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भविष्य में चीन से निर्माण होने वाला खतरा रोकने के लिए ऑस्ट्रेलिया ने हुवेई पर बंदी का निर्णय लिया

कैनबरा/बीजिंग – वर्तमान समय में अनिश्चितता बढ़ रही है और वर्तमान में मैत्रीपूर्ण संबंध होनेवाले देश भविष्य में मित्र रहेंगे, इसका यकीन नहीं है। इसकी वजह से ऐसे देशों के विरोध में ध्यान पूर्वक खुद को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया ने चीन के हुवेई एवं झेडटीई कंपनी पर जारी किए प्रतिबंधों का निर्णय इसी धारणा का भाग है, ऐसे शब्दों में ऑस्ट्रेलिया के भूतपूर्व प्रधानमंत्री मालकम टर्नबुल ने चीन के विरोध में स्वीकारी भूमिका का समर्थन किया है। हॉगकॉंग में एक दैनिक को दिए मुलाकात में टर्नबुल ने चीन के विरोध में लिए निर्णय के पीछे अमरिका का दबाव होने की बात स्पष्ट शब्दों में ठुकराई है।

चीन के दूरसंचार क्षेत्र में अग्रणी की कंपनी होनेवाले हुवेई का मुद्दा फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ़ैल रहा है। अमरिका के राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने इसके विरोध में एवं आग्रही भूमिका ली है और मित्र देशों पर हुवेई के विरोध में कार्रवाई के लिए दबाव बनाना शुरू किया है। फिलहाल ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड इन देशों ने हुवेई पर बंदी जारी की है और कई यूरोपीय देशों ने ऐसे संकेत दिए हैं। पर जर्मनी जैसे देश ने पूर्ण बंदी से इनकार किया है और स्वतंत्र निर्णय लेने की बात घोषित की है।

इसकी वजह से दूसरी तरफ पिछले वर्ष में ऑस्ट्रेलिया एवं चीन में संबंध अधिक से अधिक तनाव पूर्ण होते दिखाई दे रहे हैं। पिछले वर्ष चीन से एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में शुरू हस्तक्षेप के पृष्ठभूमि पर ऑस्ट्रेलिया ने स्टेप अप टू पैसिफिक इस नाम की महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की थी। उसके बाद देश में शिक्षा संस्था, स्वयंसेवी संस्था तथा अभ्यास गट के माध्यम से चीन का हस्तक्षेप रोकने के लिए फॉरेन इंटरफेरेंस लॉज को मंजूरी दी थी।

एशिया-पैसिफिक क्षेत्र का भाग होनेवाले ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से चीन को मिल रही चुनौती, चीन के सत्ताधारियों को बेचैन क रही है। प्रमुख व्यापारिक साझेदार देश अपने वर्चस्व नहीं मान रहे, यह चीन को बेचैन करने वाली बात है और इसकी वजह से उनपर दबाव लाने के लिए जोरदार प्रयत्न शुरू किए हैं। जिसके लिए चीन की सरकार का मुखपत्र होनेवाले दैनिक तथा वृत्त संस्थाओं के साथ द्विपक्षीय व्यापार से संबंधित यंत्रणा का उपयोग किया जा रहा है।

इस पृष्ठभूमि पर ऑस्ट्रेलिया के भूतपूर्व प्रधानमंत्री ने चीन के साथ संबंधों पर किया भाष्य ध्यान केंद्रित करनेवाला ठहरा है। चीन एवं ऑस्ट्रेलिया में सहयोग अबतक शुरू है, फिर भी भविष्य में वैसा नहीं रहेगा, ऐसा एहसास ऑस्ट्रेलियन नेतृत्व को हुआ है। इसकी वजह से चीन को प्रत्युत्तर देने के लिए एवं बढ़ता दबाव रोकने के लिए योग्य अवसर उपलब्ध होना महत्वपूर्ण होनेवाला है। यह ध्यान में लेते हुए ऑस्ट्रेलिया अपने सुरक्षित को प्राथमिकता देकर चीनी कंपनियों का देश में विस्तार रोकते दिखाई दे रहे हैं्।

अपने बंदी का निर्णय का समर्थन करते हुए टर्नबुल ने चीन में लगाए गए नियमों पर उंगलियां उठाई है। इन नियमों के अनुसार चीनी कंपनियों को देश में गुप्तचर यंत्रणा को सहयोग करना अनिवार्य है। चीन का यह नियम अनेक देशों को खटकने वाला होने से वह देश सावधान होने की भूमिका ले रहे हैं, ऐसा भी ऑस्ट्रेलिया के भूतपूर्व प्रधानमंत्री ने कहा है।

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