ‍ॅनालेना बेअरबॉक ने फिर एक बार, रशियन ईंधन की आयात जारी रखने के फ़ैसले का समर्थन किया है।

‘जर्मनी को आवश्यक ईंधन में से एक तिहाई ईंधन रशिया से आयात होता है। अगर आयात को रोकने का फ़ैसला किया, तो कल से जर्मनी आगे सरक भी नहीं सकेगा’, ऐसे ठेंठ शब्दों में जर्मनी की विदेश मंत्री ने अपने देश की भूमिका स्पष्ट की।

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