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‘साउथ चायना सी’ यह चीन के साम्राज्य का हिस्सा नहीं – अमरिकी विदेशमंत्री की फटकार

वॉशिंग्टन/मनिला – ‘साउथ चायना सीयह अपने समुद्री साम्राज्य का हिस्सा है, इस भ्रम में चीन की हुकूमत ना रहें, ऐसें कड़े शब्दों में अमरिकी विदेशमंत्री ने चीन को फटकार लगाई है। आग्नेय एशियाई देशों ने साउथ चायना सी के मुद्दे पर चीन के विरोध में ड़टकर कड़ी भूमिका अपनाई है और इसका अपने संयुक्त निवेदन में स्पष्ट शब्दों में ज़िक्र भी किया है। अमरीका ने इस निवेदन का स्वागत किया होकर, हम आग्नेय एशियाई देशों के समर्थन में खड़े हैं, यह संदेश भी चीन को दिया है। इसी पृष्ठभूमि पर, फिलिपाईन्स ने साउथ चायना सी में जारी चीन की हरकतों को इसके बाद प्रत्युत्तर मिलेगा, ऐसें संकेत भी दिए हैं।

चीन ने साउथ चायना सी में दिखाई आक्रामकता के विरोध मेंआसियनने दिखाई एकता का अमरीका ने स्वागत किया है। अमरिकी विदेशमंत्री माईक पोम्पिओ ने इसपर प्रतिक्रिया दी है।साउथ चायना सी में हो रहे विवाद का हल आंतर्राष्ट्रीय कानून के आधार से ही निकाला जाएगा, यह आसियन नेताओं ने अपनाई भूमिका स्वागतार्ह है। साउथ चायना सी यह चीन के समुद्री साम्राज्य का हिस्सा नहीं है और इस क्षेत्र में उसकी मनमानी नहीं चलेगी, इसका एहसास भी चीन की हुकूमत को होना ही चाहिये’, इन शब्दों में अमरिकी विदेशमंत्री ने एशियाई देशों की एकता का स्वागत करके चीन को आड़े हाथ लिया है। इस मुद्दे पर अमरीका जल्द ही अपनी भूमिका अधिक विस्तार के साथ रखेगी, यह बात भी विदेशमंत्री पोम्पिओ ने इस समय कही।

कोहेसिव्ह ॲण्ड रिस्पोंसिव्ह आसियनइस नाम के तहत आग्नेय एशियाई देशों की ३६ वीं बैठक शुक्रवार के दिन वियतनाम में हुई। इस बैठक के बाद जारी किए गए संयुक्त निवेदन में, आग्नेय एशियाई देशों ने, साउथ चायना सी में जारी चीन की गतिविधियों को ड़टकर विरोध जताया है। साउथ चायना सी से संबंधित निर्णय आंतर्राष्ट्रीय कानून और नियमों के आधार पर ही होगा, ऐसी स्पष्ट भूमिका आसियन ने अपनाई हैं। इस समुद्री क्षेत्र में उकसानेवाली हरकतें कर रहें एवं लष्करीकरण की कोशिश कर रहें चीन की भी आलोचना की गई है।

पिछले कुछ महीनों से साउथ चायना सी में चीन की गतिविधियाँ और भी आक्रामक हुई हैं। कोरोना की महामारी के पृष्ठभूमि पर इस समुद्री क्षेत्र का हिस्सा होनेवाले छोटे एशियाई देशों पर चीन आक्रामकता दिखाकर लगातार दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। साउथ चायना सी में चीन की हरकतों को प्रत्युत्तर देने के लिए अमरीका आगे बढ़ चुकी है और साउथ चायना सी समेत इंडोपैसिफिक क्षेत्र में व्यापक लष्करी तैनाती करने के लिए आवश्‍यक कदम भी उठाए हैं। अमरीका की व्यापक गतिविधियों के बाद अब साउथ चायना सी में स्थित छोटे एशियाई देशों ने भी चीन के विरोध में आक्रामक भूमिका अपनाना शुरू किया है।

फिलिपाईन्स ने साउथ चायना सी के मुद्दे पर चीन को चुनौती देनेवाली गतिविधियाँ शुरू की हैं। कुछ दिन पहले ही फिलिपाईन्स ने साउथ चायना सी में स्थितपैगासाद्विप पर नया निर्माण कार्य शुरू किया है और अमरीका के साथ किया लष्करी समझौता भी कायम रखने का निर्णय घोषित किया था। इसके बाद अब फिलिपाईन्स के उर्जा एवं विदेश विभाग नेरीड बैंकसमुद्री क्षेत्र में र्इंधन का खनन शुरू करने के लिए पहल की है। इससे संबंधित एक प्रस्ताव भी उन्होंने राष्ट्राध्यक्ष रॉड्रिगो दुअर्ते को दिया है, ऐसा कहा जा रहा है। राष्ट्राध्यक्ष दुअर्ते ने इससे पहले चीन के साथ संयुक्त र्इंधन खनन करने से संबंधित समझौता करने की दिशा में गतिविधियाँ भी शुरू की थीं। इस पृष्ठभूमि पर, फिलिपाईन्स के सरकारी विभागों ने र्इंधन खनन करने से संबंधित इकतरफ़ा प्रस्ताव देना अहमियत रखता है।

वियतनाम में हुई आसियान की बैठक में राष्ट्राध्यक्ष दुअर्ते ने चीन के विरोध में अपनाई भूमिका भी ध्यान आकर्षित करनेवाली साबित हुई है। फिलिपिनी राष्ट्राध्यक्ष ने साउथ चायना सी के मुद्दे पर बोलते समय, सभी देशों को आंतर्राष्ट्रीय नियम और कानून का पालन करना होगा, यह भूमिका रखी। साथ ही आग्नेय एशिया कोरोना की महामारी पर नियंत्रण पाने की कोशिश में जुटा है और तभी साउथ चायना सी में ख़तरें का इशारा देनेवाली घटनाएँ हो रही हैं, यह कहकर दुअर्ते ने चीन को लक्ष्य किया। चीन से मित्रता के संबंध रखने की भाषा कर रहें फिलिपिनी राष्ट्राध्यक्ष के ये बयान, चीन को खुलेआम चुनौती देनेवाले दिख रहे हैं।

आसियानका प्रस्ताव, अमरीका ने किया उसका समर्थन और फिलिपाईन्स से चीन को दी गई चुनौती इन घटनाओं से, आनेवाले समय में साउथ चायना सी के मुद्दे पर चीन को आग्नेय एशियाई देशों पर अपनी मनमानी चलाना संभव नहीं होगा, ऐसें ही संकेत प्राप्त हो रहे हैं।

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