‘डि-डॉलराइजेशन’ शुरू हुआ हैं – अमरिकी आर्थिक विशेषज्ञों की चेतावनी

वॉशिंग्टन – ‘अमरीका ने डॉलर का हथियार की तरह किया इस्तेमाल और मुद्रा संबंधित नीति में हो रहे बदलाव के कारण वैश्विक स्तर के व्यापार के लिए एक मात्रा चलन बने अमरीका के डॉलर का स्थान अब नहीं रहा। वैश्विक स्तर पर ‘डि-डॉलराइजेशन’ शुरू हुआ हैं और यह आगे भी जारी रहेगा। धीरे धीरे या मुमकिन हो, उम्मीद से भी तेज़ गति से डॉलर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना रुदबा खो बैठेगा’, ऐसा इशारा अमरिकी आर्थिक विशेषज्ञ पीटर सी.अर्ल ने दिया। साथ ही चीन के दौरे पर पहुंचे ब्राज़ील के राष्ट्राध्यक्ष लुला दा सिल्वा ने ब्रिक्स देशों को अमरिकी डॉलर त्याग कर स्थानिय मुद्राओं का इस्तेमाल में व्यापार करें, ऐसा आवाहन किया हैं।

‘डि-डॉलराइजेशन’

ईरान और रशियन अर्थव्यवस्था पर लगाए प्रतिबंध और इसके परिणामों के कारण विश्व के अन्य देशों ने भी डॉलर को लेकर आपात योजना बनाने की तैयारी शुरू की है। अमरीका के डॉलर का विकल्प होने वाली आरक्षित मुद्रा के मुद्दे पर पिछले कुछ दशकों से चर्चा शुरू हैं। फिर भी करीबी दिनों में इसे गति प्राप्त होने की ओर आर्थिक विशेषज्ञ पीटर सी.अर्ल ने ध्यान आकर्षित किया। ब्राज़ील और चीन के बीच युआन और रिआल का इस्तेमाल करने के लिए किया समझौता, भारत और मलेशिया ने स्थानिय मुद्रा को शुरू किया इस्तेमाल और चीन-यूएई-फ्रान्स के ईंधन कारोबार में हुआ युआन का प्रयोग, इन घटनाओं का ज़िक्र अमरिकी आर्थिक विशेषज्ञ ने किया हैं।

‘डि-डॉलराइजेशन’

अमरीका ने आर्थिक और व्यापारी युद्ाध में डॉलर को हथियार की तरह किया इस्तेमाल और अमरिकी प्रशासन ने डॉलर से जुड़े किए गलत निर्णयों की वजह से कई देश धीरे धीरे डॉलर से दूर हो रहे हैं, इसका अहसास आर्थिक विशेषज्ञ अर्ल ने कराया। वर्ष २००८-०९ की आर्थिक मंदी के बाद अपनाई नीति एवं २०२० के कोरोना दौर के बाद किए निर्णयों की वजह से डॉलर से भरोसा उड़ता गया, यह दावा अमरिकी आर्थिक विशेषज्ञों ने किया है। डॉलर जैसी मुद्रा की आसानी से हो रही उपलब्धता सकारात्मक बात होने के बावजूद इसकी गिरावट रोकना मुमकिन नहीं होगा और यह प्रक्रिया शुरू हुई हैं, ऐसा इशारा अर्ल ने दिया।

‘डि-डॉलराइजेशन’

अमरिकी आर्थिक विशेषज्ञ ‘डि-डॉलराइजेशन’ को लेकर चेतावनी देने के साथ ही ब्राज़ील के राष्ट्राध्यक्ष ने खुलेआम डॉलर का इस्तेमाल त्यागने का आवाहन किया। चीन दौरे पर दाखिल हुए राष्ट्राध्यक्ष लुला दा सिल्वा ब्रिक्स गुट के ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ के समारोह में शामिल हुए थे। उस समय उन्होंने यह कहा कि, हम सभी देश आज भी व्यापार के लिए डॉलर का इस्तेमाल क्यों करते हैं, डॉलर के बजाय अपनी स्थानीय मुद्रा से कारोबार क्यों नहीं करते, यह सीधा सवाल किया। सोने का आधार हटाने के बाद अमरिकी डॉलर इस्तेमाल करना है, यह निर्णय किसने किया, इन शब्दों में उन्होंने अमरीका के साथ पश्चिमी देशों को लक्ष्य किया।

मौजूदा समय पर व्यापारी निर्यात के लिए सभी देश डॉलर के पीछे भाग रहे हैं। लेकिन, वास्तव में इन देशों ने अपनी मुद्रा का इस्तेमाल करना होगा। ब्रिक्स गुट की बैंक ने चीन और ब्राज़ील एवं ब्राज़ील और ब्रिक्स के अन्य देशों के व्यापार के लिए मुद्रा का निर्माण करना होगा, यह भी उन्होंने किया। पिछले महीने ब्राज़ील ने व्यापार और आर्थिक कारोबार में चीन के युआन का इस्तेमाल करने से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं। साथ ही रशिया के वरिष्ठ अधिकारियों ने ‘ब्रिक्स’ गुट नई मुद्रा विकसित कर रहा हैं, ऐसे संकेत भी दिए हैं।

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