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रशिया के ‘स्ट्रैटेजिक न्यूक्लीअर वॉरगेम्स’ की पृष्ठभूमि पर नाटो ने भी जर्मनी में किया परमाणु युद्ध का अभ्यास

बीजिंग – पिछले हफ्ते में रशिया ने ‘स्ट्रैटेजिक न्यूक्लीअर वॉरगेम्स’ का आयोजन करने के बाद नाटो ने भी परमाणु युद्ध का अभ्यास किया है| जर्मन वृत्तसंस्था और प्रसारमाध्यमों ने नाटो के इस युद्धाभ्यास संबंधित वृत्त प्रसिद्ध किया है और इस वृत्त का अभी नाटो या अन्य किसी भी यूरोपिय देशों ने समर्थन नही किया है| पर, जर्मन वृत्तसंस्था ने दिए समाचार में जर्मनी और नेदरलैंड इन दो देशों समेत अमरिका भी इश युद्ध अभ्यास में शामिल थी, यह कहा है|

‘स्टेडफास्ट नून’ नाम से किए गए इस युद्ध अभ्यास में अमरिका समेत जर्मनी एवं नेदरलैंड के लडाकू विमान शामिल हुए थे| इस अभ्यास से कुछ दिन पहले अमरिका के ‘बी-५२ बॉम्बर्स’ यूरोप पहुंचे थे| जर्मनी ने अपनी वायुसेना के ‘टॉर्नेडो’ लडाकू विमानों का इस युद्धाभ्यास के लिए इस्तेमाल किया था, यह दावा भी जर्मन वृत्तसंस्था ने किया है| इस युद्धाभ्यास के लिए जर्मनी के ‘बुकेल एअरबेस’ और नेदरलैंड के ‘वोल्केल एअरबेस’ का इस्तेमाल किया गया|

यूरोप के इन दोनों हवाई अड्डों पर अमरिका के परमाणु हथियार तैनात होने की बात कही जा रही है| कुछ महीनों पहले यूरोप के एक समाचार पत्र ने यूरोप में बने अमरिकी ‘एटमी ठिकानों’ की जानकारी प्रसिद्ध की थी| इसमें जर्मनी और नेदरलैंड के इन दोनों अड्डों का नाम भी शामिल है| इस युद्धाभ्यास के दौरान अमरिका एवं जर्मनी के विमानों ने अमरिका का ‘बी-६१’ परमाणु बम तैनात करके आगे की कार्रवाई का अभ्यास किया, यह जानकारी जर्मन प्रसारमाध्यम ने अपने वृत्त में दर्ज की है|

दो महीनों पहले अमरिका और रशिया यह दोनों देश ‘आईएनएफ’ इस परमाणु हथियारों से संबंधित समझौते से पीछे हटें थे| इसके बाद नाटो ने रशिया को परमाणु समझौते का प्रस्ताव दिया था| पर, नाटो का प्रस्ताव रशियाने ठुकराया था| यह प्रस्ताव ठुकराते समय रशिया ने अमरिका की परमाणु तैयारी एवं यूरोप में हुई एटमीं हथियारों की तैनाती के मुद्दे उपस्थित किए थे| इस पृष्ठभूमि पर रशिया और अब नाटोने अमरिका की सहायता से किया परमाणु युद्ध अभ्यास ध्यान आकर्षित कर रहा है|

                            

इसी बीच रशिया ने पिछले सप्ताह में किए ‘स्ट्रैटेजिक न्यूक्लीअर वॉरगेम्स’ में ‘न्यूक्लीअर ट्रायड’ का परीक्षण करने की बात सामने आ रही है| राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमीर पुतिन की उपस्थिति में यह परीक्षण किया गया है और इस में  अंतरमाद्विपीय ‘यार्स’ मिसाइल, प्रगत पनडुब्बीयां, ‘सिनेवा मिसाइल’ एवं ‘टीयू९५-एमएस बॉम्बर्स’ को शामिल किया गया था|

रशियन सीमा से नजदिकी नाटो के अड्डों को प्रत्युत्तर देंगे –  रशियन प्रधानमंत्री का इशारा

बेलग्रेड  – ‘सुरक्षा के मुद्दे पर रशिया के खुदके हितसंबंध है और उनकी रक्षा करने के लिए हम कदम उठा सकते है, इससे कोई भी इन्कार नही कर सकता| रशिया परमाणु देश है औड़ अपनी सीमा के नजदिकी क्षेत्र में नाटो के अड्डे बने तो इसपर हमारी प्रतिक्रिया सकारात्मक यकिनन नही रहेगी| रशिया ने इससे पहले भी ऐसी गतिविधियों को जवाब दिया है| आगे भी हम नाटो के अड्डों के विरोध में राजनयिक और साथ ही लष्करी रास्ते से जवाब देंगे’, यह इशारा रशिया के प्रधानमंत्री दिमित्रि मेदवेदेव्ह ने दिया है|

पिछले कुछ वर्षों में अमरिका ने यूरोप की रक्षा सज्जता के लिए आक्रामक कदम बढाए है और पोलंड जैसे देश में नए रक्षा अड्डे के निर्माण की तैयारी भी शुरू की है| साथ ही वर्तमान में कार्यरत अपने ठिकानों पर लष्करी तैनाती बढाना शुरू किया है और इस पर रशिया समय समय पर नाराजगी व्यक्त करती रही है| 

 

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