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वर्ष २०२४ ‘जॉर्ज ऑर्वेल’ इनके ‘१९८४’ जैसा ना हो यह ध्यान रखना होगा – मायक्रोसॉफ्ट के प्रेसिडेंट ‘ब्रॅड स्मिथ’ की चेतावनी

वॉशिंगटन – ‘फेशिअल रेगग्निशन’ तकनीक मानव समाज की बुनियादी स्वतंत्रता खतरे में लाने वाली साबित हो सकती है। इस तकनीक का इस्तेमाल करके बडे पैमाने पर सामूहिक तरीके से नजर रखना शुरू हो सकता है। यह होगा ही नही, ऐसा कोई भी कह नही सकता। हम सभी लोगों को एक हो कर २०२४ यह वर्ष जॉर्ज ऑर्वेल इनकी १९८४ इस उपन्यास का पन्ना साबित नही होगा, यह ध्यान रखना होगा, इन शब्दों में मायक्रोसॉफ्ट के प्रेसिडेंट ब्रॅड स्मिथ इन्होंने ‘फेशिअल रेकग्निशन’ तकनीक को लेकर खतरे की चेतावनी दी है।

प्रसिद्ध ब्रिटीश साहित्य लेखक जॉर्ज ऑर्वेल इनका ‘१९८४’ यह उपन्यास १९४९ में प्रकाशित हुआ था। इस उपन्यास में १९८४ की घटना का कथानक प्रस्तुत किया था। विश्‍व की अधिकांश जनता को लगातार युद्ध का सामना करना पड रहा है और तानाशाही सल्तनत झुटी जानकारी फैलाकर और सामूहिक तरीके से लोगों पर नजर रखकर जनता को नियंत्रित कर रही है, यह इस उपन्यास की कथा का सूत्र था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बतौर ‘क्लासिक’ पहचाने जा रहे इस उपन्यास में लिखे ‘बिग ब्रदर’, ‘२+२=५’ ऐसी संकल्पना विश्‍वभर में प्रसिद्ध है।

माहिती तंत्रज्ञान क्षेत्र में विश्‍व की चोटी की कंपनी के तौर पर जानी जा रही मायक्रोसॉफ्ट के प्रेसिडेंट की ओर से इस उपन्यास का संदर्भ देना ध्यान आकर्षित करता है। प्रेसिडेंट ब्रॅड स्मिथ इन्होंने पिछले हफ्तें कंपनी की ब्लॉग पर लिखे एक लेख में ‘फेशिअल रेकग्निशन’ इस तकनीक से बढते खतरों का जिक्र किया है। इस दौरान उन्होंने जॉर्ज ऑर्वेल की उपन्यास का दो बार संदर्भ दिया है।

‘‘देश के हर हिस्से में लगे कैमरा, कॉम्प्युटरर्स की बडी क्षमता और क्लाऊड स्टोरेज के इस्तेमाल की बल पर शासन कर रही हुकूमत ‘फेशिअल रेकग्निशन’ के जरीये कुछ नागरिकों पर कायम नजर रख सकती है। इस इस्तेमाल से किसी का भी कहा भी या सभी का हर जगह पीछा करना मुमकिन हो सकता है। यह कभी भी, किसी भी क्षण या तो लगातार हो सकता है। ‘फेशिअल रेकग्निशन’ तकनीक से पहले कभी ना हुआ हो ऐसे बडे पैमाने में सामूहिक तरीके से नजर रखना शुरू हो सकता है’’, इन शब्दों में ब्रॅड स्मिथ इन्होंने सरकार द्वारा गलत कारणों के लिए तकनीक का उपयोग होने का खतरा सामने रखा है।

मायक्रोसॉफ्टचे प्रेसिडंट, धोक्याचा इशारा, ब्रॅड स्मिथ, जॉर्ज ऑर्वेल, Facial Recognition, technology, टेहळणी, वॉशिंग्टन, ww3यह खतरा स्पष्ट करके उन्होंने जॉर्ज ऑर्वेल इनकी ‘१९८४’ इस उपन्यास का जिक्र किया है। सरकार के नजर से बचने के लिए लोगों को एक अंधेरे कमरे में एक दुसरे के हाथों की सहायता से संदेश देना मुमकिन हो ऐसे माध्यम का उपयोग करना होगा, ऐसा वर्णन ‘१९८४’ में किया गया है। ऑर्वेल ने ७० साल पहले यह डर जताया था। आज तकनीक की वजह से ऑर्वेल ने जताया डर वास्तव में आ सकता है, यह मायक्रोसॉफ्ट के प्रेसिडेंट ने कहा है।

इस से बचना होगा तो तकनीकी क्षेत्र की शीर्ष कंपनीयों ने एक होकर सरकार को ‘फेशिअल रेकग्निशन’ का इस्तेमाल करने के विषय में कडा कानून बनान के लिए दबाव बनाना होगा, ऐसी दर्ख्वास्त भी स्मिथ इन्होंने की है।

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