चीन के ‘फ्रैंकनवायरस एक्सपेरिमेंट’ से विश्‍वभर में नई महामारी फैलने का खतरा – ऑस्ट्रेलियन पत्रकार एवं लेखिका शैरी मार्क्सन का इशारा

कैनबेरा/बीजिंग – चीन के ‘लैब्ज्‌’ में शुरू ‘फ्रैंकनवायरस’ प्रकार के प्रयोगों की वजह से विश्‍वभर में नई महामारी शुरू हो सकती है, ऐसी गंभीर चेतावनी ऑस्ट्रेलियन पत्रकार और लेखिका शैरी मार्क्सन ने दी है। शैरी मार्क्सन ने कोरोना की महामारी के पीछे चीन की वुहान लैब ही ज़िम्मेदार होने का पूरा ब्यौरा बयान करनेवाली किताब लिखी है और हाल ही में यह किताब प्रकाशित हुई है। मार्क्सन ने एक साक्षात्कार के दौरान यह माँग भी की है कि नई महामारी का इशारा देने के साथ ही किसी भी स्थिति में वुहान लैब के रहस्य की जड़ें खंगालनी ही पड़ेंगीं।

फ्रँकनव्हायरस, शैरी मार्क्सन

ऑस्ट्रेलिया में बतौर खोज-पत्रकार कार्यरत शैरी मार्क्सन की ‘व्हॉट रियली हैपन्ड इन वुहान’ नामक किताब हाल ही में प्रकाशित हुई। इस किताब में उन्होंने कोरोना की महामारी ‘वुहान इन्स्टिट्यूट ऑफ वायरॉलॉजी’ से ही शुरू होने की बात ड़टकर बयान की है। कोरोना के विषाणुओं में मौजूद ‘जेनेटिक क्लूज’ वर्णित लैब एवं करीबी इलाकों में जारी संदिग्ध गतिविधियाँ और महामारी से जुड़ी जानकारी छुपाने के लिए चीन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलाई मुहिम जैसे सभी मुद्दे यह महामारी वुहान लैब से ही फैलने की बात साबित करते हैं, यह दावा मार्क्सन ने इस किताब में किया है।

वुहान लैब’ से संबंधित सामने आए हुए सभी सबूत पुख्ता जानकारी प्रदान करते हैं। सभी सबूत मिलाने पर वुहान लैब में कुछ विचित्र जरुर हुआ है, इसमें कोई भी आशंका नहीं है। चीन की हुकूमत इसे छुपाने की कोशिश करती हुई दिख रही है। यह सभी मुद्दे काफी अहम हैं। कोरोना की महामारी ने सिर्फ ४७ लाख लोगों को शिकार किया है, ऐसा नहीं है बल्कि इसने हम सबके जीवन में उलट-पलट कर दिया है। कई लोगों ने अपनी नौकरियाँ खोई हैं, कई उद्योग डूब गए हैं और बच्चों के स्कूल भी बंद हुए हैं’, इन शब्दों में शैरी मार्क्सन ने चीन को लक्ष्य किया।

चीन की वुहान लैब ही कोरोना वायरस की खोज करनेवाली शीर्ष प्रयोगशाला थी, इस ओर भी मार्क्सन ने ध्यान आकर्षित किया। लेकिन, इसका दर्जा ब्रिटेन और अमरीका की प्रयोगशालाओं की तरह नहीं था और इस पर आवश्‍यक निगरानी भी नहीं रखी जा रही थी, यह दावा ऑस्ट्रेलियन लेखिका ने किया है। वुहान लैब में खतरनाक जैविक खोज जारी था और नई महामारी को रोकने के लिए वहां पर क्या चल रहा है, इसकी पूरी जानकारी विश्‍व के सामने लाने की आवश्‍यकता होने का बयान भी मार्क्सन ने किया है। लेकिन, चीन यह जानकारी कभी भी विश्‍व के सामने नहीं आने देगा, यह आरोप भी उन्होंने लगाया।

फ्रँकनव्हायरस, शैरी मार्क्सन

वर्ष २०१९ में कोरोना की महामारी शुरू होने के साथ ही इस मुद्दे पर चीन की भूमिका संदिग्ध रही है। इस मुद्दे पर लगाए जानेवाले आरोपों से बचने के लिए चीन ने कोरोना वायरस की जानकारी लगातार छुपाकर रखी। साथ ही इसका उद्गम अन्य देशों में होने के फिजूल दावे भी प्रसिद्ध किए थे। कोरोना की महामारी पर बयान करने पर संबंधित चीनी वैज्ञानिकों की जुबान बंद की गई। कई पत्रकारों को गायब किया गया था। इस वर्ष के शुरू में ‘वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन’ ने प्रसिद्ध की हुई रपट में ‘वुहान लैब’ के संबंधों से इन्कार किया गया था। लेकिन, अमरीका के पूर्व राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने बीते वर्ष ही चीन पर सरेआम यह आरोप लगाया था कि, कोरोना वायरस का उद्गम चीन के वुहान लैब में हुआ है।

इसके बाद अमरीका के कई वरिष्ठ नेता, अफसर एवं वैज्ञानिकों ने वुहान लैब की ओर ही उंगली दिखाई थी। चीन से बाहर निकली एक वैज्ञानिका ने भी इससे संबंधित सबूत उसके पास होने का ऐलान किया था। इसके बाद अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष ज्यो बायडेन ने अमरिकी यंत्रणाओं को ‘वुहान लैब लीक’ मामले की जाँच करके रपट पेश करने के आदेश दिए थे। तत्पश्चात, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘वुहान लीक थिअरी’ का मुद्दा उठा था। ‘वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन’ (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख वैज्ञानिक पीटर बेन एम्बारेक ने बीते महीने में ही यह दावा किया था कि, कोरोना की महामारी की शुरूआत वुहान लैब से ही होने की संभावना अधिक हैं।

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