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गिरते ईंधनदरों के कारण आखाती देशों को कोरोना से बड़ा झटका लगेगा – विश्लेषकों का दावा

रियाध/कुवैत – ईंधनदरों में हो रही गिरावट और निवेश में हुई कमी इनके कारण कुवैत की अर्थव्यवस्था को ज़बरदस्त धक्के लगनेवालें हैं और इसके आगे केवल क्रूड़ ऑईल पर निर्भर नहीं रह सकते, ऐसी चेतावनी कुवैत के प्रमुख ‘शेख सबाह अल-अहमद अल-सबाह ने दी है। कुवैत की ५० प्रतिशत से भी अधिक अर्थव्यवस्था ईंधन पर निर्भर है। कुवैत के प्रमुख आर्थिक झटकों के बारे में चिंता ज़ाहिर कर रहे हैं कि तभी आंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्लेषकों ने भी आखाती देशों के बारे में भविष्यवाणी बताने की शुरुआत की होकर, कोरोना संक्रमण से भी अधिक नुकसान ईंधनदरों की गिरावट से हो सकता है, ऐसीं चेतावनियाँ भी दीं हैं।

जागतिक स्तर पर ईंधन के दाम फिलहाल २० से ३० डॉलर्स प्रति बॅरल तक लुढ़के हैं। कोरोनावायरस का संक्रमण अभी तक नियंत्रण में न आया होकर, अगले साल तक उसका प्रभाव कायम रहने के संकेत मिल रहे हैं। इस कारण कच्चे तेल के दामों में बड़ी बढ़ोतरी संभव नहीं है। इसके धक्के आखाती देशों को लगनेवाले होकर, उन्हें आर्थिक, सामाजिक तथा राजकीय परिणामों का सामना करना पड़ेगा, ऐसा दिखने लगा है।

कुवैत यह ईंधन पर निर्भर होनेवाले आखाती क्षेत्र के प्रमुख देशों में से एक है। केवल क्रूड़ ऑईल पर निर्भर नहीं रह सकते, यह इस देश के प्रमुख का वक्तव्य आखातक्षेत्र की अधिकांश ईंधन अर्थव्यवस्थाओं का वास्तव दर्शानेवाला है। सन २०१४ तथा उसके पश्चात् समय में भी ईंधन के दाम भारी मात्रा में गिरे थे। उसी समय अधिकांश ईंधनसंपन्न आखाती देशों की अर्थव्यवस्थाएँ डूबने की शुरुआत हुई थी।

लेकिन उसके बाद दामों में वृद्धि होकर स्थिति सुधरेगी, ऐसा विश्वास आखाती नेताओं द्वारा व्यक्त किया गया था। मग़र वर्तमान स्थिति में आखात का नेतृत्त्व ईंधनक्षेत्र में सकारात्मक बदलावों की अपेक्षा ईंधन के अलावा अर्थव्यवस्था चलाने के बारे में वक्तव्य कर रहे हैं। इसके पीछे तेल के दाम गिरने के कारण अर्थव्यवस्था को लगे धक्के, यह प्रमुख कारण दिखायी देता है।

सौदी अरेबिया इस प्रमुख देश का विदेशी मुद्रा भंडार दशक के नीचांकी स्तर पर फिसल गया है। इस वर्ष की पहली ही तिमाही में सौदी अर्थव्यवस्था का वितीय घाटा ९ अरब डॉलर्स के पार जा चुका है} संयुक्त अरब अमिरात ने सभी सरकारी विभागों में भर्ती रोक दी है। कतार जैसे देश ने तक़रीबन आठ अरब डॉलर्स से अधिक मूल्य के प्रकल्पों को स्थगित लिया है। वहीं, इराक जैसे देश की अर्थव्यवस्था इस वर्ष लगभग १० प्रतिशत से गिरेगी, ऐसी चेतावनी जागतिक बँक ने दी है।

अर्थव्यवस्था को लगनेवाले ये धक्के यानी केवल शुरुआत है और सामाजिक तथा राजकीय परिणाम अभी भी पूरी तरह सामने नहीं आये हैं। इराक और लेबेनॉन इन देशों में जारी प्रदर्शन सभी आखाती देशों में फ़ैलने की गहरी संभावना है। कोरोना के संक्रमण की जानकारी सामने आने से पहले ही आखात क्षेत्र के कुछ अभ्यासकों ने, दूसरे ‘अरब स्प्रिंग’ के लिए पोषक स्थिति तैयार होने की चेतावनी दी थी। तेल के दामों की गिरावट आने के कारण हालात और भी बिगड़ेंगे, ऐसा दिखायी देने लगा है।

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