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चीन की आक्रमकता को रोकने के लिए ऑस्ट्रेलिल्या एवं न्यूझीलंड पॅसिफिक देशों के साथ सुरक्षा करार करेंगे।

कॅनबेरा / ऑकलंड – चीन की ओर से पॅसिफिक महासागर क्षेत्र में वर्चस्व स्थापित करने हेतु चल रही आक्रमक गतिविधियों को रोकने के लिए ‘ऑस्ट्रेलिया’ एवं ‘न्यूझीलंड’ ने पॅसिफिक क्षेत्र के देशों के साथ नया सुरक्षा करार करने का फैसला किया है। इस संदर्भ से संबंधित लेखा-जोखा तैयार हो चुका है तथा सितंबर महीने में नाऊरु में होनेवाले ‘पॅसिफिक आयलंडस्‌ फोरम’ में १८ देश इस करार पर हस्ताक्षर करेंगे। पॅसिफिक क्षेत्र के देशों के साथ सुरक्षा सहकार्य मजबूत करना यह इस करार का मुख्य उद्देश्य होगा ऐसा संकेत सूत्रों के आधार पर दिया गया है।

पिछले कुछ वर्षों में चीन ने ‘साऊथ चायना सी’ एवं ‘ईस्ट चायना सी’ के साथ ही पॅसिफिक महासागर में अपना प्रभावक्षेत्र तैयार करने के लिए जोरदार गतिविधियाँ शुरु कर दी हैं। अमरीका एवं ऑस्ट्रेलिया इन दोनों प्रमुख देशों ने इस बात पर दखलअंदाजी करते हुए चीन को रोकने के लिए अपना कार्य शुरु कर दिया था। अमरीका ने पॅसिफिक महासागर में अपनी लश्करी गतिविधियाँ बढ़ाते हुए आरमारी गस्त पर भी जोर दिया है।

ऑस्ट्रेलिया ने अपनी अब तक की नीति बदलकर ‘इंडो-पॅसिफिक क्षेत्र’ की ओर अपना ध्यान केन्द्रीत करना शुरु कर दिया है। ऐसा पिछले कुछ महीनों से नज़र आ रहा है। मई महीने में प्रस्तुत किए गए बजट में पॅसिफिक क्षेत्रों के देशों में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए न्यूझीलंड ने लगभग ५० करोड़ डॉलर्स के अतिरिक्त आर्थिक सहायता की व्यवस्था की। यह व्यवस्था न्यूझीलंड के ‘पॅसिफिक रिसेट’ नीति का ही हिस्सा है ऐसा कहा गया है। इसके साथ ही न्यूझीलंड ने ‘स्ट्रॅटेजिक डिफेन्स पॉलिसी स्टेटमेंट’ भी प्रसिद्ध किया है।

इसके अन्तर्गत चीन के धोखे का खुलेआम उल्लेख किया गया है। चीन की अपनी प्रादेशिक महत्त्वकांक्षायें पॅसिफिक क्षेत्र के पारंपारिक नेतृत्त्व एवं मूल्यों को चुनौती दे रहा है ऐसी चिंता न्यूझीलंड ने व्यक्त की। एशिया-पॅसिफिक में सुरक्षा के प्रति बढ़ती हुई चुनौती के कारण इसका काफी परिणाम देश की परिस्थिती पर होगा, ऐसा इशारा भी ‘स्ट्रेटेजिक डिफेन्स पॉलिसी स्टेटमेंट’ में दिया गया है। न्यूझीलंड की राष्ट्रीय सुरक्षा सीधे पॅसिफिक क्षेत्रों से जुड़ी होने के साथ-साथ आनेवाले समय में क्षेत्रों में अपना प्रभाव जमाये रखना ‘ऑस्ट्रेलिया’ एवं ‘न्यूझीलंड’ दोनों के लिए मुश्किल होगा, ऐसी भविष्यवाणी की गई है।

इस पार्श्वभूमि पर, ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूझीलंड द्वारा एक साथ मिलकर पॅसिफिक देशों के साथ नये सुरक्षा करार का संकेत देना काफी महत्त्व रखता है। ऑस्ट्रेलिया के ‘इंटरनॅशनल डेव्हलपमेंट’ विभाग के मंत्री ‘कॉन्सेटा फिरॅव्हॅन्टी-वेल्स’ द्वारा नया करार सुरक्षा सहकार्य को अधिक मजबूत बनाने के लिए किया गया है इस बात को स्पष्ट किया। पॅसिफिक क्षेत्र के नये धोखों का मुकाबला करेन के लिए यह नया करार एक आवश्यक चौकट तैयार करेगा, ऐसा विश्वास भी ऑस्ट्रेलियन मंत्रियों द्वारा व्यक्त किया गया।

पॅसिफिक देशों के साथ किए गए करार पर हस्ताक्षर करने से पूर्व ऑस्ट्रेलिया ने स्वतंत्र रूप में इन देशों के साथ सहकार्य अधिक दृढ करने के लिए अपने कदम तेज़ी से उठाने शुरु कर दिए हैं। पिछले महीने में ही ऑस्ट्रेलिया ने ‘वनौटू’ नामक इस देश के साथ सुरक्षा करने की घोषणा की है। इसके साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया ‘सॉलोमन आयलंड’ एवं ‘पापुआ न्यू गिनी’ इन देशों के साथ जु़ड़नेवाले ‘कम्युनिकेशन नेटवर्क केबल’ प्रकल्प के लिए ऑस्ट्रेलिया अर्थसहायता भी देनेवाला है।

‘साऊथ चायना सी’ में कृत्रिम बंदरगाहों पर सुरक्षा स्थल का निर्माण कर अपना वर्चस्व स्थापित करने का दावा करनेवाले चीन के पॅसिफिक क्षेत्रों के देशों में आर्थिक सहायता एवं अन्य मार्गों से भी अपना वर्चस्व स्थापित करने की कोशिशें शुरु कर दी हैं। चीनद्वारा पॅसिफिक क्षेत्रों के आठ ‘आयलंड नेशन्स’ को लगभग दो अरब डॉलर्स की आर्थिक सहायता के रूप में कर्ज़ देने की जानकारी भी दो महीने पूर्व सामने आई थी। इससे पूर्व, ‘वनौटू’ नामक इस पॅसिफिक महासागर से संबंधित देशों में लश्करी अड्डा (लश्करी छावणी) निर्माण करने की कोशिश शुरु कर देने का दावा ऑस्ट्रेलिया के गुप्तचर यंत्रणाओं ने किया था। इसके पश्चात्‌ कुछ दिन पूर्व चीन पापुआ न्यू गिनी में आर्थिक सहायता के बलबूते पर हस्तक्षेप कर रहा है ऐसी जानकारी भी सामने आई थी।

इस पार्श्वभूमि पर ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूझीलंड सहित १८ देशों में होनेवाला करार चीन की महत्त्वाकांक्षाओं को रोकने के लिए एक महत्त्वपूर्ण निर्णय साबित होगा, ऐसे संकेत मिल रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के अलावा भारत, फ्रान्स एवं जापान इन देशों ने भी पॅसिफिक क्षेत्र में चीन के वर्चस्व का मुकाबला करने की तैयारी कर रखी है ऐसी जानकारी मिली है।

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