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हाँगकाँग के मुद्दे पर चीन और आंतर्राष्ट्रीय समुदाय के बीच तनाव की स्थिति और बिगड़ी

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हाँगकाँग/वॉशिंग्टन/लंडन – हाँगकाँग कानून पर अमल शुरू करने के मुद्दे को लेकर चीन और आंतर्राष्ट्रीय समुदाय के बीच बनी तनाव की स्थिति और बिगड़ने लगी है। अमरीका और ब्रिटेन ने चीन के विरोध में नई कार्रवाई करने के संकेत दिए होकर, कनाडा ने हाँगकाँग के साथ किया समझौता स्थगित करने का ऐलान किया है। वहीं, चीन ने हाँगकाँग के मुद्दे पर ब्रिटेन ने की कार्रवाई पर नई चेतावनी दी है। चीन की हुकूमत ने हाँगकाँग कानून के तहत होनेवाली कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ाना शुरू किया है और अब सोशल मीडिया और किताबों पर पाबंदी लगाने के संकेत दिए हैं।

चीन के राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग ने पिछले हफ़्ते में, हाँगकाँग के लिए तैयार किए ‘नैशनल सिक्युरिटी लॉ’ पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद बुधवार १ जुलाई से इस कानून पर अमल भी शुरू किया गया। इस कानून के अनुसार, चीन के विरोध में होनेवाली कोई भी हरकत अवैध और राष्ट्रविरोधी करार दी गई है। ऐसी हरकत करने पर उम्रकैद की सज़ा का प्रावधान किया गया है। इस कानून के तहत गिरफ़्तार किए गए हॉंगकॉंग के नागरिकों पर किसी भी स्थानीय कानून के तहत कार्रवाई नहीं होगी। नये कानून के तहत दाखिल होनेवाले मुकदमे गोपनीय पद्धति से चलाने की अनुमति भी संबंधित यंत्रणाओं को प्रदान की गई है।

इसके बाद हाँगकाँग में कई लोगों को नए कानून के तहत हिरासत में लिया गया है, यह जानकारी भी स्थानीय यंत्रणाओं ने साझा की है। हाँगकाँग प्रशासन ने प्रतिदिन नये नियम और प्रावधानों का ऐलान करना शुरू किया है। पिछले वर्ष हाँगकाँग में हुए चीन विरोधी प्रदर्शनों के दौरान ‘लिबरेट हाँगकाँग’ यह नारा बड़ा लोकप्रिय हुआ था। लेकिन, नए कानून के अनुसार यह नारा चीन विरोधी है और यह नारा लगानेवालों पर मुकादमा दायर किया जाएगा, यह ऐलान हुआ है। हाँगकाँग के जनतांत्रिक नेता और कार्यकर्ताओं ने लिखीं हुईं क़िताबें भी स्कूल और स्थानीय ग्रंथालय से गायब की गईं हैं। हाँगकाँग में इंटरनेट पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं और चीन की हुकूमत को आपत्तिजनक प्रतीत होनेवाली जानकारी हटाने का अधिकार पुलिस और संबंधित यंत्रणाओं को प्रदान किया गया है।

हाँगकाँग की इन घटनाओं की अमरिकी विदेशमंत्री माईक पोम्पिओ ने कड़ी आलोचना की है। ‘मुक्त हाँगकाँग को तबाह करनेवाली चीन की कम्युनिस्ट हुकूमत की कार्रवाई तेज़ी से शुरू है। अबतक स्वतंत्र कानून और नियम, अभिव्यक्ति स्वातंत्र्य एवं मुक्त विचारधारा की वज़ह से हाँगकाँग की लगातार तरक्की हो रही थी। लेकिन, इसके आगे यह चित्र नहीं दिखेगा’, इन शब्दों में चीन को तमाचा जड़कर, ‘हाँगकाँग में शुरू हुआ दमनतंत्र जॉर्ज ऑरवेल के उपन्यास में दिखाए गए चित्र की तरह है’, यह आरोप अमरिकी विदेशमंत्री ने किया।

विख्यात उपन्यासकार जॉर्ज ऑरवेल ने ‘१९८४’ इस उपन्यास में, एकाधिकारशाही होनेवाली सत्ताधारी हुकूमत द्वारा अपने नागरिकों पर रखीं गई नज़र और किया गया उनका दमन, इसका वर्णन किया है। हाँगकाँग में जारी कार्रवाईयों के लिए चीन की हुकूमत पर आरोप रखने के साथ ही, विदेशमंत्री पोम्पिओ ने, अमरीका नई कार्रवाई करने की तैयारी में होने का बयान किया है और इसमें चिनी ॲप्स पर प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई का समावेश हो सकता है, यह संकेत भी दिए हैं।

अमरिकी विदेशमंत्री नई कार्रवाई के संकेत दे रहे हैं कि तभी ब्रिटेन ने भी हाँगकाँग के मुद्दे पर चीन के विरोध में आक्रामक कदम उठाने के संकेत दिए हैं। चीन ने हाँगकाँग कानून पर अमल शुरू करने के बाद ब्रिटेन ने तुरंत ही प्रतिक्रिया दर्ज़ करते हुए, हाँगकाँग के नागरिकों को ब्रिटेन की नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया था। इसके साथ ही, अब मानव अधिकारों का उल्लंघन और अन्य मुद्दों पर, चीन एवं हाँगकाँग के अधिकारियों के विरोध में प्रतिबंध लगाने की तैयारी शुरू होने का बयान ब्रिटेन के विदेशमंत्री डॉमिनिक राब ने किया। ब्रिटेन की इन गतिविधियों पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज़ की है।

‘ब्रिटेन ने हाँगकाँग के मुद्दे पर किया बयान काफी गैरज़िम्मेदाराना है। ब्रिटेन की गतिविधियाँ हाँगकाँग के कारोबार में दखलअंदाज़ी है और इसे बर्दाश्‍त नहीं करेंगे। ब्रिटेन को इसके परिणाम भुगतने होंगे’, ऐसी कड़ी चेतावनी चीन के ब्रिटेन में नियुक्त राजदूत लिउ शाओमिंग ने दी है। अमरीका और ब्रिटेन के साथ अब कनाडा ने भी हाँगकाँग के मुद्दे पर कार्रवाई शुरू की है। कनाडा सरकार ने हाँगकाँग को हो रही निर्यात पर प्रतिबंध लगाए हैं और हाँगकाँग प्रशासन के साथ किया हुआ प्रत्यर्पण समझौता स्थगित करने का ऐलान भी किया है। कनाडा की कार्रवाई पर चीन ने प्रतिक्रिया दर्ज़ की है और चीन की हुकूमत ने अपने नागरिकों को, कनाडा की यात्रा करते समय विशेष एहतियात बरतने की सलाह दी है।

चीन ने हाँगकाँग में शुरू की हुई कार्रवाई और उसका समर्थन करते समय विश्‍व के प्रमुख देशों के विरोध में अपनाई भूमिका, इनपर आंतर्राष्ट्रीय समुदाय जोरदार प्रतिक्रिया दर्ज़ करने की संभावना है। आनेवाले समय में इसके गंभीर परिणाम चीन को बर्दाश्‍त करने होंगे, ऐसे संकेत अभी से प्राप्त होने लगे हैं। इस वज़ह से हाँगकाँग के मुद्दे पर आंतर्राष्ट्रीय समुदाय और चीन के बीच शुरू हुआ संघर्ष और भी तीव्र हो सकता है।

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