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चीन ने धर्मश्रद्धा के विरोध में युद्ध छेड रखा है – अमरिकी राजनयिक अधिकारी का आरोप

वॉशिंगटन – ‘चीन की कम्युनिस्ट हुकूमत ने धर्मश्रद्धा के विरोध में जंग छेडी है| लेकिन, यह युद्ध वह कभी भी जीत नही सकते’, यह कहकर अमरिकी विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ राजनयिक अधिकारी ने खलबली मचाई है| चीन की कम्युनिस्ट हुकूमत अपने ही जनता पर विश्‍वास नही करती, इसी लिए यह हुकूमत जनता को अपनी धर्मश्रद्धा का पालन करने नही देती, यह फटकार भी इस अधिकारी ने लगाई है| पिछले कुछ दिनों से चीन में इस्लामधर्मि अल्पसंख्यांकों पर अत्याचार होने की घटनाएं सामने आ रही है और इसमें उघुरवंशी इस्लामधर्मियों पर चीन कर रहे अन्याय को अमरिकी विदेश मंत्री ने हाल ही उजागर किया था|

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अमरिकी विदेश मंत्रालय के ‘इंटरनैशनल रिलिजस फ्रिडम’ विभाग के विशेष दूत ‘सॅम ब्राउनबॅक’ इन्होंने चीन की हुकूमत पर कडी आलोचना की है| चीन की कम्युनिस्ट हुकूमत धर्मश्रद्धा के विरोध में गई है और इस हुकूमत ने धर्मश्रद्धा के विरोध में युद्ध ही शुरू किया दिख रहा है| चीन में शुरू इन गतिविधियां यही सिद्ध कर रही है| यह दावा ब्राउनबॅक इन्होंने किया है| चीन की कम्युनिस्ट हुकूमत का अब अपनी ही जनता पर भरोसा नही रहा| इसी लिए जनता को धार्मिक आजादी देकर अपनी धर्मश्रद्धा के नुसार अनुकरण करने की आजादी यह हुकूमत नही दे रही है| चीन के इन अत्याचारों की वजह से अरबों लोगों की धर्मश्रद्धा खतरे में आती दिख रही है, यह चिंता भी ब्राउनबॅक इन्होंने व्यक्त की| लेकिन कुछ भी हो, चीन धर्मश्रद्धा के विरोध में शुरू किए इस युद्ध में सफल नही हो सकेगा, यह दावा ब्राउनबॅक इन्होंने किया|

उघुरवंशी इस्लामधर्मियों को चीन ने हुकूमत के कडे नियमों में दबोच रखा है और उघुरवंशी अपने बच्चों के नाम भी धर्म के नुसार नही रख सकेंगे, यह प्रावधान चीन ने किए है| साथ ही चीन की हुकूमत धर्म ने निषिद्ध किया हुआ खाना भी उघुरवंशियों को जबरन खिला रही है, यह चौकानेवाली जानकारी अमरिकी विदेश मंत्रालय एवं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने उजागर की थी| यह प्रकार डरावना है और यह मानवी अधिकारों का हनन साबित होता है, यह आलोचना अमरिका के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने एवं मानवाधिकार संगठनों ने की थी| साथ ही तिब्बत में बौद्धधर्मियों को भी चीन की धर्मविरोधी नीति का झटका लग रहा है|

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चीन के नियमों के नुसार तिब्बत की बौद्धधर्मिय जनता अपने धार्मिक नेता का चुनाव भी कर नही सकती| चीन का यह हस्तक्षेप तिब्बत के बौद्धधर्मियों के भारी क्रोध का कारण बन रहा है| साथ ही चीन की कम्युनिस्ट हुकूमत ने अपने देश में ख्रिस्तधर्मियों के कई प्रार्थनास्थल भी नष्ट किए है| वही, कुछ प्रार्थनास्थलों में सर्व्हिलन्स कैमेरा लगाना अनिवार्य करके चीन की हुकूमत ने ख्रिस्तधर्मियों को भी दुखाया है|

इस तरह चीन अपने देश में सिर्फ धार्मिक अल्पसंख्याक ही नही, बल्कि सभी जनता के धर्मश्रद्धा को चुनौती दा रहा है| ब्राउनबॅक इन्होंने यह बात रेखांकित करके चीन अपने नीति में बदलाव करने, यह चेतावनी दी है| दो दिन पहले ही चीन के बाहर रह रहे कुछ उघुरवंशी नेताओं ने अमरिकी विदेश मंत्री माईक पोम्पिओ से भेंट की और अपनी कैफियत रखी थी| इसके बाद पोम्पिओ इन्होंने एक ओर मसूद अजहर जैसे दहशतगर्द का बचाव करनेवाला चीन अपने देश में इस्लामधर्मी जनता पर अन्याय कर रहा है, यह कडी आलोचना भी की थी|

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