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आर्टिफिशल इंटेलिजन्स’ और ‘रोबोटिक्स’ की वजह से ब्रिटेन में ९० लक्ष नौकरियों को खतरा-सरकारी रपट में दर्ज इशारा

लंडन – ‘आर्टिफिशल इंटेलिजन्स’ यानी ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ क्षेत्र की प्रगती और उसके बढते इस्तेमाल से ब्रिटेन में लगभग ९० लक्ष लोग नौकरियां गंवाने का खतरा बना है, यह चेतावनी सरकारी रपट में दी गई है। ब्रिटेन के ‘डिपार्टमेंट फॉर वर्क ऍण्ड पेन्शन्स’ ने इस बारे में रपट तैयार की है और उत्पाद, सहायक सेवा एवं रिटेल क्षेत्र को इससे सबसे ज्यादा झटका लगने की चेतावनी दी है। पिछले वर्ष ‘वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम’ इस अंतरराष्ट्रीय गुट ने ‘आर्टिफिशल इंटेलिजन्स’ और ‘रोबोटिक्स’ की वजह से मानवी समुदाय को अगले चार वर्षों में ठिक साढेसात करोड नौकरीयां गंवानी होगी, यह डर व्यक्त किया था।

‘आर्टिफिशल इंटेलिजन्स’ में हो रही तरक्की की वजह से ‘ऑटोमोशन’ तकनीक का इस्तेमाल बढेगा औड़ ‘रोबोटस्’ का खर्च श्रमशक्ति से भी कम रहेगा। इस वजह से फिलहाल लोगों के लिए उपलब्ध रहे कई अवसर की जगह ‘रोबोटस्’ का इस्तेमाल हो सकता है, यह ब्रिटीश सरकार की रपट में डटकर कहा गया है। सिर्फ ब्रिटेन में अगले दशक में श्रमशक्ति का इस्तेमाल कर रहे ८८ लक्ष से अधिक पद या अवसर नष्ट हुई होंगी, यह चिंता भी इस रपट में जताई गई है।

इतनी बडी तादात में रोजगार के अवसर नष्ट होने की संभावना ध्यान में रखकर ब्रिटेन ने इस के लिए जरूरी प्रावधान करने की योजना हाथ में ली है, यह जानकारी रोजगार मंत्री आलोक शर्मा इन्होंने दी। ‘आर्टिफिशल इंटेलिजन्स’ और ‘ऑटोमेशन’ का इस्तेमाल ज्यादा मात्रा में होगा नही, ऐसे नौकरियों का निर्माण करने पर फिलहाल जोर दिया जा रहा है, यह शर्मा इन्होंने कहा। कंपनीयां उत्पाद क्षमता बढाने के लिए तकनीक का बढता इस्तेमाल कर रही है, फिर भी नई कुशलता से निपुण श्रमशक्ति के लिए भी अवसर उपलब्ध हो रहे है, यह दावा भी उन्होंने किया।

हर एक औद्योगिक क्रांती से अर्थव्यवस्था ने खोई हुई नौकरियों से उपलब्ध हुए रोजगार के अवसर की मात्रा अधिक है, यह गवाही देकर रोजगार मंत्री शर्मा इन्होंने ‘आर्टिफिशल इंटेलिजन्स’ संबंधी बना डर दूर करने की कोशिश की। साथ ही फिलहाल कार्यरत श्रमशक्ति को नए तकनीक से जुडी कुशलता का प्रशिक्षण देकर नौकरीया सुरक्षित रखने के लिए निवेश किया जा रहा है, यह भी स्पष्ट किया।

पिछले कुछ वर्षों में ‘आर्टिफिशल इंटेलिजन्स’ और ‘रोबोटिक्स’ का इस्तेमाल तेजी से बढ रहा है और औद्योगिक क्षेत्र में प्रगत माने जा रहे युरोपीय देशों के साथ अमरिका, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे देशों में यह मुद्दा गंभीरता से सामने आया है। ‘वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम’ के ‘फ्युचर ऑफ जॉब्स २०१८’ इस रपट में २०२२ तक औसत से ४२ प्रतिशत नौकरियां रोबो या ‘आर्टिफिशल इंटेलिजन्स’ पर निर्भर तकनीक पर आधारित होगी, यह स्पष्ट संकेत दिया गया है।

इसी रपट में, फिलहाल उपलब्ध कायम नौकरियों में ५० प्रतिशत की गिरावट होने की चेतावनी देकर इसका सबसे अधिक झटका मध्यमवर्ग को लगेगा, ऐसी चेतावनी भी दी गई थी। नामी उद्योजक ‘एलॉन मस्क’ इन्होंने विश्‍व भर में कार्यरत श्रमशक्ति में से १५ प्रतिशत रोजगार के अवसर अतिप्रगत रोबोट छिनेंगे, यह इशारा दिया था।

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