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‘फेसबुक’ की ‘लिब्रा’ चलन पर प्रतिबंध लगाने के साथ ‘डिजिटल टैक्स’ पर ‘जी७’ में सहमति

पैरिस – ‘बडी निजी कंपनियां किसी भी जनतंत्र के बिना उनका चलन जारी करेंगे, यह बात हम कभी भी स्वीकार नही करेंगे, इन शब्दों में फ्रान्स के वित्तमंत्री ‘ब्रुनो ले मेर’ ने नजदिकी समय में बडी कंपनियों से जारी होनेवाली ‘क्रिप्टोकरन्सी’ या ‘डिजिटल चलनों’ पर प्रतिबंध लगाने के संकेत दिए| फ्रान्स में हुई ‘जी७’ गुट के वित्तमंत्री एवं मध्यवर्ती बैंकों के प्रमुखों की बैठक में ‘डिजिटल टैक्स’ के मुद्दे पर भी सहमित होने की बात सामने आ चुकी है|

‘जी७’ की बैठक में आगे आए यह मुद्दे यानी अगले समय में ‘बिग टेक’ और ‘क्रिप्टोकरन्सी’ चलानेवाली कंपनियां एवं दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में होनेवाले संघर्ष के संकेत समझे जा रहे है|

पिछले महीने में दुनियाभर में करीबन दो सौ करोड ‘युझर्स’ रखनेवाली ‘फेसबुक’ ने अपनी ‘लिब्रा’ नाम की ‘क्रिप्टोकरन्सी’ शुरू करने का ऐलान किया था| ‘बैंक में जमा राशि’ और सरकारी बांड का आधार होनेवाला यह डिजिटल चलन वर्ष २०२० में लांच होगा, यह दावा फेसबुक ने किया था| इसी दौरान दुनियाभर के बैंक खाता ना होनेवाले करोडों लोग इसका इस्तेमाल करेंगे, इस ओर भी फेसबुक ने ध्यान आकर्षित किया था| फेसबुक ने किए इस दावे की वजह से अमरिका के साथ दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में खलबली मची थी|

हम ‘बिटकॉईन’ या अन्य किसी भी ‘क्रिप्टोकरन्सीज्’ के चहेते नही है, यह कहकर इस क्रिप्टोकरन्सीज् के जरिए नशीले पदार्थों का व्यापार और अन्य गैरकानूनी हरकतों को बढावा मिलता है, यह आलोचना अमरिका के राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने किया था| साथ ही फेसबुक से लांच हो रही ‘लिब्रा’ चलन की भी विश्‍वासार्हता नही है, यह दावा ट्रम्प ने किया| इसके साथ ही अमरिका के वित्तमंत्री ने भी क्रिप्टोकरन्सी यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा होने की बात कहकर अगले दिनों में इस पर नियंत्रण लाने की कोशिश करने का इशारा दिया था|

वही, माहिती और तकनीकी क्षेत्र की बडी कंपनियां प्राप्त कर रही बडी आय पर कर लगाने का निर्णय फ्रान्स ने किया था| इसके नुसार जागतिक स्तर पर ७५ करोड युरों से भी अधिक आय होनेवाली और फ्रान्स में कम से कम ढाई करोड युरो महसुल प्राप्त कर रही माहिती और तकनीकी क्षेत्र की कंपनियों पर तीन प्रतिशत कर लगाया जाएगा| इस निर्णय पर इस वर्ष के शुरू के दिनों से अमल करने का निर्णय हुआ है| इस पृष्ठभूमि पर फ्रान्स में हुई ‘जी७’ की बैठक ध्यान आकर्षित कर रही है|

‘जी७’ का अध्यक्षपद फिलहाल फ्रान्स के पास है और इसी कारण गुरूवार के दिन हुई बातचीत में ‘डिजिटल टैक्स’ का मुद्दा आगे रहने के संकेत पहले ही दिए गए थए| वही, जापान ने पिछले कुछ दिनों में ‘लिब्रा’ का मुद्दा लगातार उपस्थित करके ‘जी७’ में इस पर बातचीत होगी, यह एहसास भी दिया गया था| लेकिन, इस मुद्दे पर ‘जी७’ देशों में हुई सहमति ध्यान आकर्षित कर रहा है|

गुगल, फेसबुक, एमेझॉन, एपल जैसी कंपनियों पर यह कंपनिया जीस देश से महसूल प्राप्त करेंगी उस देश में कम से कम कर लगाने के मुद्दे पर ‘जी७’ देशों की बैठक में सहमति हुई| साथ ही इस कर की एक सीमा हो, जिस से अन्य देश तकनीकी क्षेत्र की कंपनियों को अपनी ओर खिंचने के लिए स्पर्धा नही करेंगे, इस पर भी ‘जी७’ देशों ने तैयारी दिखाई है| इसमें अमरिका ने अपनाई ‘गिल्टी’ इस कर प्रणाली का जिक्र किया गया है और इस के आधार पर ‘डिजिटल टैक्स’ लगाने के संकेत भी दिए है|

‘जी७’ की बैठक में ‘फेसबुक लिब्रा’ समेत अन्य क्रिप्टोकरन्सी पर नियंत्रण लाने संबंधी किया गया निवेदन ध्यान आकर्षित कर रहा है| फिलहाल ‘बिटकॉईन’ समेत कई क्रिप्टोकरन्सी उपलब्ध है और तकनीकी क्षेत्र समेत अपराधी क्षेत्र के सदस्य भी इसका इस्तेमाल बढा रहे है, यह बात स्पष्ट हो रही है| इस वजह से अमरिका एवं यूरोपिय देश क्रिप्टोकरन्सीज् पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहे है और ‘जी७’ से प्राप्त हुए संकेत इसी का अहम स्तर साबित हो सकता है|

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