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‘ब्रेक्जिट’ के मुद्दे पर बहुमत खोने के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री जॉन्सन ने किया चुनाव का ऐलान

लंदन – तीन महीनें पहले ब्रिटेन की उस समय की प्रधानमंत्री थेरेसा मे को ‘ब्रेक्जिट’ के मुद्दे पर इस्तीफा देना पडा था| उनकी जगह प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी स्वीकारनेवाले प्रधानमंत्री बोरिस जॉन्सन को मंगलवार नाटकीय गतिविधियों में संसद में बहुमत खोना पडा है| उसके बाद प्रधानमंत्री जॉन्सन ने आक्रामक भूमिका अपनाकर १५ अक्तुबर के दिन ब्रिटेन में आम चुनाव कराने का ऐलान किया| ब्रिटेन की संसद में हुई इन नाटकीय गतिविधियां अभूतपूर्व है और इसी बीच ब्रिटेन के कदम अराजकता की दिशा में पडने शुरू हुए है, यह दावा कुछ विश्‍लेषकों ने किया है|

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने ‘ब्रेक्जिट’ के मुद्दे पर हल निकालने में प्राप्त हुई नाकामयाबी का कारण देकर अपने पद का इस्तीफा दिया था| उसके बाद सत्तापक्ष ‘कॉन्झर्व्हेटिव्ह’ दल की प्रक्रिया के अनुसार चुनाव करके बोरिस जॉन्सन बतौर नए नेता एवं प्रधानमंत्री चुने गए थे| ‘३१ अक्तुबर या उससे पहले ब्रिटेन यूरोपिय महासंघ से बाहर निकलेगा| हम सभी इसके लिए कटीबद्ध है| इसमें किसी भी प्रकार से या-यदि, पर-लेकिन का अडंगा नही होगा’, इन शब्दों में प्रधानमंत्री जॉन्सन ने अपनी प्राथमिकता स्पष्ट की थी|

लेकिन, मंगलवार के दिन संसद में ‘नो डील बे्रक्जिट’ के मुद्दे पर हुए वोटिंग के दौरान सत्तापक्ष के २० से अधिक सांसदों ने प्रधानमंत्री जॉन्सन के विरोध में वोट किया| साथ ही पक्ष का एक सांसद जाहीर तौर पर विपक्षी दल में जा बैंठें| इससे प्रधानमंत्री जॉन्सन ने सरकार ने प्राप्त किया महज एक वोट का बहुमत खोया है, यह स्पष्ट हुआ| सत्तापक्ष में हुई यह बगावत अभूतपूर्व समझी जा रही है|

इस घटना के बाद सत्तापक्ष ‘कॉन्झर्व्हेटिव्ह’ दल के २१ बागी सांसदों को तुरंत बाहर निकाला गया है| इसके बाद बुधवार के दिन संसद में प्रधानमंत्री जॉन्सन ने सासंद भंग करके १५ अक्तुबर के दिन देश में आम चुनाव कराने के लिए प्रस्ताव रखा| इस प्रस्ताव पर संसद में वोटिंग होगी और देर रात में ब्रिटीश संसद का निर्णय स्पष्ट हो सकेगा, यह संकेत सूत्रों ने दिए है|

जुलाई महीने में पद स्वीकार ने के बाद संसद में प्रधानमंत्री जॉन्सन ने ‘ब्रेक्जिट’ के मुद्दे पर अपनाई आक्रामकता का बडा समर्थन किया था| अक्तुबर महीने के अंत तक किसी भी स्थिति में ब्रिटेन यूरोपिय महासंघ से अलग होगा, यह वादा करते समय उन्होंने इस निर्णय पर अमल करने में किसी भी प्रकार का समझौता नही करेंगे, यह बात जॉन्सन ने स्पष्ट की थी| लेकिन, सत्तापक्ष के कुछ सांसद एवं विपक्ष ने यूरोपिय महासंघ के साथ समझौता करने के लिए बडी आग्रहता से भूमिका रखी|

सरकार के हाथ में बडा बहुमत ना होने से आगे जॉन्सन भी यही भूमिका अपनाने के लिए विवश होंगे, यह अंदाजा कुछ विपक्षी नेताओं ने व्यक्त किया था| लेकिन, जॉन्सन ने सीधे आम चुनाव का प्रस्ताव रखकर ब्रिटीश मतदाताओं को अगला निर्णय करने का जिम्मा दिया है| लेकिन, यह निर्णय ब्रिटेन में और भी गडबडाहट की स्थिति बनाएगा, यह संकेत विश्‍लेषकों ने दिए है|

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