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किलर रोबोट पर बंदी लाने में अमरिका, रशिया, इस्राइल का विरोध

जिनिव्हा – कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं रोबोटिक्स की सहायता से विकसित किए किलर रोबोट्स यह युद्ध क्षेत्र में तीसरे क्रांति के संकेत होकर, उनके द्वारा युद्ध होने पर मानवीय समाज उनको जवाब नहीं दे सकता, ऐसी गंभीर चेतावनी पिछले वर्ष दी जा रही थी। इन किलर रोबोट पर बंदी लाने के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ ने पहल की थी। पर अमरिका, रशिया, इस्राइल के साथ प्रमुख देशों ने इस बंदी का विरोध करने की बात उजागर हो रही है।

‘किलर रोबोटस्’, बंदी, मेरी वेरहॅम, artificial intelligence, Robotics, चर्चा, ww3, जीनिव्हा, रशियासंयुक्त राष्ट्रसंघ की हालही में जिनिव्हा में महत्वपूर्ण बैठक हुई है। ‘कैंपेन टू स्टॉप किलर रोबोट्स’ इस गट के पहल से होनेवाली इस बैठक में किलर रोबोट पर बंदी के मुद्दे पर जोरदार बहस हुई है। बैठक के दौरान १० मार्गदर्शक तत्वों को मंजूरी दी गई है। फिर भी उसे पूर्ण रुप से बंधनकारक करने की मांग ठुकराई गई है। यह बंदी ठुकराने के पीछे अमरिका, रशिया, इस्राइल, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया का समभाग होने की बात उजागर हुई है।

‘कैंपेन टू स्टॉप किलर रोबोट्स’ के समन्वयक मेरी वेरहैम ने बैठक के दौरान अग्रणी के देशों ने लिए भूमिका पर तीव्र नाराजगी व्यक्त की है। किलर रोबोट पर बंदी के बारे में स्पष्ट भूमिका एवं नियमों की आवश्यकता होने के समय बंधनकारक ना होनेवाले मुद्दों का समावेश निरर्थक होने का दावा उन्होंने किया है। अमरिका, रशिया, इस्राइल दक्षिण कोरिया एवं ऑस्ट्रेलिया इन देशों ने ‘लीथल ऑटोनॉमस वेपन सिस्टम’ के संभाव्य फायदों का अभ्यास करने की आवश्यकता होने का मत उस समय व्यक्त करने की जानकारी बैठक में उपस्थित होने वाले सूत्रों ने दी है।

‘किलर रोबोटस्’, बंदी, मेरी वेरहॅम, artificial intelligence, Robotics, चर्चा, ww3, जीनिव्हा, रशियासंयुक्त राष्ट्रसंघने ‘लीथल ऑटोनॉमस वेपन सिस्टम’ इस विषय पर ग्रुप ऑफ गवर्नमेंटल एक्सपर्ट्स की स्थापना की है और पिछले वर्ष इस गट की प्राथमिक बैठक संपन्न हुई थी। उसके बाद पिछले कई महीनों में किलर रोबोट के मुद्दे पर अधिकतम देशों का एकमत होने का दावा भी सामने आ रहा था। पर जिनिव्हा के इस बैठक में अग्रणी के देशों ने किया विरोध खतरनाक माना जा रहा है। अब नवंबर महीने में होने वाली बैठक में किलर रोबोट के संदर्भ में करार पर चर्चा होने के संकेत दिए जा रहे हैं।

पिछले वर्ष में शस्त्रास्त्र के विकास तथा निर्माण में रोबोटिक्स एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग बढ़ने की बात सामने आ रही है। दुनियाभर में शस्त्र निर्माण तथा निर्यात में अग्रणी होने वाले देश एवं कंपनियों ने इस पर जोर देना शुरू किया है और अन्य देशों की ऐसी यंत्रणा की खरीदारी की शुरुआत की जा रही है।

स्वयंचलित शस्त्रास्त्र एवं यंत्रणा यह आतंकवाद फैलानेवाले घातक शस्त्र ठहर सकते हैं और उसका उपयोग हुकुमशाह तथा आतंकवादी संगठनों से निष्पाप जनता के विरोध में किया जा सकता है। ऐसे यंत्रणा पर साइबर हमले करके उन्हें हैक करके उसका गैर इस्तेमाल किया जाने की आशंका है, ऐसी चेतावनी पिछले वर्ष संयुक्त राष्ट्रसंघ में लिखे एक खुले पत्र में दी गई थी।

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