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फ्रान्स के राष्ट्राध्यक्ष मैक्रॉन यूरोपिय जनतंत्र तबाह कर रहे है  – जर्मन नेता ने करी कडी आलोचना

यूरोपिय महासंघ में ‘फ्रान्स-जर्मनी’ ऐसी किसी भी प्रकार का गठबंधन नही है, बल्कि फ्रान्स के राष्ट्राध्यक्ष मैक्रॉन यूरोपिय जनतंत्र तबाह करने की हरकतें कर रहे है, ऐसी कडी आलोचना जर्मन नेताओं ने की ही। यूरोपिय संसद के चुनाव के बाद महासंघ के प्रमुख पदों का चयन जल्द ही होगा और इसमें फ्रेंच राष्ट्राध्यक्ष ने आक्रामक भूमिका स्वीकारने की बात उजागर हुई है। उन्होंने जर्मन उमिदवार के चयन में बनाया अडंगा और विवादित वक्तव्य की वजह से जर्मनी के सियासी दायरे में नाराजगी का स्वर गुंज रहा है। इस वजह से नजदिकी समय में महासंघ के प्रमुख देशों में ही संघर्ष शुरू होने के संकेत प्राप्त हो रहे है।

यूरोपिय जनतंत्र, तबाह, मैक्रॉन, यूरोपिय महासंघ, आलोचना, जर्मनी, ब्रुसेल्सयूरोपियन संसद के चुनाव में ‘ईपीटी’ नाम से पहचाने जा रहे गुट को सबसे अधिक जगहों पर जीत हासिल हुई है। जर्मनी के ‘मॅन्फेड वेबर’ इसी गुट के सदस्य है और उनका यूरोपियन कमिशन के प्रमुख के तौर पर चयन होना तय समझा जा रहा था। अबतक महासंघ की परंपरा के नुसार संसद में सबसे अधिक जगह प्राप्त करनेवाले गुट का नेता बतौर प्रमुख चुना जा रहा है। चुनाव के नतीजे आने के बाद २८ सदस्य देशों के राष्ट्रप्रमुखों की बैठक में उनका चयन होता रहा है।

इस पृष्ठभूमि पर पिछले सप्ताह में ब्रुसेल्स में हुई बैठक में जर्मन नेता वेबर का चयन होने की उम्मीद थी। फिलहाल महासंघ के प्रमुख और अहम देश समझे जा रहे जर्मनी की चान्सेलर एंजेला मर्केल ने वेबर का समर्थन किया है। मर्केल और मैक्रॉन की नजदिकीयों का विचार करें तो वेबर का चयन होना तय समझमा जा रहा था। लेकिन, ब्रुसेल्स में हुई बैठक में मैक्रॉन ने वेबर का चयन करने के लिए विरोध किया है।

इस वजह से वेबर का चयन फिलहाल संभव नही हुआ है और साथ ही महासंघ के अन्य प्रमुख पदों की नियुक्ती भी नही हो सकी है। महासंघ के प्रमुख के तौर पर उम्मीदवारी घोषित करने के बाद वेबर ने एक मुलाकात में मैक्रॉन की भूमिका पर नाराजगी व्यक्त की। ‘फिल हाल अन्य लोगों से जो प्रस्ताव सामने आ रहे है, उसकी संभावना विनाशकारी ऐसी ही होगी। महासंघ को जल्द ही बडे संकट के दौर में प्रवेश करना होगा’, इन शब्दों में वेबर ने मैक्रॉन पर आलोचना की।

महासंघ के पदों के चयन को लेकर जर्मनी और फ्रान्स में कडा तनाव होने का यह पहला ही अवसर समझा जा रहा है। इस घटना ने पिछले कुछ वर्षों में जर्मनी और फ्रान्स में बनी नजदिकीयों पर भी सवाल किया है। पिछले कुछ वर्षों में महासंघ बिखरने के इशारे दिए जा रहे है र ऐसे में इन दो प्रमुख देशों ने किए गठबंधन और एकता के लिए स्वीकारी भूमिका अहम साबित हुई थी। लेकिन, इन्हीं दोनों में शुरू हुआ संघर्ष महासंघ के भविष्य के लिए भी मुश्किल साबित हो सकता है, यह संकेत विश्‍लेषकों से दिए जा रहे है।

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