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हाँगकाँग के मुद्दे पर चीन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा – विश्‍वभर के ३५ शहरों में हुए प्रदर्शन

तैपेई/लंदन – चीन ने हाँगकाँग में शुरू किए दमन एवं अत्याचारों का मुद्दा दुबारा उपर उठा हैं। चीन ने अगस्त महीने में ज़बरन हिरासत में लिए हाँगकाँग के १२ जनतांत्रिक कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी मुहीम शुरू हुई हैं। इस मुहीम के तहत रविवार के दिन अमरीका, यूरोप और एशिया के कम से कम ३५ शहरों में जोरदार प्रदर्शन किए गए। इसीके साथ ब्रिटेन ने हाँगकाँग के नागरिकों को ब्रिटेन की नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू होने का ऐलान किया और इसपर चीन ने तीव्र प्रतिक्रिया दर्ज़ की हैं।

प्रदर्शन, निदर्शने

जुलाई महीने से हाँगकाँग के लिए तैयार किए गए ‘नैशनल सिक्युरिटी लॉ’ का अमल शुरू किया गयाथा। इस कानुन के अनुसार चीन के विरोध में किया गया कोई कृत्य अवैध एवं राष्ट्र विरोधी कहा जाएगा और ऐसा कृत्य करनेवालों को उम्रकैद की सज़ा देने का प्रावधान हैं। इस कानुन के अनुसार गिरफ्तारी होनेवाले हाँगकाँग के नागरिकों के लिए कोई भी स्थानिय कानुन लागू नही होगा और नए कानून के तहत दायर होनेवाले मुकदमों का काम गुप्त पद्धती से चलाने की अनुमति भी संबंधित यंत्रणाओं को दी गई हैं। चीन ने लगाए इस नए कानुन के विरोध में हाँगकाँग समेत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीव्र प्रतिक्रिया प्राप्त हो रही थी। अमरीका के साथ यूरोपिय देशों ने आर्थिक एवं राजनीतिक स्तर पर चीन को लक्ष्य किया हैं और संयुक्त राष्ट्रसंघ में भी यह मुद्दा उठाया गया था।

इसी पृष्ठभूमि पर चीन ने नए कानून के तहत गिरफ्तार किए १२ जनतांत्रिक कार्यकर्ताओं का मामला सामने आया हैं। चीन ने ज़बरन कानून लागू करने के बाद हाँगकाँग के सैकड़ों नागरिक इस क्षेत्र से हमेशा के लिए बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसी की कोशिश में तैवान जा रहें १२ लोगों को चीन ने ज़बरन हिरासत में लिया था। उन्हें सीधे चीन में स्थित जेलों में बंद किया गया हैं और उनपर हिंसा और अलगाववाद के आरोप रखें गए हैं। इन १२ लोगों को किसी भी प्रकार से कानुनन सुविधा उपलब्ध नही कराई गई हैं और उन्हें परिवार से भी मिलने नही दिया गया हैं। हाँगकाँग के एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के गुटों ने चीन की इस एकतरफा कार्रवाई का मुद्दा उठाया हैं और इन १२ लोगों की रिहाई की माँग की हैं।

प्रदर्शन, निदर्शने

इसी माँग के लिए रविवार के दिन विश्‍वभर के ३५ शहरों में प्रदर्शन किए गए। इनमें अमरीका, कनाड़ा, ब्रिटेन, होलैण्ड, स्वीड़न, जापान, दक्षिण कोरिया एवं तैवान के प्रमुख शहरों का समावेश हैं। इस दौरान ‘सेव्ह १२’, ‘हाँगकाँग इंडिपेंडन्स’ के ‘पोस्टर’ पकड़कर चीन के विरोध में नारे भी दिए गए। तैवान में इन प्रदर्शनों को सबसे अधिक समर्थन प्राप्त हुआ और इन प्रदर्शनों में तीन हज़ार से भी अधिक लोग शामिल होने की जानकारी सूत्रों ने प्रदान की। अलग अलग अंतरराष्ट्रीय गुट एवं कार्यकर्ताओं ने भी यह मुद्दा उठाया हैं और ऑनलाईन मुहीम भी शुरू हुई हैं।

प्रदर्शन, निदर्शने

इसी बीच हाँगकाँ के कानुन के मुद्दे पर यूरोपिय देश अधिक आक्रामक होने की बात सामने आ रही हैं। बीते सप्ताह में जर्मनी ने हाँगकाँग के जनतांत्रिक प्रदर्शनों में शामिल हुए एक युवती को राजनीतिक पनाह देने की बात सार्वजनिक हुई। चीन ने इस पर जोरदार आलोचना करने के बाद भी जर्मनी ने इस मुद्दे पर पीछे हटने से इन्कार किया और अपने निर्णय का जोरदार समर्थन भी किया। इसी बीच फिनलैण्ड ने हाँगकाँग के साथ किया प्रत्यर्पण का समझौता रद करने का ऐलान किया हैं।

हाँगकाँग में चीन के कानुन के विरोध में सबसे आक्रामक भूमिका अपनानवाले ब्रिटेन ने हाँगकाँग के निवासियों के लिए नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू होने का ऐलन किया। इससे संबंधित अधिकृत निवेदन जारी किया गया हैं और नागरिकता के लिए अर्जी दाखिल करनेवालों की संख्या पर मर्यादा ना होने की बात भी स्पष्ट की हैं। ब्रिटेन की इस कृति पर चीन ने तीव्र प्रतिक्रिया दर्ज की हैं और ब्रिटेन को इसकी किमत चुकानी पड़ेगी, यह इशारा भी चीन के विदेश विभाग ने दिया हैं।

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