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बायडेन प्रशासन का परमाणु समझौते से संबंधित निर्णय ईरान को परमाणु अस्त्र से सज्जित होने की गारंटी देनेवाला – अमरीका के पूर्व विदेशमंत्री का आरोप

वॉशिंग्टन – ‘वर्ष २०१५ के परमाणु समझौते में शामिल होकर अमरीका खाड़ी क्षेत्र से संबंधित की हुई गलतियों को सुधारने की कोशिश कर रही है’, यह घोषणा करके अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष ज्यो बायडेन ने अपनी ईरान संबंधित भूमिका का समर्थन किया है। लेकिन, बायडेन प्रशासन के इस निर्णय पर अमरीका में कड़ी आलोचना हो रही है। पांच वर्ष पहले के परमाणु समझौते में शामिल होकर बायडेन प्रशासन ईरान को परमाणु अस्त्र से सज्जित होने की गारंटी दे रहा है, ऐसा आरोप अमरीका के पूर्व विदेशमंत्री माईक पोम्पिओ ने लगाया।

बायडेन प्रशासन ने गुरूवार की शाम ईरान के साथ परमाणु समझौता करने के लिए तैयार होने का ऐलान किया। यूरोपिय महासंघ ने पेश किए प्रस्ताव का स्वीकार करके अमरीका अब ईरान के साथ परमाणु समझौते पर बातचीत करेगी, यह ऐलान वाईट हाउस के प्रवक्ता नेड प्राईस ने किया है। अगले कुछ घंटों में राष्ट्राध्यक्ष बायडेन ने भी म्युनिक सुरक्षा परिषद में बोलते समय ईरान के साथ परमाणु समझौता करना आवश्‍यक होने की बात स्पष्ट की। संयुक्त राष्ट्रसंघ की सुरक्षा कौन्सिल के दायरे में यह बातचीत होगी। साथ ही बीते कुछ वर्षों में खाड़ी क्षेत्र की अस्थिरता के लिए ज़िम्मेदार गलतियाँ इस परमाणु समझौते से सुधारी जाएंगी, यह दावा भी बायडेन ने किया।

लेकिन, बायडेन प्रशासन ईरान के साथ परमाणु समझौता करने की जल्दबाज़ी कर रहा है, ऐसी आलोचना अमरीका की रिपब्लिकन पार्टी के नेता कर रहे हैं। अमरीका के पूर्व विदेशमंत्री पोम्पिओ ने अमरिकी वृत्तसंस्था को दिए साक्षात्कार के दौरान बायडेन प्रशासन को इशारा दिया। ‘ईरान की आयातुल्ला की हुकूमत से मेल करना, यह यूरोपियन देशों का मॉडल है। बायडेन प्रशासन ने भी ईरान की हुकूमत के साथ मेल किया तो ईरान को परमाणु अस्त्र से सज्जित होने की गारंटी देनेवाला रास्ता खुल जाएगा’, यह बयान पोम्पिओ ने किया है।

इसके साथ ही अमरीका के पूर्व विदेशमंत्री ने यूरोपिय देशों पर हमला किया। ‘यूरोपियन देशों ने इससे पहले ईरान की आयातुल्ला की हुकूमत को सराहने की कोशिश की थी। लेकिन, ट्रम्प प्रशासन ने ऐसा कभी भी होने नहीं दिया। ईरान की इस हुकूमत को सिर्फ कार्रवाई की भाषा समझ में आती है। ट्रम्प प्रशासन ने अमरिकी जनता और इस्रायल की सुरक्षा के लिए यही भूमिका अपनाई थी’, इन शब्दों में पोम्पिओ ने ईरान के साथ बातचीत करने के बजाय प्रतिबंध अधिक सख्त करने का आवाहन किया।

बायडेन प्रशासन ने ईरान के विरोध में सख्त भूमिका नहीं अपनाई तो अमरीका की कमज़ोरी ज्ञात करके ईरान अधिक ताकतवर बनेगा और हमले भी करेगा, ऐसा इशारा पोम्पिओ ने चार दिन पहले ही अमरिकी समाचार चैनल से बातचीत करते समय दिया था। इसके लिए ईरान हिज़बुल्लाह एवं इराक में स्थित ईरान से जुड़े आतंकी संगठनों का इस्तेमाल करेगा, यह इशारा भी पोम्पिओ ने दिया था। बायडेन प्रशासन भी ट्रम्प प्रशासन की भूमिका पर ही अमल करे, ऐसा बयान पोम्पिओ ने किया था। लेकिन, बायडेन प्रशासन ने ईरान के साथ परमाणु समझौता करने के लिए गतिविधियाँ शुरू करने से पोम्पिओ ने चार दिन पहले दिए अपने इशारे पर ध्यान आकर्षित किया।

पोम्पिओ की तरह अमरिकी कांग्रेस के कुछ सिनेटर्स ने भी बायडेन के निर्णय पर फटकार लगाई है। साथ ही ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध बरकरार रखने की माँग भी की है। लेकिन, ईरान के साथ कितना भी राजनीतिक तनाव हो, फिर भी अमरीका का बायडेन प्रशासन ईरान को प्रतिबंधों में जकड़ नहीं सकता, ऐसा दावा ईरान की रोहानी सरकार के प्रवक्ता अली राबिए ने किया है।

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