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अमरीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुई चीन के एजेंडे पर चर्चा

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वॉशिंग्टन – कोरोना वायरस की महामारी के साथ चीन की जारी विस्तारवादी गतिविधियों के पृष्ठभूमि पर अमरीका के साथ चर्चा करने के लिए ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री एवं रक्षामंत्री वॉशिंग्टन पहुँचे। पिछले कुछ महीनों से अमरीका द्वारा चीन के विरुद्ध मित्रदेशों का मोर्चा बनाने की कोशिश जारी है। ‘ऑसमिन’ नाम से जानी जा रही इस चर्चा के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया को इसमें शामिल करने के संकेत सूत्रों ने दिए। कुछ दिनों पहले ऑस्ट्रेलिया सरकार ने साउथ चायना सी के प्रति चीन द्वारा किए गए सभी दावे ठुकराने की भूमिका अपनाई थी। अमरीका के बाद ऐसी भूमिका अपनानेवाला ऑस्ट्रेलिया दूसरा देश है।

चर्चा, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया

ऑस्ट्रेलिया के विदेशमंत्री मारिस पेन एवं रक्षामंत्री लिंडा रेनॉल्डस्‌ सोमवार को वॉशिंग्टन पहुँचे और उन्होंने अमरिकी विदेशमंत्री माईक पोम्पिओ एवं रक्षामंत्री मार्क एस्पर से भेंट की। मंगलवार को दोनों देशों के मंत्रियों की ‘टू प्लस टू’ बैठक हो रही है। इस बैठक में चीन के एजेंडा पर भी चर्चा होने की बात कही जा रही है। कोरोना वायरस की महामारी एवं साउथ चायना सी के अलावा हाँगकाँग, सायबर हमले एवं डिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन का मुद्दे इस चर्चा में शामिल होंगे।

प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया ने पिछले डेढ़ वर्ष से अपनी चीन विरोधी भूमिका अधिकाधिक आक्रामक करने की नीति अपनाई है। मॉरिसन की सरकार ने अपने देश पर बना चीन का प्रभाव कम करने के लिए बड़े साहसी निर्णय लिए हैं। इनमें चीन द्वारा ऑस्ट्रेलिया में किया गया निवेश और राजनीतिक दखलंदाज़ी को रोकने के लिए बनाए गए कानून का भी समावेश है। ‘5जी’ क्षेत्र में चीन की हुवेई कंपनी पर पाबंदी लगानेवाले ऑस्ट्रेलिया ने चीन का पैसिफिक क्षेत्र में बना प्रभाव रोकने के लिए स्वतंत्र नीति भी अपनाई। ऐसे में अब बीते सप्ताह में ही ऑस्ट्रेलिया की मॉरिसन सरकार ने डिफेन्स स्ट्रैटेजिक अपडेट घोषित करके साउथ चायना सी समेत पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन को सरेआम चुनौती के संकेत दिए हैं। चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारी साझेदार देश होने के बावजूद अपनाई गई यह भूमिका ध्यान आकर्षित करनेवाली मानी जाती है।

चर्चा, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया

प्रधानमंत्री मॉरिसन की चीन विरोधी भूमिका की तीव्र गूँज चीन में सुनाई दे रही है। चीन की कम्युनिस्ट हुकूमत द्वारा लगातार दबाव बनाए रखने की कोशिश जारी है ताकि ऑस्ट्रेलिया अपनी नीति में बदलाव लाए। चीन ने ऑस्ट्रेलियन उत्पादों पर बड़ी मात्रा में व्यापारी कर थोपे हैं और अपने नागरिकों को पर्यटन एवं शिक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया न जाने की चेतावनी भी जारी की है। पिछले वर्ष से ऑस्ट्रेलिया पर हो रहे बड़े सायबर हमलों के पीछे चीन का ही हाथ माना जाता है। साउथ चायना सी और 5जी प्रणाली के मुद्दों पर ऑस्ट्रेलिया द्वारा लिए गए निर्णय मॉरिसन सरकार  अमरीका के इशारे पर ले रही है ऐसा साबित होता है, ऐसी कड़ी आलोचना चीन द्वारा की गई है। चीन के विरोध में अपनाई गई भूमिका इसके आगे भी कायम रही तो ऑस्ट्रेलिया को अर्थव्यवस्था के साथ अन्य क्षेत्रों में गंभीर परिणामों का सामना करना पडेगा, ऐसी धमकी भी चीन की ओर से दी गई है।

चर्चा, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया

लेकिन चीन द्वारा लगातार बनाए जा रहे दबाव के बावजूद ऑस्ट्रेलिया ने अपनी नीति में बदलाव न करने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। ऑस्ट्रेलिया के विदेशमंत्री एवं रक्षामंत्री का यह अमरीका दौरा और उससे पहले चीन की गतिविधियों को लेकर किया गया निवेदन, इस बात की स्पष्ट पुष्टि के संकेत  हैं। साउथ चायना सी में जारी चीन की आक्रामकता को रोकने के लिए अमरीका ने फिलहाल बड़ी मात्रा में रक्षा तैनाती की है। इस कार्य में अन्य मित्रदेश भी साथ दें, इस लिए अमरीका द्वारा कोशिश जारी है और इसके लिए जापान के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया पर भी ध्यान केंद्रीत किया जा रहा है।

पिछले सप्ताह में ऑस्ट्रेलिया द्वारा साउथ चायना सी क्षेत्र में अपने युद्धपोत भेजे जाने अमरीका की कोशिशों की कामयाबी का नतीजा है। ऑस्ट्रेलियन युद्धपोतों की यह तैनाती स्थाई तौर पर अपनाई गई नीति का हिस्सा रहे इस लिए अमरीका ऑसमिन चर्चा का इस्तेमाल करेगी, ऐसे संकेत सूत्रों ने दिए हैं। इसमें कामयाबी प्राप्त होने पर पैसिफिक क्षेत्र में चीन द्वारा अपनाई गईए महत्वाकांक्षा को जोरदार झटका लग सकता है, यह विश्‍लेषकों का दावा है।

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