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चीन को प्रत्युत्तर देने के लिए जापान ने ‘मिसाइल डिफेन्स बेस’ बनाने की दिशा में बढ़ाया कदम

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टोकियो – चीन के साथ उत्तर कोरिया के संभावित हमलों को प्रत्युत्तर देने के लिए ‘इंटिग्रेटेड एअर ऐण्ड मिसाइल डिफेन्स’ की क्षमता से लैस अड्डे का निर्माण करने से संबंधित प्रस्ताव जापान की शासक पार्टी ने पारीत किया है। अगले कुछ दिनों में यह प्रस्ताव जापान के प्रधानमंत्री शिंजो एबे के सामने रखा जाएगा और इसके बाद ‘नैशनल सिक्युरिटी कौन्सिल’ इस प्रस्ताव पर निर्णय करेगी, यह जानकारी सूत्रों ने प्रदान दी। इस प्रस्ताव में लंबी दूरी के मिसाइल तैनात करने का प्रावधान है और इसे मंजूरी मिलने पर यह जापान की रक्षा नीति में बड़ा और निर्णायक बदलाव साबित हो सकता है।

चीन ने बीते कुछ महीनों में साउथ चायना सी समेत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी गतिविधियों में बड़ी बढ़ोतरी की है। पूरे साउथ एवं ईस्ट चाइना सी पर कब्ज़ा करने की वर्चस्ववादी महत्वकांक्षा इसके पीछे है। चीन एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में लगातार अपनी ताकत का आक्रामकता से प्रदर्शन कर रहा है। जापान के निकट ईस्ट चायना सी में चीन की विध्वंसक पनडुब्बियां और गश्‍त पोत जापान की संप्रभुता को चुनौती देने की कोशिश कर रही हैं। मई महीने में चीन ने अपनी ‘लिओनिंग’ नामक विमान वाहक युद्धपोत और ‘स्ट्राईक ग्रुप’ जापान के निकट ईस्ट चायना सी में तैनात की थी। इससे पहले चीन के कुछ लड़ाकू विमानों ने जापान की हवाई सीमा में घुसपैठ करने की कोशिश किए जाने का समाचार भी सामने आया था। जून में जापान के ‘ओशिमा आयलैंड’ के नज़दिक चीन की प्रगत पनडुब्बी की बड़ी खतरनाक मौजूदगी दिखाई पड़ी थी।

चीन के साथ ही उत्तर कोरिया ने भी खतरनाक गतिविधियां तेज़ का दी हैं। उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियारों की संख्या नए से बढ़ाने में जुटा होने की जानकारी जून में सामने आई। यूरोप के ‘सिप्री’ नामक अभ्यासगुट ने यह जानकारी साझा करते समय कहा कि, उत्तर कोरिया ने 10 नए परमाणु हथियारों का निर्माण किया है। नए परमाणु हथियारों के निर्माण के साथ ही उत्तर कोरिया ने नौसेना के कुछ खुफ़िया अड्डों का निर्माण किया होने का दावा भी किया गया था। उत्तर कोरिया के पूर्वी तटवर्ती क्षेत्र में बने अड्डों पर युद्धपोत एवं पनडुब्बियों की तैनाती करने की व्यवस्था होने का दावा किया गया है।

जापान की सुरक्षा के लिए बने खतरों में बढ़ोतरी हो रही है और तभी अमरीका ने भी जापान की लष्करी तैयारी बढ़ाने के लिए पहल की है। जापान की वायुसेना में शामिल ‘एफ-15जे’ लड़ाकू विमानों का आधुनिकीकरण करने से संबंधित समझौता हाल ही में हुआ। इससे पहले अमरीका ने जापान को 100 से भी अधिक प्रगत ‘एफ-35’ विमान प्रदान करने के लिए अनुमति दी है। इसके अलावा जापान में प्रगत मिसाइल और रड़ार यंत्रणा तैनात करने के मुद्दे पर भी बातचीत जारी है। अमरीका से बड़ी मात्रा में सहायता प्राप्त हो रही है और इसी बीच बढ़ रहे खतरों को ध्यान में रखकर जापान ने आक्रामक कदम उठाना शुरू किए हैं। जापान ने अपनी रक्षा नीति में बदलाव किया है और रक्षाखर्च में भी बड़ी बढ़ोतरी की है। नए लड़ाकू विमान, हायपरसोनिक मिसाइल यंत्रणा एवं विध्वंसकों समेत विमान वाहक युद्धपोत का निर्माण करने के संकेत भी जापान ने दिए हैं। इसी बीच पेश किया गया ‘इंटिग्रेटे एअर ऐण्ड मिसाइल डिफेन्स’ की क्षमता से लैस नए अड्डे का निर्माण करने का प्रस्ताव जापान की आक्रामक कोशिशों का हिस्सा होने की बात दिख रही है।

जापान की मौजूदा रक्षा नीति शत्रु देशों के अड्डों पर हमला करने की अनुमति नहीं देती। इससे जापान ने ऐसी क्षमता के रक्षा यंत्रणा की माँग भी अमरीका के सामने नहीं रखी है। लेकिन, चीन और उत्तर कोरिया से बने खतरों का बदलता स्वरूप देखकर जापान ने रक्षा नीति में निर्णायक बदलाव करने के लिए शुरू की हुई तैयारी दिखाई दे रही है। लंबी दूरी के मिसाइलों की डिफेन्स यंत्रणा तैनात करने को जापान ने मंजूरी दी तो इस पर चीन के साथ रशिया भी कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज़ करेगा, यह दावा विश्‍लेषक कर रहे हैं।

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