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अमरीका ने ईरान पर निर्बंधों का शिकंजा और ज़ोर से कसा

वॉशिंग्टन/तेहरान – ईरान नागरी परमाणु समझौते का उल्लंघन कर रहा होने का आरोप कर अमरीका ने बुधवार को ईरान पर निर्बंधों का शिकंजा और भी ज़ोर से कसा है। इसके साथ, सन २०१५ के परमाणुसमझौते के तहत ईरान को मिली आख़िरी सहूलियत भी अमरीका ने हटा दी। अमरीका के साथ चर्चा करो, अन्यथा आर्थिकदृष्टि से विनाश की तैयारी रखो, ऐसी चेतावनी अमरीका ने ईरान को दी है। लेकिन, सहूलियतें हटा देने से ईरान का परमाणुकार्यक्रम रुकेगा नहीं, ऐसी घोषणा करके ईरान ने अमरीका को जवाब दिया है।

सन २०१५ में हुए परमाणुसमझौते के तहत अमरीका और मित्रदेशों ने ईरान को कुछ सहूलियतें बहाल कीं थीं। इन सहूलियतों के तहत रशिया, चीन और युरोपिय देशों से ईरान के नागरी परमाणुकार्यक्रम को सहायता प्राप्त हो रही है। अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने तीन साल पहले, ईरान के साथ के परमाणुसमझौते से बाहर निकलने के बाद भी इनमें से कुछ सहूलियतें बरक़रार रखीं गयीं थीं। लेकिन इसके आगे ईरान को किसी भी प्रकार की सहूलियत मिलनेवाली नहीं है, ऐसा अमरीका के विदेशमंत्री माईक पॉम्पिओ ने स्पष्ट किया। इस कारण, रशिया, चीन तथा युरोपीय देशों से ईरान की ‘अराक’ इस नागरी परमाणु परियोजना को प्राप्त होनेवाली सहायता भी इसके बाद अमरीका के निर्बंधों की चपेट में आनेवाली है।

अराक परमाणु परियोजना यह नागरी उपयोग के लिए होने का दावा ईरान कर रहा है। इस परमाणु परियोजना का इस्तेमाल वैद्यकीय क्षेत्र के लिए किया जा रहा है, ऐसा ईरान ने कहा है। लेकिन ईरान अपने लष्करी उद्देश्यों के लिए अराक परमाणु परियोजना का इस्तेमाल कर रहा होने का आरोप अमरीका कर रही है। इसी कारण, इन नये निर्बंधों के द्वारा अमरीका ने ईरान पर का दबाव और बढ़ाने की कोशिश की है, ऐसी जानकारी अमरीका ने ईरान के लिए नियुक्त किये विशेषदूत ब्रायन हूक ने दी। उसीके साथ, ईरान यदि सहूलियत चाहता है, तो वह अमरीका से चर्चा करें; अन्यथा इन निर्बंधों के कारण अपनी अर्थव्यवस्था का विनाश कराने के लिए ईरान तैयार रहें, ऐसी चेतावनी हूक ने दी। अगले दो महीनों में अमरीका के इन नये निर्बंधों पर अमल शुरू होनेवाला है।

लेकिन ईरान ने अमरीका के प्रस्ताव ठुकरा दिये हैं। ईरान का परमाणुकार्यक्रम रोकने के लिए अमरीका ने कीं कोशिशें नाक़ाम हुईं हैं। अराक स्थित परमाणु परियोजना भी अमरीका के निर्बंधों की परवाह न करते हुए चालू रहेगी, ऐसा ईरान के परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रवक्ता बेहरोज कमलवांदी ने कहा है। पिछले कुछ हफ़्तों से ट्रम्प प्रशासन ने अपनी ईरानविरोधी भूमिका अधिक ही तीव्र की हुई दिख रही है। पर्शियन आखात से प्रवास करनेवाले अमेरिकन युद्धपोत का ईरान के युद्धपोतों ने ख़तरनाक तरीक़े से पीछा करने के बाद अमरीका की भूमिका में यह आक्रमक बदलाव हुआ है। इसके आगे पर्शियन ख़ाड़ी में यदि अमरीका के युद्धपोतों को ख़तरा निर्माण हुआ, तो तत्काल हमलें करने के आदेश राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प ने अपनी नौसेना को दिये हैं। उसके बाद अब ईरान पर नये निर्बंध थोंपकर अमरीका ने, ईरान की पहले ही डाँवाडोल हो चुकी अर्थव्यवस्था को नया झटका दिया है।

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