नाटो का हिस्सा होने के लिए तैयार फिनलैण्ड को रशियन राष्ट्राध्यक्ष की सख्त चेतावनी

मास्को – रशिया की सख्त चेतावनी के बावजूद फिनलैण्ड और स्वीडन इन दो देशों ने नाटो का हिस्सा होने की तैयारी दिखायी हैं। इसका असर दिखाई देने लगा हैं और रशिया ने फिनलैण्ड की बिजली तोड़ दी हैं। फिनलैण्ड की यंत्रणाओं ने इसकी जानकारी साझा की। साथ ही इसी दौरान फिनलैण्ड के राष्ट्राध्यक्ष साउली निनिस्टो और रशिया के राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमीर पुतिन की फोन पर बातचीत होने का वृत्त हैं। इस चर्चा के दौरान रशियन राष्ट्राध्यक्ष ने रशिया से खतरा ना होने के बावजूद नाटो का हिस्सो होकर फिनलैण्ड अपनी तटस्थता का त्याग ना करें, इसके बुरे नतीजे सामनेआएंगे, यह इशारा दिया है।

यूक्रैन ने नाटो में शामिल होने की तैयारी करने के बाद फ़रवरी महीने में रशिया ने यूक्रैन पर हमला किया था। इसके बाद यूक्रैन युद्ध शुरू हुआ और यह युद्ध अब और कितने समय तक शुरू रहेगा, यह कोई भी नहीं बता सकता, ऐसा दावा यूक्रैन के राष्ट्राध्यक्ष झेलेन्स्की कर रहे हैं। लेकिन, हम नाटो में शामिल नहीं होंगे, यह ऐलान यूक्रैन ने करने के बाद युद्ध बंद होगा, ऐसा रशिया का कहना हैं। रशिया की यह माँग यूक्रैन और यूक्रैन के पीछे खड़े अमरीका और अन्य पश्चिमी देशों को मंजूर नहीं। नाटो के समावेश के मुद्दे पर यूक्रैन पर हमला करनेवाली रशिया, ऐसा ही निर्णय करने का विचार कर रहें फिनलैण्ड और स्वीडन पर भी हमला करेगी क्या, यह नया सवाल भी किया जा रहा हैं।

फिनलैण्ड और स्वीडन जैसें बाल्टिक देशों ने भी नाटो में शामिल होने के संकेत दिए हैं। ऐसी स्थिति में रशिया ने फिनलैण्ड की बिजली सप्लाई रोककर इस देश को पहला झटका दिया दिख रहा हैं। इसी बीच, फिनलैण्ड के राष्ट्राध्यक्ष साउली निनिस्टो की रशियन राष्ट्राध्यक्ष से फोन पर बातचीत हुई। इस चर्चा में राष्ट्राध्यक्ष निनिस्टो ने यह स्पष्ट किया कि, हमारा देश नाटो का हिस्सा होने संबंधित अंतिम निर्णय जल्द ही करेगा। फिनलैण्ड ने परंपरागत तटस्थता की नीति में बदलाव करना गलत साबित होगा, इसके बुरे नतीज़े सामने आएँगे, इसका अहसास रशियन राष्ट्राध्यक्ष ने फोन पर हुई इस चर्चा के दौरान दिलाया।

रशिया से खतरा ना होने के बावजूद अपनी नीति मे बदलाव किया तो इसके नकारात्मक परिणाम सामने आए बिना नहीं रहेंगे, ऐसा इसारा राष्ट्राध्यक्ष पुतिन ने फिनलैण्ड के राष्ट्राध्यश्र को दिया हैं। साथ ही यूक्रैन का युद्ध रोकने के लिए रशिया उत्सुक हैं फिर भी इससे संबंधित बातचीत करने के लिए यूक्रैन गंभीर ना होने का आरोप रशिया के राष्ट्राध्यक्ष ने इस चर्चा के दौरान लगाया।

इसी बीच, फिनलैण्ड और स्वीडन का नाटो मे शामिल होना अब उतनी आसान बात नहीं रही। इसी मुद्दे पर नाटो में ही गंभीर मतभेद होने की बात सामने आयी हैं। नाटो के सदस्य तुर्की ने इन दोनों देशों के समावेश का खुलेआम विरोध किया हैं। नाटो के अन्य यूरोपिय सदस्य देश भी इसी तरह की भूमिका अपना सकते हैं। इस मुद्दे पर अमरीका और ब्रिटेन के साथ अन्य नाटो देशों के मतभेद तीव्र होने की संभावना भी इस वजह से सामने आ रही हैं।

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