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चीन है जनतंत्र का सबसे बडा शत्रु – तैवान सरकार की आलोचना

तैपेई – ‘तैवान में आयोजित चुनाव में हस्तक्षेप करने की तैयारी में होनेवाला चीन जनतंत्र का सबसे बडा शत्रु है| चीन का यह हस्तक्षेप तैवान की जनता कभी भी बर्दाश्त नही करेगी’, यह ऐलान तैवान की सरकार ने किया है| इसके साथ ही सीर्फ तैवान ही नही, बल्कि हॉंगकॉंग में हुए चुनावी नतीजों का भी चीन आदर करें, यह सलाह तैवान की राष्ट्राध्यक्षा ‘त्साई ईंग वेन’ ने दी है| हॉंगकॉंग के स्थानिय चुनावों में जनतांत्रिक गुटों की काफी बडी जीत हुई है और यह चीन के लिए जोरदार झटका होने का दावा भी हो रहा है| ऐसे में तैवान की राष्ट्राध्यक्षा ने चीन को लक्ष्य किया है|

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पिछले हफ्ते में ‘वैंग लिकियांग’ इस चीन के गुप्तचर ने ऑस्ट्रेलिया से पनाह मांगी थी| इस गुप्तचर ने ऑस्ट्रेलियन माध्यमों से बातचीत करते समय तैवान और हॉंगकॉंग के चुनावों में चीन हस्तक्षेप कर रहा है, यह जानकारी सामने रखी थी| तैवान के आजादी की पुकार करनेवाली राष्ट्राध्यक्ष त्साई ईंग वेन’ को सत्ता से दूर करने के लिए चीन आनेवाले चुनावों में गडबडी करने की तैयारी में है, यह दावा भी चीन के इस गुप्तचर ने किया था|

तभी तैवान की राष्ट्राध्यक्ष त्साई के विरोधक एवं कुओमिंगतांग इस दल के नेता हान कुओ यू की सकारात्मक प्रतिमा तैवानी जनता के सामने रखने के लिए चीन तैवानी माध्यमों का इस्तेमाल कर रहा है, ऐसा वैंग ने कहा| साथ ही चीन ने हान कुओ यू को चुनाव लडने के लिए आर्थिक सहायता की है, यह जानकारी भी चीन के इस गुप्तचर ने सार्वजनिक की है| पर, हान ने इस गुप्तचर ने लगाए आरोप ठुकराए है|

इस पृष्ठभूमि पर तैवान की शासक डेमोक्रैटिक प्रोग्रेसिव्ह पार्टी के अध्यक्ष चो जूंग ताय ने चीन को फटकार लगाई है| ‘चीन यह जनतंत्र का शत्रु है| वर्तमान के समय में तैवान के लिए सबसे महत्वाकांक्षी विरोधक और स्पर्धक भी चीन ही है’, इसका एहसास चो जूंग ताय ने दिलाया| इस वजह से तैवानी जनता चीन से सावधानी बरते, यह सूचना चीन के शासक दल ने की है|

तभी, तैवान की राष्ट्राध्यक्षा त्साई ने हॉंगकॉंग में घोषित हुए चुनावों के नतीजों की पृष्ठभूमि पर चीन को जनतंत्र का एहसास कराया| साथ ही हॉंगकॉंग की जनता ने दिए नतीजें और जनतंत्र का चीन आदर करें, यह निवेदन भी उन्हों ने किया|

कुछ दिन पहले अमरिका के विदेशमंत्री माईक पोम्पिओ ने भी चीन की कम्युनिस्ट हुकूमत पर आलोचना करके नाटो को चेतावनी दी थी| सात दशक पहले सोवियत रशिया से बने खतरे की पृष्ठभूमि पर ‘स्वतंत्रता’ और ‘जनतंत्र’ की सुरक्षा के लिए नाटो का गठन हुआ था| सोवियत रशिया का खतरा अब नही रहा, फिर भी नाटो के लिए चीन की कम्युनिस्ट दल से स्वतंत्रता और जनतंत्र को सोवियत रशिया इतना ही बडा खतरा होने की चेतावनी विदेशमंत्री पोम्पिओ ने दी है|

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