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अमरिकी ‘एफ-३५’ उडान

वॉशिंगटन, दि. १० (वृत्तसंस्था) – रशिया और चीन के अतिप्रगत लडाकू विमानों को भी मुमकिन नही हुई है, ऐसा कारनामा अमरिका के ‘एफ-३५’ ने मुमकिन कर दिखाया है| अमरिकी सेना के राडार यंत्रणा को चकमा देनेवाले शत्रु के मिसाइलों की जानकारी समय पर ‘मिसाइल कमांड सिस्टिम’ तक पहुंचाने का काम ‘एफ-३५’ ने सफलता के साथ पूरा किया है| कैलिफोर्निया में किए गए एक अभ्यास के दौरान ‘एफ-३५’ ने सेना के लिए हवामें उडान भरते ही राडार का भी काम किया| इस के साथ ही सेना की राडार यंत्रणा के पकड में ना आनेवाले शत्रु के मिसाइल अमरिकी स्टेल्थ ‘एफ-३५’ के नजर से छुट नही सकेंगे, यह दावा अमरिकी अधिकारी और संबंधित कंपनी कर रही है|

पिछले कुछ वर्षों से अमरिका के तिनों दलों की सेवा में तैनात ‘एफ-३५’ यह अतिप्रगत और ‘फिफ्थ जनरेशन’ लडाकू विमान है| राडार को चकमा देने की ‘स्टेल्थ’ तकनीक से सज्जित ‘एफ-३५’ विमान बतौर ‘मिसाइल किलर’ भी कहा जाता हैै| ऐसा होते हुए भी पिछले तीन वर्षों से यह लडाकू विमान अधिक से अधिक कठिन मुहिम के लिए तैयार करने के लिए ‘लॉकहिड मार्टिन’ कंपनी बडी कोशिश कर रही है| इसी कोशिश के हिस्से के तहेत पिछले महीने में कैलिफोर्निया के ‘पामडेल’ लष्करी अड्डे पर किए गए ‘ऑरेंज फ्लॅग’ युद्धाभ्यास में ‘एफ-३५’ का नया परीक्षण किया गया|

अबतक लष्करी अड्डे पर तैनात राडार से प्राप्त होनेवाली जानकारी ‘एफ-३५’ तक पहुंचाई जा रही थी| लेकिन, ‘ऑरेंज फ्लॅग’ युद्धाभ्यास में पहली बार ‘एफ-३५’ ने उडान भरने के बाद राडार की तरह काम किया और अमरिकी सेना के ‘इंटिग्रेटेड एअर मिसाइल डिफेन्स’ (आईएएमडी), बॅटल कमांड सिस्टिम (आईबीसीएल) के लिए शत्रु ने प्रक्षेपित किए मिसाइलों की जानकारी पहुंचाई| ‘एफ-३५’ से प्राप्त जानकारी समय पर मिलने से शत्रु का मिसाइल आम समय से पहले ही नष्ट करने की कामयाबी प्राप्त होने की जानकारी ‘लॉकहिड मार्टिन’ ने जारी किए पत्रक में दी है| हवा में उडान भरनेवाले लडाकू विमान ने सेना के लिए ‘राडार’ का काम करने का दावा इस अमरिकी कंपनी ने किया है|

इस युद्धाभ्यास की वजह से ‘एफ-३५’ की सामर्थ्य और क्षमता में नया इजाफा होने की बात इस युद्धाभ्यास में शामिल अमरिकी अधिकारियों ने कही है| अबतक राडार यंत्रणा को चकमा देकर शत्रु के मिसाइल का पता लगाना और उसपर नजर रखना अमरिकी सेना के राडार के लिए कठिनाईयों से भरा हो रहा था| लेकिन, ‘एफ-३५’ विमान अमरिकी सेना के लिए सेन्सर, राडार एवं जरूरत पडने पर ‘मिसाइल किलर’ का भी काम कर सकता है, यही बात इस परिक्षण से स्पष्ट हुई है| तीन वर्ष पहले ‘एफ-३५’ ने अमरिकी नौसेना की ‘एजिस’ इस हवाई सुरक्षा यंत्रणा के लिए भी ऐसा ही परिक्षण किया था|

ऐसे में अब ‘एफ-३५’ विमान का नया परिक्षण रशिया एवं चीन के लिए इशारा होने का दावा किया जा रहा है| पिछले कुछ वर्षों में रशिया और चीन ने हायपरसोनिक मिसाइलों के निर्माण को गति दी है और अमरिकी सुरक्षा के लिए यह बडी चुनौती होने का इशारा अमरिकी लष्करी अधिकारी एवं विश्‍लेषक दे रहे है| इन हायपरसोनिक मिसाइलों के हमलें रोकने के लिए अमरिका का अतिप्रगत राडार यंत्रणा की जरूरत होने के दावे भी किए गए थे| लेकिन, ‘एफ-३५’ ने किए नए कारनामे से रशिया और चीन के हायपरसोनिक मिसाइलों से बना खतरा कम होने की बात कही जा रही है|

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