सीरिया में स्थित ईरान के लष्करी ठिकानों पर इस्रायल ने किए हमलों में ३१ ढ़ेर

दमास्कस/बैरूत – इस्रायल के लड़ाकू विमानों ने सीरिया के पूर्वीय क्षेत्र में अल-ज़ोर प्रांत में हमले करके वहां पर स्थित ईरान के लष्करी अड्डे और ठिकानों को लक्ष्य किया। इन हमलों में ईरान से जुड़े गुट के कम से कम ३१ आतंकी ढ़ेर होने का दावा किया जा रहा है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम के लिए आवश्‍यक कुछ सामान की आपूर्ति इन्हीं ठिकानों पर बनाए भूमिगत मार्ग से किया जा रहा था, ऐसा दावा अमरिकी गुप्तचर यंत्रणा के वरिष्ठ अधिकारी ने किया है। इसी कारण इन हमलों की अहमियत बढ़ रही है। इसी बीच इस्रायली गुप्तचर यंत्रणा ‘मोसाद’ के प्रमुख योसी कोहेन ने दो दिन पहले ही अमरिकी विदेशमंत्री माईक पोम्पिओ से भेंट की थी। इस भेंट के दौरान इस्रायल की इस कार्रवाई पर चर्चा हुई थी, यह दावा भी किया जा रहा है।

इस्रायल के लड़ाकू विमानों ने बुधवार सुबह से पहले देर अल-ज़ोर और अल-बुकमल में जोरदार हमले करने की बात सीरियन समाचार चैनल ‘सना’ ने कही है। सीरिया की अस्साद हुकूमत से जुड़े इस समाचार चैनल ने इन हमलों पर अधिक जानकारी देना टाल दिया। लेकिन, सीरिया में स्थित मानव अधिकार संगठन ने प्रदान की हुई जानकारी के अनुसार वहां पर कम से कम १८ लष्करी अड्डों पर इस्रायली लड़ाकू विमानों ने कार्रवाई की। बीते दो हफ्तों में इस्रायल ने सीरिया में की हुई यह चौथी कार्रवाई है। वर्ष २०१८ के बाद इस्रायल ने पहली बार ही सीरिया में इतनी बड़ी मात्रा में हमले किए हैं, ऐसा दावा मानव अधिकार संगठन कर रहा है।

देर अल-ज़ोर और अल-बुकमल में ईरान ने अपने लष्करी अड्डे और कई ठिकाने बनाए हैं। इराक की सीमा से करीब होने की वजह से इस ठिकाने से सीरिया में हथियारों की तस्करी होती है। इस्रायल और अमरीका ने इससे पहले भी ईरान के यहां पर बने अड्डों पर हमले करने की खबरें प्रसिद्ध हुई थी। लेकिन, इस्रायल के लड़ाकू विमानों ने बुधवार के दिन भोर के समय की हुई कार्रवाई के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित ठिकाने को लक्ष्य किया है, ऐसा दावा किया जा रहा है। इस्रायल ने लक्ष्य किए ईरान के इस लष्करी अड्डे पर गोदाम की पाईपलाईन का इस्तेमाल ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित सामान की आपूर्ति करने के लिए भी किया जा रहा था, यह जानकारी अमरिकी गुप्तचर यंत्रणा के अधिकारी नाम घोषित ना करने की शर्त पर साझा की।

इससे पहले वर्ष २००७ में देर अल-ज़ोर में सीरिया परमाणु प्रकल्प का निर्माण कर रहा था और इस प्रकल्प पर इस्रायल ने हवाई हमले किए थे। इन हमलों में सीरिया का यह निर्माणाधीन परमाणु प्रकल्प नष्ट हुआ था। इसके साथ ही वहां पर उत्तर कोरिया के १० वैज्ञानिक भी मारे गए थे, ऐसा कहा जा रहा है। इस्रायल और सीरियन माध्यमों में इस हमले की खबरें प्रसिद्ध हुई थीं। लेकिन, दस वर्ष बाद इस्रायल ने इन हमलों की स्वीकृति दी थी। बुधवार के दिन हुए हमलों के लिए अमरिकी गुप्तचर यंत्रणा ने ही इस्रायल को अहम जानकारी प्रदान की थी, यह दावा किया जा रहा है।

इसी बीच, दो दिन पहले अमरीका के वॉशिंग्टन शहर में कैफे मिलानो में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अमरिकी विदेशमंत्री पोम्पिओ और मोसाद के प्रमुख कोहेन की मुलाकात हुई। इस दौरान हुई चर्चा में अल-ज़ोर के हमले के मुद्दे पर चर्चा होने का दावा इस अधिकारी ने किया। इस हमले से कुछ घंटे पहले ही इस्रायल के रक्षामंत्री बेनी गांत्ज़ ने सीरिया की सीमा के करीबी इस्रायल की गोलान पहाड़ियों का दौरा किया था।

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