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चीन के महत्त्वाकांक्षी परियोजना को मलेशिया के नये शासन का झटका

चिनी परियोजनाओं पर पुनर्विचार का महाथिर सरकार का फैसला

महाथिर मोहम्मदकौलालंपूर/बीजिंग – चीन के महत्त्वाकांक्षी ‘वन बेल्ट, वन रोड’(ओबीओआर) परियोजना को दक्षिण-पूर्वी एशिया से नयी चुनौती खडी हुई है| मलेशिया के नये प्रधानमंत्री ‘महाथिर मोहम्मद’ ने, देश में चीन के सहयोग से शुरु हो गये महत्त्वाकांक्षी परियोजनाओं पर पुनर्विचार करने का फैसला लिया है| साथ ही में प्रधानमंत्री पद के सूत्र हाथ लेने के बाद पहले विदेश दौरे में जापान को भेंट देते हुए, चीन की जगह जापान ले सकता है, ऐसे स्पष्ट संकेत दिये है| इससे दक्षिण-पूर्वी देशों में प्रभुत्त्व मिलाने की चीन की कोशिशों को जबरा झटका लगा, ऐसे दिखाई पड रहा है|

मे महीने में मलेशिया में हुए चुनाव में तत्कालिन प्रधानमंत्री नजिब रझाक को हराते हुए महाथिर मोहम्मद ने जबरदस्त खलबली मचा दी थी| मोहम्मद की जीत से रझाक से नजदिकीयां बनानेवाले चीन को बडा झटका लगा था| रझाक के समय में मलेशिया ने चीन के महत्त्वाकांक्षी ‘ओबीओआर’ योजना में सहभागी होते हुए अनेक परियोजनाओं पर हस्ताक्षर किये थे| उस में ‘कौलालंपूर-सिंगापूर हाय स्पीड रेल लिंक’, ‘ईस्ट कोस्ट रेल लिंक’, ‘मलाक्का डीप सी पोर्ट’ और ‘इंडस्ट्रिअल पार्क’ शामिल है|

इस में से १४ अबर डॉलर्स के ‘ईस्ट कोस्ट रेल लिंक’ का काम शुरु हो चुका है| ‘कौलालंपूर-सिंगापूर हाय स्पीड रेल लिंक’ के लिए चिनी कंपनिओं को प्राधान्य दिया गया है| मलाक्का और औद्योगिक वसाहत खडी करने के लिए चीन की आर्थिक सहायता ली जा रही है| यह सब परियोजनांए चीन के ‘ओबीओआर’ में शामिल है, ऐसा कहा जाता है| पिछले दशक भर के समय में चीन द्वारा मलेशिया में सीधे निवेश का प्रमाण बढाया गया है| देश के निवेश में चीन का हिस्सा करीबन १५ प्रतिशत है, ऐसा माना जाता है|महाथिर मोहम्मद

पर प्रधानमंत्री पर की जिम्मेदारी स्वीकारने के बाद महाथिर मोहम्मद ने ‘कौलालंपूर-सिंगापूर हाय स्पीड रेल लिंक’ पर रोक लगाने का ऐलान किया| देश के उपर रहे कर्जे का बोझ कम करने के लिए यह फैसला लिया जा रहा है, ऐसा खुलासा उन्होंने दिया| उसके बाद ‘ईस्ट कोस्ट रेल लिंक’ के बारे में हुए समझौते के लिए फिर से बातचीत की जायेगी, ऐसा भी प्रधानमंत्री द्वारा बताया गया है| चीन की अगुआई से जुडे अन्य समझौते के बारे में पक्का फैसला नही हुआ है| मगर उसमें से कई परियोजना बंद किये जाने की संभावना टाली नही जा सकती, ऐसे संकेत सूत्रों ने दिए है|

मलेशिया के नये प्रधानमंत्री द्वारा लिए गये फैसलों पर चीन ने अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नही दी है| पर चीन सरकार का मुखपत्र रहें प्रसारमाध्यमों द्वारा मलेशिया को धमकाना शुरु हुआ है| चिनी कंपनिओं के हितसंबंधों को अगर धोखा पहुँचता है, तो उस नुकसान की किंमत मॉंगी जा सकती है, ऐसी चेतावनी दी गयी है| मलेशिया में चीन की परियोजनाओं को धक्का देनेवाले प्रधानमंत्री महाथिर ने उसकी जगह जापान ले सकता है, ऐसे संकेत दिये है| इससे दक्षिण-पूर्वी एशिया में नये समीकरण देखने को मिल सकते है, ऐसा माना जाता है|

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