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पर्यावरण का नुकसान होने से हो रहे विनाश की पृष्ठभूमि पर अमरिकी सेना व्यापक तैनाती करने की तैयारी में – रशियन समाचार चैनल का दावा

वॉशिंगटन – पर्यायावर का नुकसान होने से होनेवाले भीषण तबाही का लाभ उठाने की तैयारी अमरिकी सेना ने की है, यह आरोप रशियन समाचार चैनल ‘आरटी’ ने किया है। ‘आरटी’ के वेबसाईट पर प्रसिद्ध किए एक समाचार में अमरिकी सेना ने प्रसिद्ध किए ‘क्यायमेट चेंज रिपोर्ट’ का दाखिला देकर आर्क्टिक से बांगलादेश तक अमरिका व्यापक लष्करी तैनाती कर सकती है, यह दावा किया गया है।

पिछले महीने में ही अमरिका के नए सेनाप्रमुख जनरल जेम्स मॅक्कॉलव्हिल ने अमरिकी सेना देश के अड्डों में बिठाकर रखने से बजाए दुनिया के कोने कोने में तैनात करके संघर्ष के लिए तैयार रहनी चाहिए, इन शब्दों में व्यापक मुहीमों के लिए अमरिका की तैयारी शुरू होने के संकेत दिए थे। इसके साथ ही अब हवामान में हो रहे बदलाव की पृष्ठभूमि पर अमरिकी सेना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैनाती बढाने की गतिविधियां कर रही है।

अमरिकी सेना के ‘आर्मी वॉर कॉलेज’ ने देश के प्रमुख वैज्ञानिक और लष्करी अधिकारियों की सहायता से हवामान में हो रहे बदलाव से संबंधित ५२ पन्नो का रपट प्रसिद्ध किया है। ‘इम्प्लिकेशन्स ऑफ क्लायमेट चेंज फॉर द यूएस आर्मी’ यह नाम इस रपट को दिया गया है। इस रपट में नैसर्गिक एवं मानव निर्मित आपत्तियों का सेना पर होने वारा असर, इससे जुडी संबावित गतिविधियों का अंदाजा और सेना की तैयारी की जानकारी दी गई है। अमरिका में नैसर्गिक आपत्ति आपने पर सेना की भूमिका और विदेश की आपत्ति के दौरान संभावित हस्तक्षेप का जिक्र भी इस रपट में किया गया है।

रशियन समाचार चैनल ने आर्क्टिक क्षेत्र एवं बांगलादेश जैसे एशियाई देशों में अमरिकी सेना की संभावित तैनाती का विशेष जिक्र किया है। हवामान में हो रहे बदलाव से आर्क्टिक क्षेत्र में पीघल रही बर्फिले चट्टाने और वहां पर मौजूद खनिज संपत्ति का जिक्र करके आर्क्टिक पर वर्चस्व स्थापित करने के लिए अमरिकी प्रशासन ने अपनी क्षमता में अधिक बढोतरी करनी होगी, यह सिफारिश इस रपट में की गई है। रशिया इस क्षेत्र का लष्करीकरण कर रही है, यह आरोप भी इस रपट में दर्ज होने की जानकारी ‘आरटी’ ने अपनी खबर में दी है।

अमरिकी सेना के इस रपट में समुदाय के बढते स्तर से बांगलादेश जैसे एशियाई देश को बने खतरों का जिक्र भी है। इस देश के शरणार्थियों की वजह से संघर्ष शुरू हो सकता है और उसे रोकने के लिए अमरिकी सेना तैनात करनी होगी, यह संभावना ‘आर्मी वॉर कॉलेज’ ने इस रपट में व्यक्त की है।

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