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अमरीका-चीन युद्ध की संभावना अकल्पनीय नहीं रही – ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन का इशारा

कैनबेरा – अमरीका और चीन के बीच युद्ध शुरू होने की बात अब अकल्पनीय नहीं रही है, यह इशारा ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने दिया है। इससे पहले इस तरह से सीधे युद्ध होने की कल्पना या संभावना व्यक्त नहीं की जा रही थी। लेकिन अब स्थिति मे बदलाव आया है, इन शब्दों में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में होनेवाले संभावित संघर्ष के संकेत दिए। अमरीका और चीन में होनेवाले युद्ध के बारे में बोलते समय ऑस्ट्रेलिया के चीन के साथ बने संबंध भी काफ़ी हद तक बिगड़ने की जानकारी भी प्रधानमंत्री मॉरिसन ने साझा की। इसी पृष्ठभूमि पर चीन की नौसेना ने प्रगत एम्फिबियस असॉल्ट शीप का परीक्षण शुरू करने का ऐलान किया है।

स्कॉट मॉरिसन

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री केविन रूड ने ‘फॉरेन अफेअर्स’ नामक पत्रिका में लिखे एक लेख में यह दावा किया था कि, अमरीका और चीन में जल्द ही युद्ध भड़केगा। ‘बिवेअर द गन्स ऑफ ऑगस्ट – इन एशिया’ नाम से लिखे इस लेख में रूड ने अगले तीन महीनों में साउथ चायना सी में अमरीका और चीन के बीच युद्ध होने की संभावना सबसे अधिक होने की बात कही है। यह युद्ध भड़कने पर ऑस्ट्रेलिया को भी गंभीर परिणाम भुगतने पडेंगे, यह इशारा भी रूड ने इस लेख में दिया है। अमरीका और चीन का संभावित युद्ध टालने के लिए इन दोनों देशों के बिगड़े संबंध सुधारने के लिए अन्य देशों को पहल करनी होगी, यह सलाह भी ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री ने इस लेख में दी है।

पूर्व प्रधानमंत्री के इस लेख पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते समय प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने यह स्पष्ट किया कि, अपनी सरकार इस मुद्दे की ओर अलग नज़रिए से देख रही है। रूड ने बयान किया है इसके अनुसार काफी नाट्यमय पद्धती से इस संघर्ष की शुरूआत होने की संभावना नहीं दिखती। लेकिन, अमरीका और चीन का युद्ध पहले की तरह अकल्पनीय बात नहीं रही, इसका पूरा एहसास ऑस्ट्रेलिया की सरकार को है। यह संभवान या कल्पना पहले जताई नहीं गई थी, लेकिन अब स्थिति में बदलाव आया है, इन शब्दों में प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने अमरीका और चीन के बीच होनवाले संभावित युद्ध को लेकर इशारा दिया। ‘ऐस्पेन सिक्युरिटी फोरम’ के कार्यक्रम के दौरान इस युद्ध की चेतावनी देने के साथ ही ऑस्ट्रेलिया और चीन के संबंध काफी हद तक बिगड़ने की बात भी प्रधानमंत्री मॉरिसन ने कबूल की।

स्कॉट मॉरिसन

साउथ चायना सी के क्षेत्र में अमरीका और चीन इन दोनों देशों ने अपनी लष्करी गतिविधियां तेज़ की है और इससे दोनों देशों के बीच कभी भी संघर्ष शुरू हो सकता है, इस तरह के इशारे लष्करी अधिकारी एवं विशेषज्ञ बीते कुछ दिनों से लगातार दे रहे हैं। अमरीका और चीन के नेता दोनों देशों में शीत युद्ध जारी होने के संकेत भी दे रहे हैं। लेकिन, ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख देश के प्रधानमंत्री ने अमरीका-चीन युद्ध से संबंधित किया यह ज़िक्र ध्यान आकर्षित करनेवाला साबित होता है। युद्धा का ज़िक्र करने के साथ ही ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा पर भी अपनी भूमिका पेश की।

स्कॉट मॉरिसन

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सम-विचारधारा वाले देशों का मोर्चा तैयार करना ऑस्ट्रेलिया के लिए काफी अहम है और अपनी सरकार इसे प्राथमिकता देगी। बीते कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में बड़ी तेज़ गति से लष्करीकरण जारी है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सामरिक होड़ का केंद्र बना है। प्रादेशिक हक से संबंधित विवाद और इससे बने तनाव में बढ़ोतरी हो रही है, यह कहकर प्रधानमंत्री मॉरिसन ने दुबारा खतरे का एहसास दिलाया। चीन का ताकतवर आर्थिक सत्ता बनकर उभरना जागतिक अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा होगा, लेकिन इस आर्थिक प्रगति के साथ ज़िम्मेदारी भी आती है, यह बात चीन को ध्यान में रखनी होगी, इन शब्दों में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने चीन को फटकार लगाई।

ऑस्ट्रेलिया से अमरीका-चीन युद्ध के संकेत दिए जा रहे हैं तभी चीन की आक्रामक लष्करी गतिविधियां शुरू होने की जानकारी भी सामने आयी है। दो दिन पहले तो चीन की नौसेना ने अपनी प्रगत ‘एम्फिबियस असॉल्ट शिप’ का सागरी परीक्षण शुरू किया है। ‘टाई ०७५’ के तौर पर जानी जा रही यह ‘एम्फिबियस असॉल्ट शिप’ विश्‍व में सबसे बड़ी ‘एम्फिबियस असॉल्ट शिप’ होने का दावा चीन कर रहा है। इस वर्ग के अन्य तीन ‘शिप्स’ का निर्माण जारी है और इन युद्धपोतों के बल पर साउथ चायना सी पर वर्चस्व स्थापित करने का उद्देश्‍य चीन ने रखा होने की बात कही जा रही है। ‘एम्फिबियस असॉल्ट शिप’ का परीक्षण करने के साथ ही चीन की ‘पीपल्स लिब्रेशन आर्मी’ ने हाल ही में सेना के ‘अटैक हेलिकॉप्टर्स’ और युद्धपोतों का युद्धाभ्यास करने की बात सामने आयी है। तैवान पर हमला करने का उद्देश्‍य सामने रखकर चीन ने इस युद्धाभ्यास का आयोजन किया था, यह दावा भी चीन के प्रसारमाध्यमों ने किया है।

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