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आर्क्टिक क्षेत्र में रशिया के नया लष्करी अड्डा कार्यान्वित

मास्को – रशिया ने आर्क्टिक क्षेत्र में अपना प्रभाव बढाने के लिए आक्रामक कदम उठाए है और इसी के तहेत हाल ही में नया लष्करी अड्डा कार्यान्वित करने की जानकारी सामने आ रही है| ‘सेव्हर्नी क्लेव्हर’ नाम के इस अड्डे पर २५० से अधिक सैनिक और मिसाइल डिफेन्स सिस्टिम एवं एंटी शिप मिसाइल्स की तैनाती भी रशिया ने की है| आर्क्टिक में रशिया की तैयारी जोरों से शुरू है ऐसे में इस क्षेत्र पर कनाडा अपना हक खो सकता है, यह इशारा कनाडा के सांसदों ने दिया है|

पृथ्वी के उत्तरी प्रांत ‘आर्क्टिक’ में अहम समुद्री मार्ग के तौर पर जाने जा रहे ‘कॉटल्नी आयलैंड’ पर रशिया ने यह नया अड्डा स्थापित किया है| इस अड्डे के जरिए भविष्य में आर्क्टिक में विकसित हो रहे व्यापारी मार्ग पर नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से इस लष्करी अड्डे का निर्माण हुआ है, ऐसा कहा जा रहा है| ‘हमारे पास हवाई क्षेत्र एवं ‘नॉर्दन सी’ पर नजर रखने की जिम्मेदारी है’, यह जानकारी इस लष्करी अड्डे के प्रमुख लेफ्टनंट कर्नल व्लादिमीर पॅसेक्निक इन्होंने दी|

रशिया ने इस अड्डे पर संपूर्ण आर्क्टिक क्षेत्र पर नजर रखना मुमकिन हो, इस क्षमता की राडार यंत्रणा एवं कोस्टल डिफेन्स मिसाइल सिस्टिम और ‘पँटसिर’ हवाई विरोधी मिसाइल यंत्रणा तैनात की है| साथ ही इस लष्करी अड्डे पर तैनात २५० सैनिकों को लगभग एक साल के लिए जरूरी सामान का भांडार भी रखा गया है| इस वजह से बाहर से किसी भी प्रकार की मदद उपलब्ध नही हुई तो भी करीबन एक साल तक यह अड्डा सहजता से काम कर सकेगा, यह दावा रशियन अधिकारी ने किया है|

रशिया के राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमीर पुतिन इन्होंने खुद ‘आर्क्टिक’ क्षेत्र देश के भविष्य में अहम योगदान देनेवाला साबित होगा, यह संकेत देकर इस क्षेत्र में लष्करी तैनाती एवं निवेश बढाने के संकेत दिए थे| इसके लिए ‘फार ईस्ट ऍण्ड आर्क्टिक डेव्हलपमेंट’ नाम से स्वतंत्र विभाग भी स्थापित किया गया है| पिछले चार वर्षों में रशियन रक्षाबलों ने आर्क्टिक में अपनी गतिविधियां बढाई है और ‘सेव्हर्नी क्लेव्हर’ के साथ सेना के तीन अड्डे कार्यान्वित किए है|

इस वर्ष के आखिर तक रशिया आर्क्टिक क्षेत्र में बडे युद्धाभ्यास का आयोजन करने की तैयारी में है| इस युद्धाभ्यास के लिए ‘टीसेंटर-२०१९’ यह नाम दिया गया है| इसमें रशिया के ‘नॉर्दन फ्लीट’, ‘पैसिफिक फ्लीट’ के साथ ‘सेंट्रल मिलिटरी डिस्ट्रिक्ट’ के हजारों सैनिक शामिल होंगे| यह युद्धाभ्यास ‘आर्क्टिक’ में तैनात लष्करी टुकडियों की युद्ध की तैयारी जांचने के लिए आयोजित किया जा रहा है, यह बात रशियन सूत्रों ने स्पष्ट की| इसमें रशिया से खास बर्फिले क्षेत्र के लिए विकसित की गई कई रक्षा यंत्रणाओं का भी परीक्षण किया जाएगा|

रशिया से हो रही इन तेज गतिविधियों की तुलना में आर्क्टिक पर दावा कर रहे अन्य देश पीछे रहते दिख रहे है| अमरिका ने आर्क्टिक का क्षेत्र में अलास्का का अड्डा दुबारा शुरू करने के संकेत दिए है, लेकिन इसके लिए जरूरी तैयारी अभी पूरी नही हुई है| कनाडा की भी आर्क्टिक की ओर अनदेखी होने की बात सामने आ रही है और देश के सांसद इस मुद्दे पर सरकार को लक्ष्य कर रहे है| पिछले वर्ष नाटो ने ‘नॉर्वे’ में युद्धाभ्यास का आयोजन करके आर्क्टिक पर सही तरिके से नजर रखने के संकेत दिए है, फिर भी इस दिशा में कदम नही बढाए है| इस वजह से आर्क्टिक पर वर्चस्व स्थापित करने के लिए शुरू हुई स्पर्धा में रशिया सफल होगी, यह संकेत विश्‍लेषक दे रहे है|

आर्क्टिक के लिए रशिया का भारत के साथ सहयोग

नया लष्करी अड्डा कार्यान्वित करके रशिया इस क्षेत्र पर अपना वर्चस्व स्थापित कर रही है, तभी वहां की नैसर्गिक साधन संपत्ति के लिए अन्य देशों के साथ सहयोग शुरू करने की तैयारी भी रशिया ने रखी है| रशिया का नजदिकी मित्रदेश होनेवाला भारत इस संबंध में आगे है और हालही में भारत के विदेश सचिव ने रशिया यात्रा के दौरान ‘आर्क्टिक’ संंबधी चर्चा की है| ‘आर्क्टिक’ के विकास के लिए रशिया ने शुरू की हुई कोशिश के लिए भारत सहायता करेगा और इसके लिए भारत का बडा योगदान रहेगा, यह जानकारी भारत के विदेश सचिव विजय गोखले इन्होंने दी थी|

 

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