प्रदर्शनकारियों पर म्यानमार के लष्कर ने की कार्रवाई में ९१ लोगों की मृत्यु

नेप्यितौ/यांगून – म्यानमार के लष्कर ने लोकतंत्रवादी प्रदर्शनकारियों के विरोध में की खूंखार कार्रवाई में ९० से अधिक लोगों की मौत हुई है। मंडाले और यांगून समेत देश के ४० शहरों में हुई कार्रवाई में ये मृत्यु हुईं होकर, पिछले डेढ़ महीने में यह सबसे बड़ी और पाशविक कार्रवाई साबित हुई है। देश के विभिन्न भागों में सशस्त्र जवान बेगुनाह जनता पर गोलियाँ बरसा रहे हैं, ऐसे में राजधानी नैप्यितौ में लष्कर द्वारा ‘आर्म्ड फोर्सेस डे’ का आयोजन किया गया होने की खबर सामने आई है।

पिछले कुछ दिनों से म्यानमार ने लष्कर के विरोध में जारी आंदोलन अधिक से अधिक तीव्र रूप धारण करता दिख रहा है। देश के कोने-कोने से आम नागरिकों समेत विभिन्न धार्मिक गुट तथा बागी संगठन भी आंदोलन में उतरने की बात सामने आई है। आंदोलन को मिलनेवाला यह बढ़ता समर्थन देखकर लष्कर बौखला गया होकर, उन्होंने अपनी कार्रवाई की व्याप्ति और तीव्रता अधिक ही बढ़ाई है।

म्यानमार के लष्कर ने कुछ दिन पहले यांगून, मंडाले और आसपास के भागों में की भीषण कार्रवाई में एक दिन में ६० से अधिक लोगों की जानें गई थी। लेकिन शनिवार को म्यानमार के लष्कर ने क्रूरता की सभी मर्यादाएँ लांघीं हुईं दिखाई दीं। शनिवार सुबह से म्यानमारी लष्कर ने देश के विभिन्न शहरों में कार्रवाई शुरू करने की जानकारी सामने आई है। सड़कों पर उतरकर विरोध करनेवाले प्रदर्शनकारियों के साथ ही, घर में रहनेवाले बेगुनाह नागरिकों को भी इसमें लक्ष्य किया गया।

‘म्यानमार नाऊ’ इस वेबसाईट ने दी जानकारी के अनुसार, दोपहर तक देश के विभिन्न भागों में ९१ लोगों की मृत्यु होने की बात सामने आई है। पिछले डेढ़ महीने में पहली ही बार, एक दिन में इतने बड़े पैमाने पर मृत्यु हुईं हैं। घटना के बाद, लष्कर ने अब तक की कार्रवाई में मृतकों की संख्या बढ़कर ४०० तक पहुँची बताई जाती है। शनिवार की यह भाषण कार्रवाई यानी लष्कर के लिए ‘डे ऑफ शेम’ होने की आलोचना देश के लोकतंत्रवादी गुटों ने की है।

शनिवार को की कार्रवाई के लिए, म्यानमार लष्कर द्वारा आयोजित किए गए ‘आर्म्ड फोर्सेस डे’ की पृष्ठभूमि है, ऐसा बताया जाता है। राजधानी नैप्यितौ में जनरल मिन आँग हलेंग की उपस्थिति में लष्करी संचलन और अन्य कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया था। इस कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शनों का व्यत्यय ना आयें इसलिए शनिवार को आक्रामक कार्रवाई हाथ में ली गई होगी, ऐसा दावा कुछ विश्लेषकों ने किया है।

शनिवार के कार्यक्रम से पहले शुक्रवार को लष्कर द्वारा आंदोलकों को खुलेआम धमकी भी दी गई थी। शनिवार को अगर ‘आर्म्ड फोर्सेस डे’ के कार्यक्रम के दौरान आंदोलन हुआ, तो प्रदर्शनकारियों के सिर में और पीठ पर गोलियाँ बरसाईं जाएँगी, ऐसी चेतावनी लष्कर से जुड़े न्यूज़ चैनल पर दी गई थी। इससे पहले हुई कार्रवाई के दौरान जिनकी मौत हुई है, उससे आंदोलन में सहभागी होनेवाले प्रदर्शनकारी उचित सबक सीखें, ऐसा भी इस चेतावनी में जताया गया था।

इसी बीच, शनिवार को हुई लष्करी कार्रवाई के दौरान यांगून स्थित ‘अमेरिकन सेंटर’ की ईमारत पर भी गोलियाँ बरसाईं गईं होने की खबर सामने आई है। इस घटना के फोटोग्राफ्स भी प्रकाशित हुए हैं।

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