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‘किन स्वोर्ड’ के ज़रिये अमरीका और जापान ने चीन को दिया कड़ा इशारा

टोकियो – विमान वाहक युद्धपोत, हेलिकॉप्टर कैरियर, लड़ाकू विमानों के साथ ४६ हज़ार सैनिकों के साथ किए जा रहे ‘किन स्वोर्ड’ युद्धाभ्यास के माध्यम से अमरीका और जापान ने चीन को कड़ी चेतावनी दी है। चीन ने बीते वर्ष से अपने रक्षा सामर्थ्य में काफी बढ़ोतरी की है और लष्करी गतिविधियां भी तेज़ की हैं। इस बलबूते पर चीन ने पड़ोसी देशों की सीमा में घुसपैठ करके उन्हें धमकाना एवं इन देशों पर दबाव बढ़ाने की कोशिश शुरू की है। चीन की इन वर्चस्ववादी गतिविधियों को अमरीका के साथ पड़ोसी देश खुली चुनौती दे रहे हैं और नया युद्धाभ्यास इसी का हिस्सा है।

‘किन स्वोर्ड’

सोमवार के दिन जापान की समुद्री सीमा में किन स्वोर्ड २१ नामक संयुक्त युद्धाभ्यास में अमरीका की विमान वाहक युद्धपोत यूएसएस रोनाल्ड रिगन, कैरियर स्ट्राईक ग्रुप, १०० से अधिक लड़ाकू एवं लष्करी विमान और मरीन कोअर के साथ अमरीका के तीनों दलों के करीबन ९ हज़ार सैनिक शामिल हुए हैं। जापान ने अपनी सबसे बड़ी युद्धपोत हेलिकॉप्टर कैरियर जे.एस.कागा समेत प्रमुख युद्धपोत, लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर्स, पनडुब्बियां और लगभग ३५ हज़ार सैनिक इस युद्धाभ्यास में शामिल किए हैं। ५ नवंबर तक होनेवाले इस युद्धाभ्यास में सायबर एवं इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेअर का भी समावेश है। जापान की समुद्री सीमा में स्थित यकायक किए गए हमले को प्रत्युत्तर देने की तैयारी इस युद्धाभ्यास का उद्दश्‍य होने का दावा जापान के लष्करी सूत्रों ने किया।

‘किन स्वोर्ड’

जापान के करीबी स्थिति प्रति दिन अधिक बिगड़ रही है। जापान और अमरीका के गुट की ताकत दिखाने के लिए यह अच्छा अवसर है। इन शब्दों में जापान के सेनाप्रमुख जनरल कोजी यामाझाकी ने यह युद्धाभ्यास चीन के लिए संदेश होने की बात स्पष्ट की। इस दौरान उपस्थित अमरीका के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टनंट जनरल केविन श्‍नायडर ने भी चीन के बढ़ते खतरों की ओर ध्यान आकर्षित किया। साउथ चायना सी में बढ़ रही लष्करी गतिविधियां और तैवान के विरोध में जारी गतिविधियां अमरीका और जापान के लिए चिंता का विषय हैं, यह इशारा जनरल केविन श्‍नायडर ने दिया है।

‘किन स्वोर्ड’

अमरीका और जापान के इस युद्धाभ्यास पर चीनी प्रसारमाध्यम एवं विश्‍लेषकों की तीव्र प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई हैं। अमरीका और जापान खुलेआम चीन को लक्ष्य करने की बात दिखा रहे हैं और सेंकाकू द्विपों के मुद्दे पर चीन से संघर्ष करने की तैयारी शुरू करने की बात इस नए युद्धाभ्यास से दिख रही है, यह दावा चीनी विश्‍लेषक ली हायडाँग ने किया। तभी ग्लोबल टाईम्स ने अमरीका-जापान का युद्धाभ्यास पड़ोसी देशों के लिए खतरनाक होने के संकेत हैं, यह चिंता व्यक्त करके चीन की हुकूमत की बढ़ती बेचैनी दिखाई है।

चीन ने बीते कुछ महीनों में साउथ चायना सी समेत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी अपनी गतिविधियां काफी मात्रा में बढ़ाई हैं। इसके पीछे पूरे साउथ और ईस्ट चायना सी क्षेत्र पर कब्ज़ा करने की वर्चस्ववादी महत्वाकांक्षा है। एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में चीन लगातार अपने रक्षा सामर्थ्य का आक्रामक प्रदर्शन कर रहा है। जापान के करीबी ईस्ट चायना सी में चीन की विध्वंसक, पनडुब्बियां एवं गश्‍तपोत जापान की संप्रभुता को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं। मई में चीन ने अपनी ‘लिओनिंग’ नामक विमान वाहक युद्धपोत और ‘स्ट्राईक ग्रूप’ को जापान के निकट ईस्ट चायना सी क्षेत्र में तैनात किया था। चीन के कुछ लड़ाकू विमानों ने जापान की हवाई सीमा में घुसपैठ करने की कोशिश करने का भी वृत्त प्राप्त हुआ था। इस पृष्ठभूमि पर अमरीका और जापान का नया युद्धाभ्यास ध्यान आकर्षित करनेवाला साबित होता है।

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