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कोरोनावायरस की तुलना में चीन से ख़तरा अधिक भयंकर – संयुक्त राष्ट्रसंघ में अमरीका की पूर्व राजदूत निक्की हॅले की चेतावनी

वॉशिंग्टन – ‘कोरोनावायरस की महामारी थी, तब चीन का आचरण गुनाहगारी स्वरूप का था और इसके लिए इस देश को लक्ष्य करना ही होगा। लेकिन चीन का ख़तरा इतने तक ही मर्यादित नहीं रहा है। पूरे पॅसिफिक क्षेत्र को चीन से ख़्तरा है और इसका जवाब देने के ज़िम्मेदारी अकेली अमरीका की नहीं है। ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत ने भी चीन से होनेवाले ख़तरे को पहचान लिया है। लेकिन युरोपीय देश इस संदर्भ में बहुत ही पिछड़े हुए हैं’, ऐसे ठेंठ शब्दों में अमरीका की संयुक्त राष्ट्रसंघ में पूर्व राजदूत निक्की हॅले ने चीन पर नया हमला किया।

कोरोनावायरस के मुद्दे को लेकर जागतिक स्तर पर चीनविरोधी वातावरण अधिक ही तीव्र होने लगा है। इसमे अमरीका ने विशेष पहल की होकर, राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प, विदेशमंत्री माईक पॉम्पिओ के साथ कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी चीन को लगातार लक्ष्य कर रहे हैं। सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी ने चीन के मुद्दे पर स्पेशल टास्क फोर्स भी स्थापन किया है। पार्टी के पूर्व नेताओं ने भी चीन के विरोध में आक्रमक आलोचना शुरू की होकर, निक्की हॅले जैसी नेता उसमें अग्रसर हैं। कुछ ही दिन पहले हॅले ने ‘स्टॉप कम्युनिस्ट चायना’ नाम से एक ऑनलाईन मुहिम भी चालू की थी। ‘वॉशिंग्टन पोस्ट’ में लिखे आर्टिकल के ज़रिये हॅले ने इस मुहिम को अधिक ही आक्रमक बनाने के संकेत दिये हैं।

‘युद्ध न करते हुए कम्युनिस्ट हुक़ूमतों को परास्त करना है, तो अपना सामर्थ्य उनसे अधिक है, यह दिखा देना ही सर्वोत्तम मार्ग है’ इन ब्रिटन के पूर्व प्रधानमंत्री एवं राजनयिक विन्स्टन चर्चिल के उद्गारों से शुरुआत करके हॅले ने अपना लक्ष्य चीन की कम्युनिस्ट हुक़ूमत है, यह स्पष्ट किया है। दूसरे विश्वयुद्ध के दौर में इस वक्तव्य को विशेष गंभीरता से नहीं लिया गया था।

लेकिन अमरिकी नेतृत्व ने चर्चिल का मशवरा माना होने की बात हॅले ने आर्टिकल में नमूद की है। रशियन संघराज्य का कम्युनिझम पश्चिमियों के अधिक प्रभावी आर्थिक, राजनैतिक और लष्करी बल के ज़ोर पर ही परास्त हुआ, इस बात पर उन्होंने ग़ौर फ़रमाया।

‘वुहान में से शुरू हुई महामारी ने दुनियाभर में लाखों लोगों की जान ली होकर, अर्थव्यवस्थाओं का अपरिमित नुकसान किया है। लेकिन झूठापन और सबकुछ छिपाने की प्रवृत्ति इनके कारण चीन इसकी ज़िम्मेदारी का स्वीकार हरग़िज़ नहीं करेगा। लेकिन यह धोख़ाधड़ी ही चीन के कम्युनिझम का सबसे बड़ा ख़तरा है, ऐसा मत समझना। यह महज़ एक लक्षण है। किसी वायरस और बीमारी की शुरुआत किसी भी देश से हो सकती है। लेकिन चीन से होनेवाले ख़तरें अन्य कोसी भी देश से नहीं होंगे’, इन शब्दों में हॅले ने चीन के ख़तरे का पुनरुच्चार किया।

संयुक्त राष्ट्रसंघ में अमरीका की पूर्व राजदूत होनेवालीं निक्की हॅले ने, संक्रमण शुरू रहते हुए भी चीन की सत्ताधारी हुक़ूमत से कैसे निंदनीय कारनामें चालू हैं, इसकी सूचि ही इस समय प्रस्तुत की। हाँगकाँग के जनतंत्रवादी कार्यकर्ताओं की हुई गिरफ़्तारी, साऊथ चायना सी में पड़ोसी देशों की नौकाओं पर किये हमलें, ख़ुफ़िया रूप में किये परमाणुपरीक्षण ये केवल एक महीने में चीन की सत्ताधारी हुक़ूमत ने दिखायी आक्रमकता की और दमनतंत्र की झलक है, ऐसा दावा हॅले ने इस समय किया।

चीन की कम्युनिस्ट हुक़ूमत ने अपने ही नागरिकों पर नज़र रखने के लिए तैनात की यंत्रणा, झिंजिआंग में अल्पसंख्याक समुदाय पर शुरू रहा दमनतंत्र इनका उल्लेख कर हॅले ने, चीन की कम्युनिस्ट हुक़ूमत देश की जनता का भी विचार नहीं करती, इसपर ग़ौर फ़रमाया। आर्थिकदृष्टि से यदि चीन संपन्न हुआ, तो उसकी राजकीय व्यवस्था अधिक खुली होगी, यह पश्चिमी देशों की धारणा झूठी साबित हुई है, यह कड़वा सच हॅले ने अपने आर्टिकल में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया।

इसका कारण, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी, पार्टी की देश की सभी यंत्रणाओं पर होनेवाली मज़बूत पकड़ और सिर्फ़ पार्टी मज़बूत होने के लिए बनायी जानेवालीं और अमल कीं जानेवालीं नीतियाँ, ये ही हैं, यह हॅले ने अधोरेखांकित किया। चीन यह अलग प्रकार की ख़तरनाक साबित होनेवाली हुक़ूमत होकर, उसका मुक़ाबला कऱने के लिए चर्चिल की सलाह के अनुसार तैयारी शुरू करना ही शांति का मार्ग साबित होगा, ऐसी स्पष्ट भूमिका हॅले ने अन्त में प्रस्तुत की है।

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