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स्वीडन की जनता युद्ध के लिए तैयार रहे – स्वीडिश सरकार की जनता को चेतावनी

स्वीडनस्टॉकहोम – ‘स्वीडन दुनिया के अन्य देशों की तुलना में सुरक्षित है, लेकिन वर्तमान में स्वीडन की सुरक्षा का खतरा बढ़ गया है। अपने देश के हर एक को इस खतरे का एहसास होना चाहिए’, इन शब्दों में स्वीडन की सरकार ने देश की जनता को युद्ध के साथ साथ अन्य किसी भी आपत्ति के लिए सज्ज रहने की चेतावनी दी है। इसके लिए स्वीडन सरकार ने एक पुस्तिका प्रकाशित की है। २० पन्नों की इस पुस्तिका में स्वीडिश जनता युद्ध, साइबर हमले, आतंकवादी हमले और बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के लिए तैयारी शुरू करे, ऐसी सूचना की गई है। सन १९६०-७० के दशक के शीतयुद्ध के बाद स्वीडन ने पहली बार पुस्तक प्रकाशित करके जनता को तैयार रहने का इशारा दिया है।

सोमवार की स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में हुई एक पत्रकार परिषद में ‘सिविल कॉंटिजन्सीज एजन्सी’ ने ‘इफ क्राइसिस ऑर वॉर कम्स’ नाम की पुस्तिका प्रकाशित करने की जानकारी दी है। २० पन्नों की यह पुस्तिका १३ भाषाओं में प्रसिद्ध की गई है।

युद्ध हुआ तो लोग कहाँ और कैसे आसरा लें, अनाज का भण्डारण कैसे करें और कहाँ से आने वाली जानकारी पर विश्वास रखें जैसी सूचनाएं इसमें दी गई हैं। अगले हफ्ते से स्वीडन के हर नागरिक को यह पुस्तिका उपलब्ध होने वाली है, ऐसी जानकारी ‘सिविल कॉंटिजन्सीज एजन्सी’ के प्रमुख डॅडन एलिअसन ने दी है। स्वीडन पर शत्रु देश से हमला हुआ, तो उसके आगे स्वीडन कभी भी हार मानने वाला नहीं है, ऐसा स्पष्ट उल्लेख इस पुस्तिका में किया गया है।

स्वीडन‘स्वीडन के पास युद्ध शुरू हुआ तो इस देश को भू उसके परिणाम सेहन करने पड़ेंगे। अनाज और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आयात पर असर हो सकता है’, इन शब्दों में ‘सिविल कॉंटिजन्सीज एजन्सी’ की वरिष्ठ अधिकारी क्रिस्तीना एंडरसन ने यह पुस्तिका प्रकाशित करने की वजह स्पष्ट करने की कोशिश की है। इसके पहले स्वीडन ने शीतयुद्ध के समय में सन १९६१ को इस तरह की पुस्तिका प्रकाशित की थी।

शीतयुद्ध के बाद अपनी रक्षा लगत में बड़ी कटौती करने वाले स्वीडन ने सन २०१४ में रशिया ने क्रीमिया में किए आक्रमण के बाद अपनी नीति में बड़े बदलाव शुरू किए। स्वीडन के समुद्री क्षेत्र के पास अज्ञात पनडुब्बियां दिखाई देने के बाद स्वीडन ने रक्षा सज्जता पर ध्यान केन्द्रित किया। पिछले वर्ष स्वीडन ने नागरिकों के लिए जबरदस्ती लष्करी सेवा फिर एक बार शुरू करने की घोषणा की। उसके बाद बाल्टिक समुद्र में स्थित गॉटलँड का लष्करी अड्डा भी सक्रिय करने का फैसला भी किया है।

पिछले वर्ष दिसंबर महीने में स्वीडन की सरकार ने रक्षा योग के मार्गदर्शन में स्वतंत्र रिपोर्ट बनाई है और उसमें लष्कर के आधुनिकीकरण के लिए हर साल ४० करोड़ डॉलर्स के निधि का प्रावधान किया जाए, ऐसी सिफारिश की गई है। स्वीडन नाटो का सदस्य देश नहीं है, लेकिन नाटो के ‘पार्टनरशिप फॉर पीस’ इस उपक्रम के अंतर्गत नाटो सदस्य देशों के साथ स्वीडन ने लष्करी सहकार्य बरक़रार रखा है।

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