वर्ष 1945 के तरह ही अब भी रशिया का ही विजय होगा

- राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमिर पुतिन का वचन

रशिया का ही विजय

मॉस्को/किव्ह – युक्रेन का युद्ध छेडने के लिए पश्चिमी देश जिम्मेदार हैं। मगर सन 1945 की तरह ही अब भी रशिया का ही विजय होगा, ऐसा वचन रशिया के राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमिर पुतिन ने दिया। दूसरे महायुद्ध में रशिया ने नाज़ी जर्मनी पर पाई हुई विजय के निमित्त आयोजित किए गए ’विक्टरी डे’ कार्यक्रम में राष्ट्राध्यक्ष पुतिन ने फिर से युक्रेन में उद्देश्य पूरे हुए बगैर ना लौटने का इशारा दिया। तो रशियन फौजें मातृभूमि की सुरक्षा के लिए लड रहे हैं, ऐसा दावा किया।

पुतिन के वक्तव्यों पर पश्चिमी देशों से तीव्र प्रतिक्रियाएं उमडी हैं। आने वाले समय में युक्रेन ’विजय दिवस’ मनाएगा, ऐसी टीका युक्रेन के राष्ट्राध्यक्ष वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने की है। तो रशिया के पास विजय मनाने जैसा कुछ भी नहीं है, ऐसी टीका अमेरिका ने की है।

रशिया का ही विजय

युक्रेन एवं उसको समर्थन देनेवाले पश्चिमी देशों ने डोन्बास एवं क्रिमिया पर आक्रमण की योजना बनाई थी। रशिया की सीमाओं पर जानबूझकर धोखादायक स्थिति निर्माण की गई। युक्रेन में बडे पैमाने पर लश्करी सलाहकार एवं शस्त्र तैनात किए गए। रशिया के समक्ष अन्य कोई विकल्प बाकी नहीं रखा था। इसलिए शत्रु के हमले से पहले रशिया ने कारवाई करने का निर्णय लिया। यह निर्णय एक स्वतंत्र, सार्वभौम एवं सामर्थ्यशाली देश ने चुना हुआ विकल्प था।’ इन शब्दों में पुतिन ने युक्रेन पर की गई कारवाई में छुपी हुई भूमिका स्पष्ट की।

रशिया के संरक्षणदल इन दिनों अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए लड रहे हैं इसका अहसास उन्होंने इस समय कराया। ’रशियन जवान अपनी मातृभूमि के लिए, इसके भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस संघर्ष के कारण ही दूसरे महायुद्ध से सीखा हुआ सबक कोई नहीं भूलेगा, इसका अहसास रखो,’ यह भी पुतिन ने इस दौरान कहा। बदकिस्मती से नाज़ीवाद पुन: सर उठाता हुआ दिख रहा है और युक्रेन फैसिज़म की गिरफ्त में अटका है, इस ओर उन्होंने ध्यान आकर्षित किया। नाज़ीवाद के पुनर्जन्म को रोकना रशिया का कर्तव्य है इसका आवाहन भी राष्ट्राध्यक्ष पुतिन ने किया।

रशिया का ही विजय

प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी ’विक्टरी डे’ के निमित्त रशिया की राजधानी मॉस्को में भव्य लश्करी संचलन संपन्न हुआ। इस संचलन में मिसाईल लौंचर्स, टैंकें एवं सशस्त्र वाहनों समेत हजारों जवानों का सहभाग था। रशियन फौजें तथा समर्थकों ने युक्रेन में मारिपोल, खेरसन जैसे शहरों में भी ’विक्टरी डे’ कार्यक्रम आयोजित करने की जानकारी सामने आई है।

पर पशिमी माध्यम तथा सोशल मीडिया पर रशिया के संचलन में हमेशा की तरह भव्यता एवं लश्करी सामर्थ्य के आक्रामक प्रदर्शनों का अभाव था, ऐसी टीकाएं जारी हैं। पुतिन के ’विक्टरी डे’ कार्यक्रम पर भी पश्चिमियों ने रूखापन दर्शाया। ब्रिटेन के संरक्षण मंत्री बेन वॉलेस ने कलंक लगाया कि, युक्रेन के युद्ध से रशिया 70 वर्षोंपूर्व के फैसिज़्म का पुनरावरण कर रही है।

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