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अज़रबैजान और ३० वर्ष इंतजार नहीं करेगा – तुर्की का इशारा

मॉस्को/अंकारा/येरेवान – तुर्की ने अज़रबैजान को दिया हुआ समर्थन अतिक्रमण किए गए क्षेत्र को वापिस प्राप्त करने के लिए है। अब इसके आगे अज़रबैजान नागोर्नो-कैराबख के संघर्ष का हल निकालने के लिए और ३० वर्ष इंतजार नहीं करेगा, यह इशारा तुर्की ने दिया है। साथ ही अज़रबैजान की भूमि से आर्मेनिया अपनी सेना तुरंत पीछे हटाए, यह माँग भी तुर्की ने की है। आर्मेनिया-अज़रबैजान मुद्दे पर तुर्की आक्रामक भूमिका अपना रहा है और तभी इन दोनों देशों के बीच युद्धविराम करने के मुद्दे पर जारी बातचीत में तुर्की का समावेश करने से रशिया ने इन्कार किया है।

इंतजार नहीं करेगा

शुक्रवार के दिन रशिया के राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमीर पुतिन की पहल से राजधानी मास्को में आर्मेनिया-अज़रबैजान के बीच युद्धविराम करने के लिए चर्चा का आयोजन किया गया। इस चर्चा में तय हुआ युद्धविराम शुरू होने से पहले ही दोनों देशों के बीच दुबारा जोरदार संघर्ष शुरू हुआ है। शनिवार से ही दोनों देशों ने एक-दूसरे के क्षेत्र पर जोरदार हमले किए हैं और प्रतिद्वंद्वि को बड़ा नुकसान पहुँचाने के दावे भी किए हैं। अज़रबैजान ने नागोर्नो-कैराबख की राजधानी स्टेपनकेर्ट एवं उससे नज़दिकी हादरूत में ड्रोन्स और मिसाइल के हमले किए। आर्मेनियन सेना का ‘टी-७२’ टैंग एवं ग्रैण्ड रॉकेट लौंचर सिस्टिम तहस नहस करने का दावा अज़रबैजान के रक्षा मंत्रालय ने किया है। इसी दौरान आर्मेनिया ने अज़रबैजान के शहरों पर हमले करना जारी रखा है और गांजा के बाद अब बर्दा शहर को लक्ष्य किया है।

इंतजार नहीं करेगा

इस संघर्ष के दौरान तुर्की ने अज़रबैजान में सीरियन आतंकी भेजने की पोल खोलनेवाला वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में तुर्की ने प्रशिक्षित किए सीरियन आतंकी नागोर्नो-कैराबख में सक्रिय होने की बात दिखाई गई है। यह आतंकी आर्मेनिया का नाम लिखे हुए बोर्ड के सामने खड़े होकर धमकाने का काम करते हुए इस वीडियो में दिखाई दे रहे हैं। इस पृष्ठभूमि पर, नागोर्नो-कैराबख के सदस्यों ने रशिया और ईरान के साथ आर्मेनिया ऐण्टी टेरर युनिट का निर्माण करे, यह माँग की है। नागोर्नो-कैराबख में घुसपैठ करनेवाले आतंकियों के अड्डे तबाह करने की माँग भी की गई है। तुर्की ने इस इलाके में करीबन १,२०० से अधिक आतंकियों को भेजा है, यह दावे सामने आ रहे हैं और रशिया एवं फ्रान्स के साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस पर कड़ी आलोचना की है। लेकिन, तुर्की ने यह आरोप ठुकराए हैं।

इंतजार नहीं करेगा

इसी बीच, आर्मेनिया-अज़रबैजान के युद्ध में तुर्की अधिक से अधिक आक्रामक रवैया अपनाने की बात सामने आ रही है। यह युद्ध शुरू होने से दो महीने पहले से ही तुर्की ने अज़रबैजान को बड़ी मात्रा में लष्करी सहायता प्रदान की थी। युद्ध के दौरान लष्करी सहायता के साथ ही राजनीतिक समर्थन भी तुर्की देता हुआ दिख रहा है। युद्धविराम के लिए जारी कोशिशों में अपना समावेश हो, यह माँग तुर्की कर रहा है। तुर्की की यह माँग अज़रबैजान ने रशिया के साथ हुई चर्चा के दौरान रखने की बात सामने आयी है। लेकिन, रशिया ने यह माँग स्पष्ट शब्दों में ठुकराई है। रशिया की पहले से शुरू हुई इस चर्चा में अन्य किसी भी देश को समावेश करने का इरादा नहीं है, यह बात रशियन विदेशमंत्री ने स्पष्ट की।

रशिया पहले से ही आर्मेनिया के पक्ष में खड़ा है और इस बार भी रशिया अपनी भूमिका पर कायम होने की बात विदेश मंत्रियों के बयान से दिख रही है। उसी समय तुर्की अधिक आक्रामक होने की बात रशिया और तुर्की के विदेशमंत्री ने की हुई चर्चा से दिखाई देने लगी है। तुर्की के रक्षामंत्री हुलुसी अकार ने किसी भी स्थिति में आर्मेनिया को नागोर्नो-कैराबख से अपनी सेना पीछे हटानी ही होगी, यह माँग बड़ी तीव्रता से रखी है। इसी दौरान यह क्षेत्र आर्मेनिया के कब्ज़े से मुक्त होने तक तुर्की हमेशा अज़रबैजान की सहायता करना जारी रखेगा, यह इशारा देने की बात भी तुर्की के रक्षामंत्रालय ने कही है। तुर्की की इस अडियल भूमिका की वजह से नज़दिकी दिनों में आर्मेनिया-अज़रबैजान युद्ध खत्म होने की आशंका कम होती दिख रही है।

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