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हमास के रॉकेट हमले के बाद इस्रायल ने गाज़ा पर किए हवाई हमलें

तेल अवीव – ईरान और तुर्की से बड़ी मात्रा में लष्करी एवं आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहे हमास ने, इस्रायल के सरहदी क्षेत्र में रॉकेट हमलें किए। इन हमलों के बाद इस्रायली सेना ने जोरदार प्रत्युत्तर दिया है और इस दौरान हमास के कुछ ठिकाने तबाह होने का दावा किया जा रहा है। इस्रायली सेना गाज़ा पर हमलें कर रही थी, तभी ईरान की राजधानी तेहरान में हमास और इस्लामिक जिहाद के नेताओं की बैठक होने की जानकारी ईरान के माध्यमों ने जारी की है।

हवाई कारवाई, हवाई हमलें

इस्रायली सेना ने किए दावे के अनुसार, शनिवार रात के समय गाज़ा से इस्रायल के अश्‍दोद शहर के करीब दो रॉकेट हमलें हुए। इन हमलों में जान का नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन, फिर भी इस्रायल के सरहदी क्षेत्र में कुछ मात्रा में घबराहट निर्माण हुई थी। हमास के इन हमलों के बाद इस्रायली सेना ने गाज़ा में कार्रवाई शुरू की। इस दौरान इस्रायली लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर्स एवं टैंक का प्रयोग किया गया। इन जवाबी हमलों में गाज़ा में स्थित हमास का ‘टनेल नेटवर्क’ तहस नहस होने की जानकारी इस्रायली सेना ने साझा की। रविवार सुबह तक गाज़ा के रफाह, खान युनूस और बैत हनून शहरों पर इस्रायल के हमलें हो रहे थे। इसके बाद इस्रायल ने अपनी सुरक्षा यंत्रणाओं के लिए अलर्ट जारी किया है।

हवाई कारवाई, हवाई हमलें

हमास ने इस्रायल की कार्रवाई पर किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देना टाल दिया है। लेकिन, इस्रायल ने यह कार्रवाई शुरू होने से कुछ घंटे पहले, हमास और इस्लामिक जिहाद इन आतंकी संगठनों के वरिष्ठ कमांडर की ईरान में बैठक हुई थी। उसमें, वेस्ट बैंक में मौजूद इस्रायल का नागरी क्षेत्र ध्वस्त करने के साथ ही, इस्रायल के विरोध में मोरचा खोलने के मुद्दे पर सहमति होने की जानकारी ईरान के माध्यमों ने प्रसिद्ध की हैं। एक वर्ष पहले इस्रायल की कार्रवाई में, गाज़ा में इस्लामिक जिहाद का वरिष्ठ कमांडर बहा अबू अल अता मारा गया था। उसकी हत्या का प्रतिशोध लेने के लिए इस्लामिक जिहाद के संगठन ने ये रॉकेट हमलें किए होंगे, यह आशंका जताई जा रही है।

बीते कुछ महीनों में हमास ने ईरान एवं तुर्की के साथ सहयोग बढ़ाया है। अबतक हमास और ईरान के बीच जोरदार सहयोग जारी था। लेकिन, बीते कुछ महीनों से हमास ने तुर्की के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए प्राथमिकता दिखाई है। हमास ने तुर्की में सायबर कमांड स्थापित की हैं और तुर्की की एर्दोगन सरकार हमास को बड़ी सहायता प्रदान कर रही है। इस सायबर कमांड का इस्तेमाल करके हमास, इस्रायल एवं अन्य खाड़ी देशों पर सायबर हमलें कर सकेगा, यह चिंता इस्रायल के लष्करी कमांडर व्यक्त कर रहे हैं।

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