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तृतीय विश्‍वयुद्ध के अंतर्गत ध्वंस बढ रहा है – ईसाइयों के सर्वोच्च धार्मिक गुरु ‘पोप फ्रान्सिस’

तृतीय विश्‍वयुद्ध के अंतर्गत ध्वंस बढ रहा है - ‘पोप फ्रान्सिस’

‘इस वक्त दुनिया में तृतीय विश्‍वयुद्ध चल रहा है। अपराध, नरसंहार और विनाश की राह पर चलते हुए, दुनिया में हर तरफ तुकडों में यह तृतीय विश्‍वयुद्ध खेला जा रहा है।’ ऐसी चेतावनी ईसाइयों के सर्वोच्च धार्मिक गुरु ‘पोप फ्रान्सिस’ ने दी है। युद्ध से विनाश के सिवा कुछ हासिल नही होता, ऐसा कहकर पोप फ्रान्सिसने यह समय मानवता के लिए आँसू बहाने का है, ऐसी संवेदना जताई।

प्रथम विश्‍वयुद्ध में स्लोव्हानिया के संघर्ष में इटली के हजारो सैनिक मारे गये थे। इन सैनिकों की याद में खडे किये गये स्मारक को आदरणीय पोप फ्रान्सिस ने भेट दी। इस वक्त उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए पोप फ्रान्सिस ने प्रथम विश्‍वयुद्ध में शहीद हुए इटालियन सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। पोप फ्रान्सिस ने कहा कि, युद्ध की वजह से हो रहे विनाश का यह एक भयावह उदहारण हम सबके सामने है। आज भी दुनिया में कई जगहों पर सैकडों लोगों की मौत हो रही है और अब यह समय मानवता के लिए आंसू बहाने का है, ऐसा पोप फ्रान्सिस ने कहा।

‘पोप फ्रान्सिस’ ने दावा किया कि, दुनिया में कई जगहों पर तृतीय विश्‍वयुद्ध शुरु हो चुका है अपराध, जनसंहार और विनाश की राह से यह युद्ध आगे चलाया जा रहा है। लालच, अहिष्णुता और सत्ता की चाहत की वजह से युद्ध भडकाया जाता है और विचारधाराओं की आधार पर उसका समर्थन भी किया जाता है। ‘पोप फ्रान्सिस’ ने आगे कहा कि, युद्ध का किसी भी प्रकार से समर्थन नही हो सकता। युद्ध यह असंगत विषय है और उस से विनाश के सिवा कुछ हासिल नही होता। ‘पोप फ्रान्सिस’ ने अपनी संवेदना जताते हुए, पवित्र बायबल में बताए गए केन और अ‍ॅबल इन दो भाईयों की कथा का संदर्भ दिया और कहा कि, युद्ध एक भाई को दूसरे भाई की हत्या करने के लिए उकसाता है।

वर्तमान में अनेक लोग बेवजह मारे जा रहे है। ‘पोप फ्रान्सिस’ ने इल्जाम लगाया कि, इस पल दुनिया में गहरा दुःख, दर्द, पश्‍चाताप है और इन सब के पिछे कई लोगों के विशेष संबंध, भूराजनीतिक समीकरण तथा धन और सत्ता की लालच, परदे के पिछे से काम कर रही है। ‘पोप फ्रान्सिस’ ने कडी आलोचना करते हुए कहा कि, रक्तपात की वजह बनाने वाली समस्याँए पैदा करनेवाले, दहशतगर्दी के सूत्रधार, हथियारों का उत्पादन करने वाले, आदि सभी के संबंध इस विनाश और हिंसा के पिछे है। ‘पोप फ्रान्सिस’ ने आगे सलाह देते हुए कहा कि, ऐसी स्थिती में विवेकपूर्ण विचार करनेवाले लोगों ने अपनी गलतियाँ सुधारना, दूसरों का दुःख और दर्द की पहचान करना साथ ही गलतियों के लिए क्षमा याचना करने की तैयारी रखनी चाहिए।

‘पोप फ्रान्सिस’ ने इस से पहले कहा था कि, दुनिया में चल रही गतिविधियाँ तृतीय विश्‍वयुद्ध का संकेत देनेवाली है। पोप फ्रान्सिस ने पिछले दो सालों से सिरिया में सरकार और विद्रोहियों की बीच चल रहा संघर्ष तथा इराक में ‘आयएसआयएस’ नामक आतंकवादी संगठन से चलाया जा रहा जनसंहार जैसी घटनाओं पर भी गहरा शोक जताया था। पोप फ्रान्सिस ने आवाहन किया था कि हिंसा रोकने के लिए चर्चा द्वारा समस्या का हल निकालने की जरुरत है। पोप फ्रान्सिस ने अपने दक्षिण कोरिया के दौरे पर चेतावनी भी दी थी कि, मानवता तृतीय विश्‍वयुद्ध के गहरी छाँव में है।

पोप फ्रान्सिस ने अगस्त महिने में किये दक्षिण कोरिया के दौरे पर किए वक्तव्य में कहा था कि, तृतीय विश्‍वयुद्ध शुरु हो चुका है। पोप फ्रान्सिस ने अपने वक्तव्य का स्पष्टीकरण करते हुए आगे कहा कि, उन्हे मिलनेवाले एक व्यक्तिने दुनिया में युद्ध शुरु हो चुका है और हम तृतीय विश्‍वयुद्ध का सामना कर है ऐसा कहा था और उसका कहना सच है, ऐसी टिप्पणी की थी।

 

(Courtesy: www.newscast-pratyaksha.com)

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