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अमरिका के मध्यावधी चुनाव में विपक्ष की सफलता के पिछे राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प का दॉंव

वॉशिंग्टन, दि. २० (वृत्तसंस्था) – अमरिका के मध्यावधी चुनाव में राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प के रिपब्लिकन पार्टी को बडी जीत हासिल नही हुई। इस चुनाव में सिनेट रिपब्लिकन पार्टी के कब्जे में रही लेकिन ‘हाऊस ऑफ रिप्रेझेंटेटिव्ह’ अर्थात प्रतिनिधीगृह डेमोक्रॅट के हाथ चला गया। इस वजह से राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प के हाथ बांधे जाएंगे और उनको मनमानी करने नही मिलेगी, ऐसा दावा अमरिकी माध्यम कर रहे थे। पर असल में उलटफेर हुआ है और मध्यावधी चुनाव में ट्रम्प के स्वपक्ष के विरोधियों का काटा दूर किया है तथा डेमोक्रॅट पार्टी में रहे अपने समर्थकों को प्रतिनिधीगृह में लाया है। इस से ट्रम्प की अमरिकी संसद पर रही पकड और भी मजबूत हो गयी है।

डेमोक्रॅट पक्ष की वरिष्ठ नेता ‘नॅन्सी पेलोसी’ मध्यावधी चुनाव में जीत गयी है। वह प्रतिनिधीगृह में ट्रम्प को रोक सकेगी ऐसे दावे किए जा रहे थे। पर अब ट्रम्प ने ही नॅन्सी पेलोसी को प्रतिनिधीगृह का सभापती बनाने की तैय्यारी शुरु की है। उसके लिए जितने मत लगेंगे वह देने का ऐलान करते हुए ट्रम्प सबको चौंका दिया। विपक्षी नेताओं को ट्रम्प द्वारा किया जा रहा यह सहयोग चक्कर में डालनेवाला दिखाई देता है। पर राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प ने पेलोसी की ज्येष्ठता का दाखिला देते हुए अपने फैसले का समर्थन किया।

‘नॅन्सी पेलोसी को अमरिकी कॉंग्रेस के प्रतिनिधीगृह में सभापती के तौर पर चुनने के लिए जरुरी वोट में उन्हें मिलाकर दे सकता हूँ। सभापती पद के चुनाव में उनकी जीत यह उनका हक है और यह हक उन्होंने बडी मेहनत से मिलाया है। डेमोक्रॅट पार्टी के कुछ लोग उनसे यह जीत छिनने की कोशिश कर रहे है। पर वही जितेगी, ऐसा मुझे पुरा भरोसा है।’ ऐसे शब्दों में अमरिका के राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने डेमोक्रॅट पार्टी की नेता नॅन्सी पेलोसी की खुला समर्थन दिया है। करारी रिपब्लिकन के रुप में पहचाने जानेवाले ट्रम्प का यह ऐलान राजकीय क्षेत्र में खलबली मचानेवाला साबित हुआ है।

मध्यावधी चुनाव के में प्रतिनिधीगृह के ४३५ जगहों में से ४३० जगहों के परिणाम सामने आये है और उसमें २३२ जगह ‘डेमोक्रॅट’ को तथा १९८ जगह ‘रिपब्लिकन’ पार्टी को मिली है। बहुमत तथा प्रतिनिधीगृह का सभापती चुनने के लिए जरुरी २१८ जगह ‘डेमोक्रॅट’ के पास है। इसलिए ‘डेमोक्रॅट’ उम्मीदवार आसानी से सभापती के तौर पर चुना जा सकता है। इस से पहले सन २००७ से २०११ तक सभापती पर की जिम्मेदारी संभालनेवाली नॅन्सी पेलोसी ‘डेमोक्रॅट’ पार्टी की उम्मीदवार रहेगी, ऐसा माना जाता है।

पर पार्टी के करीब १७ सदस्यों ने इसे विरोध दर्शाया है। इस बार सभापती के तौर पर नया चेहरा देने की मॉंग को गयी है। पर विरोधियों के पास चेहरा ना होने की वजह से पेलोसी ही ‘डेमोक्रॅट’ पार्टी से सभापती के तौर पर खडी रहेगी और चुनके आयेंगी, ऐसा माना जाता है। विरोध करनेवाले सदस्य अगर विरोध में मतदान करते है तो पेलोसी के सामने रुकावट खडी हो सकती है। इस पृष्ठभूमी पर राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प द्वारा सामने आया सहयोग का प्रस्ताव ध्यान बटोरनेवाला साबित होता है।

सबसे प्रमुख बात यह है कि, नॅन्सी पेलोसी राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प को प्रतिनिधीगृह में रोकेगी, ऐसा दावा करनेवाले विश्‍लेषक अचरज में पड गये है। साथ ही मध्यावधी चुनाव में ‘मै ही जीता’ यह राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प के ऐलान का सही मतलब अभी खुला हुआ, ऐसा दिखाई दे रहा है।

नॅन्सी पेलोसी के साथ मध्यावधी चुनाव में जीते हुए उम्मीदवार ट्रम्प के छुपे समर्थक है, ऐसा दावा कुछ विश्‍लेषकों ने किया था। अपनेही रिपब्लिकन पार्टी के विरोधकों को हराते हुए ट्रम्प ने डेमोक्रॅट पार्टी से अपने समर्थकों को जिताया, ऐसा विश्‍लेषकों का दावा था।

नॅन्सी पेलोसी ने भी जीत के बाद रचनात्मक कार्य पर भर देने का वक्तव्य करते हुए सिर्फ ट्रम्प को विरोध दिखाना है इसलिए विरोध नही किया जायेगा, ऐसा ऐलान किया था। इसके पिछे रहा राजनीतिक मतलब भी अभी साफ हो चुका है। इसी लिए मध्यवाधी चुनाव के परिणामों के वाद ट्रम्प पहले ज्यादा शक्तिशाली बने हुए दिखाई पड रहे है। उनके कमजोर होने का दावा करनेवाले सारे विपक्षी मुँह के बल पडे है, ऐसा साफ दिखाई पडता है।

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