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निराशा में चीन के राष्ट्राध्यक्ष शीतयुद्ध का जोख़म उठाएँगे – हाँगकाँग के पूर्व ब्रिटीश गव्हर्नर पॅटन का इशारा

चीन, हॉंगकॉंग, शीतयुद्ध

लंडन – चीन पर एकाधिकार चलानेवाली कम्युनिस्ट पार्टी में अपना सर्वोच्च स्थान बरकरार रखने के दबाव के कारण प्राप्त हुई निराशा में, चीन के राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग हाँगकाँग के मुद्दे पर नये शीत युद्ध का जोख़म उठाने के लिए तैयार होंगे, ऐसी चेतावनी हाँगकाँग के पूर्व ब्रिटीश गव्हर्नर क्रिस पॅटन ने दी है। आंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी राष्ट्राध्यक्ष जिनपिंग के इन इरादों को लेकर लापरवाह होने की गलती ना करें, ऐसा भी पॅटन ने अनुरोधपूर्वक कहा है। हाँगकाँग चीन के हाथ में सौपने से पहले आख़िरी ब्रिटीश गव्हर्नर के तौर पर पॅटन ने ज़िम्मेदारी संभाली थी।

चीन, हॉंगकॉंग, शीतयुद्ध

चीन के राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग एक तानाशाह हैं। कोरोना वायरस की महामारी को नियंत्रित करने में प्राप्त हुई नाकामी एवं उसको लेकर हो रही आलोचना और अमरीका के साथ हुए व्यापार युद्ध की वज़ह से चीन अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है और इससे कम्युनिस्ट पार्टी में अपना सर्वोच्च स्थान बरकरार रहेगा या नहीं, इसका भरोसा जिनपिंग को अब नहीं रहा। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के किसी भी नेता को एवं सदस्य को महसूस नहीं होगी, उतनी बड़ी निराशा जिनपिंग के हिस्से आयी है। इसी निराशा की भावना में उन्होंने हाँगकाँग, तैवान और अन्य सभी मुद्दों पर चीन की जनता के मन में राष्ट्रवाद जगाने की कोशिश शुरू की है, यह दावा पॅटन ने किया है।

‘ब्रिटन से चीन के हाथ में हाँगकाँग सौपते समय, ‘वन कंट्री टू सिस्टिम्स’ इस नीति के तहत हाँगकाँग को प्रदान किए गए अधिकार और स्वायत्तता के बारे में जिनपिंग के मन में बड़ी नफ़रत है। इसी वज़ह से, हाँगकाँग का समझौता संयुक्त राष्ट्रसंगठन जैसे आंतर्राष्ट्रीय दायरे का हिस्सा होते हुए भी, उसे तोड़ने के लिए जिनपिंग कदम उठा सकते हैं। यह समझौता तोड़कर, बल का प्रयोग करके हाँगकाँग को सबक सिखाने की योजना चीन के राष्ट्राध्यक्ष मन में रखते हैं’ ऐसें शब्दों में पूर्व ब्रिटीश गव्हर्नर पॅटन ने जिनपिंग की गतिविधियों का एहसास कराया है।

चीन, हॉंगकॉंग, शीतयुद्ध

दोबारा शीत युद्ध ना हों यही जागतिक समुदाय की इच्छा होते हुए भी, चीन के राष्ट्राध्यक्ष जिनपिंग ही शीत युद्ध चाहते हैं; इसलिए इसे प्रत्युत्तर देने की तैयारी हम सभी को रखनी होगी, यह चेतावनी भी पॅटन ने दी है। चीन के राष्ट्राध्यक्ष ने हाँगकाँग पर कार्रवाई करना शुरू किया, तो वहाँ के नागरिक एवं विदेशी निवेश भी बड़ी मात्रा में वहाँ से बाहर निकलेंगे। इसका असर चीन पर होगा, इसका अन्देसा होने के बावजूद भी, जिनपिंग द्वारा हाँगकाँग के संदर्भ में किए जा रहें निर्णय आकलन से परे हैं, यही कहना होगा, ऐसा पॅटन ने कहा है।

कुछ दिन पहले चीन के विदेशमंत्री वँग यी ने अमरीका पर आलोचना करते समय, इस देश का एक सियासी वर्ग चीन और अमरीका को नये शीत युद्ध की दिशा में धकेल रहा है, यह आरोप किया था। इस पृष्ठभूमि पर, ब्रिटन के पूर्व गव्हर्नर द्वारा, चीन ही शीत युद्ध चाहता है, यह दावा किया जाना ग़ौरतलब साबित होता हैं।

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