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रशिया एवं चीन के बचाव पर हावी होने के लिए अमरिका कर रही है ‘सुपरगन’ और ‘हायपरसोनिक’ मिसाइल का निर्माण

वॉशिंगटन –  चीन और रशिया की बढती आक्रामकता का संज्ञान लेकर ७१८ अरब डॉलर्स की मांग कर रहे अमरिकी रक्षा दल ने १,१०० मील से भी अधिक दूरी पर हमला करने में सक्षम ‘सुपरगन’ एवं ‘हायपरसोनिक’ मिसाइल का निर्माण करने पर जोर देने के संकेत दिए है। रशिया एवं चीन ने अमरिकी यंत्रणा को परास्त करने में सक्षम प्रगत शस्त्र विकसित किए है, यह दावा अमरिकी रक्षा अधिकारी एवं विश्‍लेषकों ने किया था। इस पृष्ठभूमि पर अमरिका अब इन दोनों देशों को जवाब देने के लिए आक्रामक तरीके से पहल करके ‘सुपरगन’ एवं ‘हायपरसोनिक’ मिसाइल के निर्माण को गति देता दिखाई दे रही है।

कुछ दिनों पहले ही अमरिका के अस्थायी रक्षा मंत्री पैट्रिक शैनाहन इन्होंने वर्ष २०२० के लिए ७१८ अरब डॉलर्स की रकम रक्षा खर्च के प्रावधान के लिए संसद के सामने मांगी थी। यह मांग वर्ष २०१९ की तुलना में पाच प्रतिशत बढोतरी दिखा रही है और रक्षा खर्च में बढोतरी करते समय चीन के साथ ही रशिया के साथ बनी स्पर्धा का जिक्र भी किया गया था। ‘चीन और रशिया ने प्राप्त की हुई क्षमता के कारण अमरिकी लष्कर की गतिविधियां सीमित होती दिखाई दे रही है’, ऐसा रक्षादलप्रमुख जनरल डनफोर्ड इन्होंने कहा था।

इस पृष्ठभूमि पर अमरिकी रक्षा दल ने चीन और रशिया की यंत्रणा पर हावी होने के लिए खास परियोजना बनाई है और इसमें ‘सुपरगन’ और ‘हायपरसोनिक मिसाइल’ के निर्माण का समावेश है। रक्षा विभाग ने जमीन से हमला करने में सक्षम ‘हायपरसोनिक मिसाइल’ के लिए १.१८ अरब डॉलर्स और ‘सुपरगन’ के लिए ३०.५ करोड डॉलर्स का प्रावधान किया है। यह दोनों यंत्रणा अगले चार वर्षों में विकसित करने का उद्देश्य सामने रखा गया है।

इनमें से ‘स्ट्रॅटेजिक लॉंग रेंज कॅनन’ यानी ‘सुपरगन’ का निर्माण करने का उद्देश्य सबसे अधिक ध्यान आकर्षित कर रहा है। अमरिकी लष्कर और नौसेना के तोंप फिलहाल १८ से २३ मील दूरी तक हमला कर सकती है। लेकिन, ‘सुपरगन’ इससे करीबन ६० गुना अधिक दूरी तक हमला करनेवाली तोंप होगी और इससे लगभग १,१०० मील दूरी तक हमला करना मुमकिन होगा, यह दावा अमरिकी अधिकारी ने किया है।

भविष्य में यह ‘सुपरगन’ फिलहाल अमरिकी लडाकू विमानों से शुरू कार्रवाई करने में सक्षम होगी, ऐसे संकेत सूत्रों ने दिए है। रशिया और चीन के पास मौजूद हवाई हमला विरोधी यंत्रणा का विचार करे तो लडाकू विमानों के बजाय ‘सुपरगन’ का इस्तेमाल उपयोगी हो सकता है, यह संभावना भी रक्षा विभाग से जताई जा रही है।

इस ‘सुपरगन’ के साथ ही ‘हायपरसोनिक’ मिसाइल के निर्माण पर जोर देने के अलावा राकेटस् का इस्तेमाल बढाने का जिक्र भी रक्षा विभाग की मांग में किया गया है। अमरिकी वायुसेना एवं नौसेना ने ‘हायपरसोनिक’ मिसाइल का प्राथमिक स्तर लांघा है, फिर भी लष्कर यह क्षमता नही रखता. लेकिन, अगले चार वर्षों में लष्कर इस पर ध्यान केंद्रीत करेगा, ऐसा रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी माईक ग्रिफिन इन्होंने कहा है। चीन और रशिया के मिसाईल गिराने के लिए यह क्षमता काफी अहम साबित होगी, इन शब्दों में ग्रिफिन इन्होंने ‘सुपरगन’ का समर्थन किया।

अमरिकी रक्षा विभाग ने इस बार रक्षा खर्च में ‘राकेटस्’ की संख्या भी बडी तादाद में बढाने की बात स्पष्ट हुई है। वर्ष २०२० में अमरिका जमीन से जमीन पर हमला करनेवाले १० हजार से भी अधिक राकेटस् की खरीद कर रही है। पिछले वर्ष के तुलना में इस मांग में लगभग २६ प्रतिशत की बढोतरी हुई है। इसके लिए १ अरब डॉलर्स से भी अधिक रकम की मांग की गई है और लष्कर की मारक क्षमता बढाने के लिए यह मुद्दा अहम है, यह भी इस दौरान स्पष्ट किया गया है।

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